हाजीपुर कोनहारा घाट पर श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

हाजीपुर कोनहारा घाट पर श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

हाजीपुर के कोनहारा घाट सहित गंगा-गंडक के विभिन्न धाटों पर कार्तिक पूर्णिमा के पावन तिथि पर लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र डुबकी लगाई। सरकार और जिला प्रशासन की बार-बार अपील-आग्रह के बावजूद श्रद्धालुओं का रविवार से ही यहां पहुंचना शुरू हो गया था।

Publish Date:Mon, 30 Nov 2020 11:21 PM (IST) Author: Jagran

जागरण संवाददाता, हाजीपुर :

हाजीपुर के कोनहारा घाट सहित गंगा-गंडक के विभिन्न धाटों पर कार्तिक पूर्णिमा के पावन तिथि पर लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र डुबकी लगाई। सरकार और जिला प्रशासन की बार-बार अपील-आग्रह के बावजूद श्रद्धालुओं का रविवार से ही यहां पहुंचना शुरू हो गया था। बड़ी संख्या में श्रद्धालु शहर के मठ-मंदिरों एवं नदी घाटों पर डेरा डाल लिया। इनके भजन-कीर्तन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।

रात बारह बजे के बाद जैसे ही स्नान का शुभ मुहूर्त शुरू हुआ गंगा-गंडक के विभिन्न घाटों पर हर-हर गंगे जयघोष के साथ पवित्र स्नान शुरू हो गया। हे गोविद राखो शरण पुकार के साथ गजेंद्रमोक्ष कोनहारा घाट सहित अन्य पवित्र घाटों पर श्रद्धालुओं के स्नान और पूजा-अर्चना का दौर शुरू हो गया। स्नान-पूजन और मन्नतें उतारने का यह सिलसिला सोमवार की देर रात तक जारी है। श्रद्धालुओं ने यहां स्नान के बाद प्रसिद्ध हरिहरनाथ मंदिर के अलावा हाजीपुर के पतालेश्वरनाथ मंदिर, गौड़ी-शंकर मंदिर समेत तमाम मठ-मंदिरों में जलाभिषेक करते हुए पूजा-अर्चना की।

ऐतिहासिक कोनहारा घाट सहित आसपास के स्नान घाटों तथा मठ-मंदिरों में भक्तों की अपार भीड़ को लेकर जिला प्रशासन ने सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए हैं। स्नान घाटों के अलावा सभी पहुंच पथों पर साफ-सफाई, रोशनी, पेयजल, और अस्थायी शौचालय की व्यवस्था किए गए हैं। श्रद्धालुओं की भीड़ से कोनहारा धाट सहित हाजीपुर के आसपास के सभी घाट अटा-पटा रहा। एक ओर जहां घाटों पर जहां शुभ संस्कार होते रहे, वहीं गत शाम से ही भूतखेली भी होता रहा। इसके साथ ही बच्चों के मन्नतें उतारने में मुंडन संस्कार भी होते रहे। भक्त गजराज के उद्धार को यहां स्वयं पधारे थे विष्णु पौराणिक और धार्मिक ग्रंथों में हाजीपुर के ऐतिहासिक कोनहारा घाट पर गंगा-गंडक संगम में गजराज और ग्राहराज के बीच भीषण युद्ध हुआ था। कहते हैं कि काफी बलवान और राजा होने के बावजूद पानी में गजराज कमजोर पड़ गए थे। तभी संगम में गजराज को एक कमल का फूल दिखाई पड़ा। गजराज ने अपने सूढ़ में फूल और गंगाजल लेकर हरि की अराधना की। भक्त की कारूणिक पुकार पर उसकी प्राणरक्षा को स्वयं हरि यहां पधारें और ग्राह रूपी शापित राजा का वध कर भक्त गजराज की प्राणरक्षा कर उद्धार किया था। आख्यान है कि प्रभु के हाथों मरकर जहां ग्राह को मोक्ष की प्राप्ति हो गई वहीं गजराज को नया जीवन मिला। मोक्ष एवं नए जीवन की प्राप्ति की कामना को लेकर हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर लाखों की संख्या में लोग कोनहारा घाट सहित आसपास के तमाम घाटों पर पवित्र स्नान कर मोक्ष की कामना करते हैं। घाटों पर भूतखेली और किन्नर नृत्य का अद्भूत नजारा कोरोना संक्रमण खतरे के बीच आस्था से जुड़े पवित्र स्नान में श्रद्धालु के पूजन संस्कार का अद्भूत ²श्य उभरते रहे। घाटों पर कई ऐसे ²श्य दिखते रहे, जो आज केआधुनिक युग में लोगों को अचंभित कर रहा है। घाटों पर भूतखेली और झाड़-फूंक का खेल चलता रहा। रविवार को शाम ढलते ही घाटों पर सार्वजनिक रूप से यह खेल शुरू हो गया था जो सोमवार तक अनवरत जारी है। सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से ओझा-गुणी की टोली बड़ी तादाद में यहां पहुंचते रहे हैं और गंगा-गंडक संगम पर भूतखेली का स्वांग रचकर अपनी सिद्धि करते हैं। इन टोलियों में अधिकतर अशिक्षित और ग्रामीण महिलाएं ओझा-गुणी के चक्कर में पड़ी देखी जा रही हैं। इस मौके पर यहां किन्नर नृत्य का भी नजारा खास होता रहा। बच्चों के मुंडन और मन्नते उतारने के लिए ढ़ोलक-झाल के साथ किन्नरों की टोली माताओं की आंचल पर नाच कर बच्चों की लंबी उम्र और सुखमय जीवन की कामना करते हैं। कार्तिक पूणिमा स्नान पर दूर-दूर से सैकड़ों टोलियां यहां इस मान्यता को साकार करने पहुंचते हैं। स्नान में बुजुर्गों की सहायता व भीड़ नियंत्रण को डटे रहे स्काउट-गाइड

