उखड़ चुके पत्थरों से खतरनाक हुई डेढ़ किलोमीटर सड़क, आवागमन में कष्ट

उखड़ चुके पत्थरों से खतरनाक हुई डेढ़ किलोमीटर सड़क, आवागमन में कष्ट

अर्थव्यवस्था की रीढ़ कही जाने वाली सड़कों के निर्माण में लापरवाही का नतीजा है कि बनने के कुछ वर्षों बाद ही सड़कें उखड़ने लगती हैं। ग्रामीण क्षेत्र में भी ऐसी सड़कों की दुर्दशा लोगों की पीछा नहीं छोड़ रही।

JagranTue, 20 Apr 2021 12:46 AM (IST)

नरकटियागंज । अर्थव्यवस्था की रीढ़ कही जाने वाली सड़कों के निर्माण में लापरवाही का नतीजा है कि बनने के कुछ वर्षों बाद ही सड़कें उखड़ने लगती हैं। ग्रामीण क्षेत्र में भी ऐसी सड़कों की दुर्दशा लोगों की पीछा नहीं छोड़ रही। प्रखंड क्षेत्र के शेरहवा डकहवा से मुरली खरकटवा को जोड़ने वाली करीब डेढ़ किलोमीटर सड़क जगह-जगह टूटकर खतरनाक हो गई है। करीब बारह वर्ष पहले इस सड़क का निर्माण हुआ। अब तक उसकी दो दो बार मरम्मती भी हो चुकी है। इसके बावजूद सड़क की हालत बेहद खराब है। सड़क में पत्थर उखड़ गए हैं। नुकीले पत्थरों पर लोगों का चलना मुश्किल हो गया है। वाहन तो अक्सर पंचर होते हैं। ग्रामीण गुड्डू साह, प्रहलाद यादव, उमेश राम, अरविद यादव का कहना है कि सड़क निर्माण के समय आनन-फानन में कार्य किया गया। पूरी तरह से अलकतरा नहीं दी गई, जिस वजह बनने के कुछ वर्ष बाद ही सड़क जगह-जगह टूटने लगी। आज इस सड़क पर पत्थर के टुकड़े हीं दिखाई दे रहे हैं। जबकि सड़क की सर्वाधिक उपयोगिता क्षेत्र के किसानों के लिए है। ग्रामीणों ने बताया कि दो दो बार सड़क की मरम्मती हो चुकी है । लेकिन मरम्मती में भी खूब लापरवाही की गई । ग्रामीणों ने इसका विरोध भी किया था। लेकिन एन केन प्रकारेण उसकी मरम्मत कर दी गई और कुछ ही दिनों के बाद सड़क टूटकर खतरनाक स्थिति में पहुंच गई। इस सड़क का अजुआ, रामपुर, सकरौल, तितुहिया, मधुबनी और देवराज क्षेत्र के लोग भी अनुमंडल मुख्यालय जाने के लिए उपयोग करते हैं। मगर अव्यवस्था की शिकार इस सड़क के मामले में अब तक किसी अधिकारी ने संज्ञान नहीं लिया। लोगों का कहना है कि जिस तरह क्षेत्र के लोग इस सड़क से आवागमन में कष्ट उठा रहे हैं। उसके निर्माण की दिशा में भी पहल नहीं दिख रही है। लगता है संबंधित विभाग भी सोया हुआ है। सड़क के साथ ध्वस्त हो चुकी है पईन

खरकटवा से लेकर शेरहवा डकहवा तक सड़क निर्माण के साथ सिचाई सुविधा पईन को ध्वस्त कर दिया गया। लोगों को उम्मीद थी कि सड़क मजबूत बनेगी और खेती किसानी से लेकर अन्य कार्यों में लोग इसका उपयोग कर अपनी आर्थिक स्थिति सु²ढ़ करेंगे। फिर उसके बाद सरकार की ओर से पईन भी बना दी जाएगी। लेकिन ना तो पईन का निर्माण हुआ और ना ही सड़क की गुणवत्ता ऐसी रही कि उसका लंबे समय तक लोग उपयोग कर सके। इस सड़क से गुजरने में हमेशा खतरा बना रहता है। अब तो कंकड़ भरे धूल उड़ने से भी लोग परेशान हो रहे हैं।

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