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बनते ही उखड़ने लगती हैं सड़कें, कोई नहीं रहता देखने वाला

बगहा। हाल के सालों में जिस तरह सड़कों की दिशा में कार्य हुआ है। वह सराहनीय है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना हो, सीएम सड़क योजना या फिर अन्य योजनाओं से सड़कें दिख रहीं हैं। पर, असल समस्या इन सड़कों के रखरखाव को लेकर है। जिसमें संवेदक आनन-फानन निर्माण कार्य कराकर निकल जाते हैं। लेकिन इसमें गुणवत्ता का ख्याल नहीं रखा जाता है। जिसका नतीजा यह होता है कि बनने के साथ सड़कें उखड़ने लगती हैं। नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक ऐसा अक्सर देखने को मिलता है। इसमें नगर से भावल तक की सड़क व नगर से त्रिवेणी नहर के रास्ते बेलौरा तक जोड़ने वाली सड़क हो, प्रखंड के डुमरी व सेवरही कुट्टी के बीच की सड़क हो, तौलाहा से मुड़िला के बीच या फिर नगर के सड़कों का भी कमोवेश वही हाल है। जो बना दी जाती हैं। पर, कुछ दिनों के बाद ही इसमें गड्ढे दिखने लगते हैं। जो दिनोंदिन बढ़ते रहते हैं। कई सड़कों की हालत इतनी खराब हो जाती है कि इस पर वाहनों की आवाजाही भी मुश्किल हो जाती है। बरसात में परेशानी और बढ़ जाती है। बता दें कि बीते कुछ सालों में कई सड़कें बनी हैं। जिनका हश्र कुछ महीनों में ही दिखने लगा है। इसको ऐसे ही तबतक टाला जाता है। जब तक चुनाव नजदीक नहीं आ जाता है। इसके नजदीक होते ही इसका कार्य दोबारा से शुरू करा दिया जाता है। संवेदक के जिम्मे होता है रखरखाव आज कल किसी योजना की सड़क बनती है तो, उसके पांच साल तक रखरखाव का जिम्मा संवेदक के पास ही रहता है। इसके बदले में संवेदक के कुछ पैसे भी जमा होते हैं। अगर इस अवधि में कहीं सड़क टूट जाए तो, इसे उक्त संवेदक को बनाना होता है। पर, यह कार्य अक्सर टाट पर पैबंद के समान होता है। जो महज दिखाने के लिए कुछ दिन के लिए होता है। बाकी रह गए पैसों का भुगतान अभियंताओं की मिलीभगत से करके संवेदक निकल लेते हैं। लगाया था अनियमितता का आरोप बता दें कि रामनगर भावल सड़क बनने में अनियमितता बरती गई थी। जिसको लेकर उक्त गांव निवासी व जदयू के कार्यकर्ता प्रेमचंद सिंह ने इससे संबंधित आवेदन उच्चाधिकारियों को दिया था। पर, जांच के नाम पर महज खानापूर्ति कर इसे डब्बे में डाल दिया गया।

बयान बेलौरा व भावल के सड़क का कार्य कराया जा रहा है। जिन संवेदकों के हवाले पांच साल तक की जिम्मेदारी होती है। उनको इसके रखरखाव का कार्य हर हाल में पूरा करना होता है। - दरभंगी राम, कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, बगहा

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