पीएचसी हरनाटांड़ में दवाओं का टोटा, एंटीबायोटिक से लेकर आयरन की दवा बाहर से खरीदने की मजबूरी

बगहा । बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सके इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पताल तो खोल दिए गए।

JagranSat, 25 Sep 2021 11:19 PM (IST)
पीएचसी हरनाटांड़ में दवाओं का टोटा, एंटीबायोटिक से लेकर आयरन की दवा बाहर से खरीदने की मजबूरी

बगहा । बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सके, इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पताल तो खोल दिए गए। लेकिन इनका समुचित लाभ मरीजों को मिल पा रहा है कि नहीं। इसकी देखरेख करने के लिए जिम्मेदार अधिकारी भी कोई रुचि नहीं ले रहे। जिस कारण ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को प्राथमिक एवं उपस्वास्थ्य केंद्रों पर जहां एक तरफ मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, तो वहीं दूसरी ओर दवाओं का टोटा है।

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हरनाटांड़ की भी कुछ ऐसी ही स्थिति है। शनिवार को यहां इलाज को पहुंचे मरीजों ने बताया कि गांव के उपस्वास्थ्य केंद्र पर जब दवा नहीं मिली तो पीएचसी हरनाटांड़ पहुंचे। लेकिन यहां की स्थिति भी वहीं है। बेहतर इलाज का सरकार केवल कागजों पर दावा करती है, लेकिन पीएचसी में दवा ही नहीं है। जब हम गरीब व असहाय तबके के लोगों को सरकारी अस्पताल में बेहतर सुविधा नहीं मिलेगी तो हम भला निजी अस्पतालों में कैसे इलाज करा महंगे दवा खरीद पाएंगे। सरकारी अस्पतालों में में बेहतर सुविधा नहीं मिलने की वजह से हमें निजी क्लीनिकों व झोलाछाप की चंगुल में फंसकर आर्थिक दोहन का शिकार होना पड़ता है।

-------------------- चर्म रोग का नहीं हो रहा इलाज : यहां बता दें कि पीएचसी के ओपीडी में 50 प्रकार के दवाओं की जगह पर मात्र 24 प्रकार की दवाएं ही उपलब्ध हैं। वहीं आईपीडी में 36 में से मात्र 22 प्रकार की दवाएं ही उपलब्ध हैं। जिसकी वजह से ओपीडी में तैनात चिकित्सक मरीजों का बेहतर उपचार के बाद पर्याप्त दवा नहीं लिख पा रहे हैं। शनिवार को ओपीडी में मरीजों का इलाज कर रहे डॉ. संदीप कुमार राय ने बताया कि फिलहाल मुझे ओपीडी में 24 प्रकार के दवाओं की लिस्ट प्राप्त है। जबकि यहां बरसात का मौसम होने की वजह से चर्म रोग की समस्या से परेशान मरीजों की संख्या अधिक है। लेकिन यहां चर्म रोग से जुड़ी एन्टी एलर्जिक के साथ साथ एंटीबायोटिक की दवा भी फिलहाल उपलब्ध नहीं है। करीब छह माह से अधिक दिनों से आयरन की दवा भी नदारद है। पीएचसी व एपीएचसी में पर्याप्त दवा नहीं होने से झोलाछाप चिकित्सकों की कट रही चांदी : सरकारी अस्पताल में पर्याप्त दवाओं के न रहने से मरीजों को मजबूरी में प्राइवेट चिकित्सकों की शरण लेनी पड़ती है। ग्रामीण इलाकों में प्राथमिक व अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर्याप्त दवा नहीं होने से झोलाछाप चिकित्सकों की चांदी कट रही है। बयान : जिले में दवाओं की किल्लत है। बार बार डिमांड के बावजूद पर्याप्त दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। जिससे मरीजों को बेहतर चिकित्सकीय लाभ नहीं मिल पा रहा है। हालांकि एक बार पर्याप्त दवाओं की डिमांड की गई है। शीघ्र ही दवाओं की उपलब्धता के बाद मरीजों को इसका समुचित लाभ मिलेगा।

डॉ. राजेश सिंह नीरज, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी

पीएचसी हरनाटांड़

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