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सीमा सड़क परियोजना में फिर फंसा भू अर्जन का पेच

बेतिया । भारत एवं नेपाल सीमा से लगी देश की महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना पर फिर एक बार भू अर्जन का पेच फंस गया है। कई पक्षों की ओर से जिला भू अर्जन के लिए दाखिल की गई जमीन या तो आम गैर मजरूआ हैं या फिर बकास्त भूमि। जमीन की जांच के सत्यापन में संबंधित पक्ष के मामले में रैयती भूमि नहीं होना मुख्य कारण बताया गया है। इसका परिणाम यह हुआ है कि पथ निर्माण विभाग बेतिया प्रमंडल के अधीन पड़ने वाले गौनाहा, सिकटा एवं मैनाटांड़ में सड़क निर्माण की जमीन का अधिग्रहण नहीं हो पाया है। इससे सड़क निर्माण कार्य पर प्रश्न चिह्न लग गया है। इसका खुलासा पथ निर्माण विभाग, बेतिया प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता की ओर से नरकटियागंज के भूमि सुधार उप समाहर्ता को भेजे गए पत्र से हुआ है। भूमि सुधार उप समाहर्ता को भेजे गए पत्र में संबंधित भूमि का सत्यापन डीसीएलआर के स्तर से कराने की बात कही गई है ताकि उक्त भूमि का रैयती होना साबित हो सके। रैयती भूमि होने के बाद ही उक्त भूमि का भू अर्जन किया जा सकता है। ऐसे में जब तक डीसीएलआर के स्तर से इस पर रिपोर्ट नहीं आ जाती है, तब तक संबंधित पक्ष को भू अर्जन की राशि का भुगतान भी नहीं किया जा सकता है। ऐसे में सड़क निर्माण का कार्य भी बाधित रह सकता है।

इनसेट

भूमि अधिग्रहण में लटकी 29 करोड़ की राशि

अब तक सड़क निर्माण के लिए तीन अंचलों सिकटा, मैनाटांड़ एवं गौनाहा के 60 गांवों के लिए किए गए भू अर्जन में 27 करोड़ 79 लाख रुपये का भुगतान नहीं हो सका है। भुगतान नहीं होने का कारण मुख्य कारण संबंधित जमीन का रैयती नहीं होना बताया जा रहा है। इसके लिए नरकटियागंज के डीसीएलआर से रिपोर्ट की मांग की गई है। भूमि अधिग्रहण किए गए 60 गांवों में सिकटा के 10, मैनाटांड़ के 23 एवं गौनाहा के 29 गांव शामिल हैं।

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ईस्ट वेस्ट कॉरिडोर के रूप में बनेगी यह सड़क

सीमा सड़क परियोजना के तहत जिले के मदनपुर से लेकर किशनगंज तक सड़क निर्माण कराया जाना है। इसमें पश्चिम चंपारण जिले में कुल 111 किलोमीटर सड़क निर्माण कराया जाएगा। सड़कों पर पड़ने वाले सभी पुल पुलिया का तो निर्माण कराया जा चुका है। लेकिन भूमि अधिग्रहण के कारण सड़क निर्माण में गति नहीं आ रही है। इसके पूर्व बगहा के मदनपुर क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण समय पर नहीं होने के कारण निर्माण कंपनी ने पथ निर्माण विभाग पर हर्जाना ठोका था।

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