कार्तिक पूर्णिमा पर आज बांसी व त्रिवेणी में डुबकी लगाएंगे श्रद्धालु

बगहा। कार्तिक पूर्णिमा का मुख्य स्नान शुक्रवार को होगा। गुरुवार को ही बांसी और नेपाल के त्रिवेणी में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई है।

JagranThu, 18 Nov 2021 11:32 PM (IST)
कार्तिक पूर्णिमा पर आज बांसी व त्रिवेणी में डुबकी लगाएंगे श्रद्धालु

बगहा। कार्तिक पूर्णिमा का मुख्य स्नान शुक्रवार को होगा। गुरुवार को ही बांसी और नेपाल के त्रिवेणी में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई है। अनुमान लगाया जा रहा है कि दोनों जगहों पर लगभग डेढ लाख श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाएंगे। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस-प्रशासन ने भी अपनी तैयारी पूरी कर ली है।

बांसी के बारे में कहावत है। सौ कासी ना एक बांसी की। हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर यूपी बिहार सीमा पर स्थित बांसी घाट पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु डुबकी लगाते हैं। यूपी प्रशासन मेला को लेकर पूरी तैयारी कर लिया है। एक प्लाटून पीएसी भी मेला में पहुंच कर कैंप कर रही है। किसी तरह की कोई अनहोनी न हो। अग्निशमन की गाड़ियां भी मेला में रिजर्व में रखी गई हैं।

वहीं नेपाल के त्रिवेणी में नेपाल, बिहार तथा उत्तरप्रदेश से प्रत्येक वर्ष हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच कर संगम घाट पर आस्था की डुबकी लगाकर स्थानीय मंदिरों में पूजा अर्चना करते हैं। इस बार कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर चंद्र ग्रहण लगने के कारण श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ने की संभावना है। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर प्रत्येक वर्ष त्रिवेणी में मेला भी लगता है। जिसमे बाहर से आने वाले दुकानदारों द्वारा अपनी दुकानें त्रिवेणी के घाट पर सजाई जाती है। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर त्रिवेणी के संगम घाट पर प्रसाद के दुकान लगाए बुटवल से आए दुकानदार श्रवण कुमार ने बताया की वो प्रत्येक वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर अपनी दुकान त्रिवेणी में लेकर आते हैं। इस बार लॉकडाउन् खत्म हो जाने व चंद्र ग्रहण होने के वजह से श्रद्धालुओं की संख्या काफी ज्यादा होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

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बांसी घाट पर बना भूले बिसरे केंद्र

युवा सेवा संस्थान के द्वारा बांसी मेला में घाट पर भूले बिसरे केंद्र बनाया गया है। इस संस्था के सदस्यों द्वारा मेला में घाट पर भीड़ न हो और कोई भी श्रद्धालु अपने से बिछड़ गया हो तो उसके स्वजनों से मिलाते हैं।

यूपी के पडरौना के समाजसेवी मनीष जायसवाल की ओर से लंगर की व्यवस्था की गई है। दूरदराज से पहुंचे श्रद्धालुओं के ठहरने की भी प्रबंधन किया गया है।

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