मानसून की पहली बारिश से पानी- पानी हुआ शहर

मानसून की दस्तक से शहरवासी सहम गए हैं। मानसून का आगमन होते ही इसका असर भी दिखने लगा। सोमवार को दिनभर बारिश हुई। पूरे दिन आसमान में काले बादल मंडराते रहे। मौसम विभाग ने इस बार मानसून में अच्छी बारिश का अनुमान जताया है।

JagranMon, 14 Jun 2021 11:55 PM (IST)
मानसून की पहली बारिश से पानी- पानी हुआ शहर

बेतिया । मानसून की दस्तक से शहरवासी सहम गए हैं। मानसून का आगमन होते ही इसका असर भी दिखने लगा। सोमवार को दिनभर बारिश हुई। पूरे दिन आसमान में काले बादल मंडराते रहे। मौसम विभाग ने इस बार मानसून में अच्छी बारिश का अनुमान जताया है। शहरवासियों की मानें तो अच्छी बारिश उनके लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है। शहरवासी भगवान से कम बारिश की कामना कर रहे हैं। उनका कहना है कि तीन दिन की चक्रवाती बारिश ने शहर की जलनिकासी व्यवस्था के साथ ही प्रशासन व नगर निगम की तैयारियों की पोल खोल कर रख दी है। अगर मानसून के दौरान अच्छी बारिश हुई तो समझिए कि शहर तैरने के लिए तैयार है। सोमवार की सुबह से लगातार हो रही झमाझम बारिश से शहर पानी.पानी हो गया। नगर के सभी वार्डों के अलावा मुख्य सड़कों पर जलजमाव की समस्या उत्पन्न हो गई। बारिश होने के चलते लोग घरों से बाहर नहीं निकल सके। बाजार में दुकानें भी कम खुली। वहीं बारिश होने से जिले में मौसम भी सुहाना हो गया है। उधर बारिश होने के बाद नगर निगम की ओर से दिन भर जाम नालों की सफाई की गई। जल जमाव की वजह नालों में कचरा फेंकना है। मूसलाधार बारिश से घरों में दुबके रहे लोग, सुनसान रहा बाजार नरकटियागंज : पिछले तीन दिनों से हो रही बारिश ने सोमवार को तेज हवा और मेघ गर्जन के साथ आम जनजीवन को घरों और सुरक्षित ठिकानों तक ठहरने को विवश किया। मूसलाधार बारिश से सड़के सुनसान हो गई। सुमन बिहार और शिवगंज मोहल्ले में जलजमाव से लोग बेहाल रहे। यहां जलजमाव की हालत काफी दिनों से बनी हुई है। इस वजह लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। पानी पीसीसी सड़क पर लगा हुआ है। पुरानी बाजार तथा नंदपुर के पास सड़क कीचड़मय हो गया है। जबकि सड़क को बनाने के लिए कई बार लोगों के द्वारा आवाज उठाई गई। लेकिन सड़क आज तक नहीं बन सकी। जिससे वहां काफी खतरा बना रहता है। दिन भर मानसून की बारिश होती रही। बाजार में दुकानें तो खुली रहीं। मगर क्रेताओं का घोर अभाव दिखा। उधर किसानों को भी इस बारिश से कोई विशेष फायदा नहीं हुआ। अधिकांश किसानों के धान के बिचड़े तैयार नहीं हुए हैं। और नहीं तो अधिक बारिश से उन्हें नष्ट होने का डर बना हुआ है। दिहाड़ी मजदूरों के लिए बारिश काफी कष्टदायक साबित हुआ।

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