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जागरण संवाददाता, हाजीपुर :

कार्तिक पूर्णिमा स्नान के अवसर पर भारत स्काउट एवं गाइड कैडेटों ने बिहार सहित देश के विभिन्न हिस्से से आए हुए श्रद्धालुओं की सेवा में मिसाल पेश की। स्नान घाटों सहित विभिन्न चौक-चौराहे पर तैनात स्काउट एवं गाइड श्रद्धालुओं को सुरक्षित ढ़ंग से चलने और मास्क पहनकर रहने की सलाह देते दिखे। वहीं बुजुर्गों की सहायता कर स्नान के बाद नदी से बाहर निकालने में मदद करते रहे। घाटों के साथ विभिन्न सड़कों पर श्रद्धालुओं की भीड़ भाड़ नियंत्रण करने में स्काउट-गाइड कैडेटों ने अहम भूमिका निभाई।

राज्य संपोषित बालिका उच्च विद्यालय हाजीपुर में समाज सेवा शिविर में जिला संगठन आयुक्त ऋतुराज ने बताया कि कोविड-19 को देखते हुए इस बार का समाज सेवा शिविर फिजिकी डिस्टेंसिग का पालन करते हुए संचालित किया जा रहा है। स्थानीय बालिका उच्च विद्यालय के सामने उद्घोषणा केंद्र स्थापित किया गया है। स्काउट एवं गाइड कैप्टन गंगा स्नान को पहुंच रहे और स्नान-पूजन के बाद अपने गंतव्य की ओर लौट रहे श्रद्धालुओं को आवश्यक दिशा-निर्देश दे रहे हैं।

दिशा निर्देश में स्नान के क्रम में एक जगह एकत्रित नहीं होने तथा अपने सामानों की रक्षा स्वयं करने की सलाह दी जाती रही। भीड़ में छोटे बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की अपील की जाती रही। शिविर में डॉ. श्याम किशोर ठाकुर, धीरज वर्मा, सौरभ कुमार, नरेंद्र कुमार सिंह, उमेश कुमार, श्रवण कुमार, मधुमिता कुमारी, जागृति, रीना द्विवेदी, नीलम कुमारी आदि शिक्षकों ने अपनी अहम भूमिका निभाई।

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