नाव हादसे में डूबे तीन मजदूरों के शव मिले, कई अब भी लापता

संवाद सहयोगी सोनपुर गंगा पार दियारा से चारा लेकर लौटने के दौरान नाव हादसे में लापता

JagranMon, 27 Sep 2021 12:14 AM (IST)
नाव हादसे में डूबे तीन मजदूरों के शव मिले, कई अब भी लापता

संवाद सहयोगी, सोनपुर :

गंगा पार दियारा से चारा लेकर लौटने के दौरान नाव हादसे में लापता सोनपुर सबलपुर नेवल टोला के चार में से तीन लोगों का शव रविवार को खोजबीन के दौरान परिवार वालों ने बंगाली टोला के समीप गंगा नदी में उपलाते पाया। शव पाए जाने की खबर फैलते ही घाट पर लोगों की भीड़ जुट गई। इस बीच मृतकों के स्वजनों में चीख-पुकार मची रही। गंगा नदी में नाव हादसे के दौरान लापता सबलपुर पश्चिमी पंचायत के साधु राय उर्फ जनार्दन राय का पुत्र पिन्टू कुमार, उत्तरी पंचायत अंतर्गत नेवल टोला के विष्णु राय का पुत्र संजय कुमार राय तथा जामुन राय का पुत्र लाल बिहारी का शव बरामद कर लिया गया है। शव पाए जाने की सूचना मिलते ही पुलिस ने शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए छपरा भेज दिया है। इस नौका हादसे में अन्य जगहों के कई लोग लापता बताए जा रहे हैं।

इस घटना के संबंध में सबलपुर के ग्रामीणों ने बताया कि सभी मृतक शुक्रवार को पशुओं के लिए चारा लाने गंगा उस पार गये थे। शाम को वे लोग चारा लेकर लौट रहे थे। इसी दौरान नाव गंगा नदी में डूब गई। स्वजनों ने लापता लोगों की काफी खोजबीन की लेकिन उनका कुछ पता नहीं चल सका। रविवार को तीनों का शव बंगाली टोला के समीप ही नदी में उपलाते हुए पाया गया। लापता मजदूरों के घर पर कोहराम मचा हुआ है। इस संबंध में सोनपुर थानाध्यक्ष अकील अहमद ने बताया कि यह घटना पटना के मनेर थाना क्षेत्र की है। तीनों शव भी उसी क्षेत्र में पाए गए हैं। मृतकों के स्वजन जो आवेदन देंगे उसे मनेर थाना को अग्रसारित कर दिया जाएगा। जनवरी में गंगाजल टोला के निकट नाव के डूबने से डूब गए थे चार मजदूर

मालूम हो कि इसके पहले भी गंगा नदी में कई बार हादसे हो चुके हैं। जनवरी में गंगाजल टोला के सामने दो नावों की टक्कर में 4 मजदूर लापता हो गए थे। यह सभी भी संबलपुर के ही थे। इस हादसे में बालू लदा नाव डूब गया था। इस घटना के बाद एक सप्ताह के भीतर काफी मशक्कत के उपरांत बारी-बारी से सभी डूबे मजदूरों का शव बरामद कर लिया गया था। गांधी सेतु के पाया से टकरा डूब गई थी नाव, डूब गए थे चार मजदूर

गंगाजल टोले के निकट नौका हादसे के पहले गांधी सेतु के पाया से टकराकर एक नाव डूब गई थी। जिसमें एक महिला समेत 4 लोग डूब गए थे। सभी सबलपुर पश्चिमी पंचायत के निवासी थे। सभी वैशाली जिले के तेरसिया दियारे में रहते थे। सभी अपना राशन उठा कर लौट रहे थे इसी दौरान यह नाव हादसा हो गया।

सबलपुर के सामने नौका हादसे में डूब गए थे दो मजदूर

बीते दिनों सबलपुर के सामने ही गंगा नदी में बालू लदा नाव डूब जाने से दो लोग डूब गए थे। काफी मशक्कत के बाद दोनों शवों को बरामद किया गया था। हालांकि, काफी खोजबीन के बाद भी एसडीआरएफ की टीम को सफलता नहीं मिली थी। बाद में स्थानीय लोगों ने ही शवों को बरामद किया था।

रंगदारी के लिए नाव पर कर दी गई थी एक मजदूर की हत्या

बीते माह रंगदारी के लिए एक मजदूर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पश्चिमी पंचायत के रायपुर हसन का मजदूर रहने वाला था। सोन नदी से बालू लेकर वे सभी मजदूर आ रहे थे। इसी दौरान मनेर थाना क्षेत्र में रंगदारी के लिए विरोध किए जाने पर रंगदारों ने उक्त मजदूर की गोली मारकर हत्या कर दी थी। गंगा नदी और उसके आसपास के इलाके में कभी बालू के लिए तो कभी वर्चस्व के लिए और कभी रंगदारी के लिए घटनाएं घटित होती ही रहती है।

रोक के बावजूद जारी है बालू के उत्खनन का सिलसिला

बालू के उत्खनन एवं भंडारण पर रोक के बावजूद यह सिलसिला जारी ही है। जान पर खेलकर कड़ी मेहनत के बाद बालू निकालने वाले यह मजदूर अत्यंत ही गरीब परिवारों के होते हैं। बालू कारोबार से जुड़े सूत्र बताते हैं कि नाव पर रहने वाले मजदूर ही सही मायने में बालू खरीद-बिक्री के मालिक होते हैं। इसका 70 फीसदी हिस्सा मजदूरों में बंटता है जबकि बालू के लाभ का मात्र 30 फीसदी ही नाव के मालिक को प्राप्त होता है। बालू का उत्खनन तथा इसके खरीद-बिक्री का जिम्मा मजदूरों का होता है। दूसरी ओर विडंबना यह है कि इतनी मशक्कत के बाद भी गंगा नदी से बालू उत्खनन करने वाले इन मजदूरों का जीवन सुरक्षित नहीं होता। कभी पुलिस का छापा तो कभी रंगदार का खौफ तो कभी नाव हादसा।

कभी हादसे में जाती जान तो कभी ले ली जाती है जान

सोनपुर के सबलपुर के चार पंचायतों के बड़ी संख्या में मजदूरों की जिदगी नाव के सहारे ही कटती है। गरीब मजदूरों के जीवन की विडंबना है कि कभी हादसे में जान चली जाती है तो कभी गोलियों से जबरन इनकी जान ले ली जाती है। दियारे से सब्जियां एवं चारा लेकर आने-जाने के दौरान नाव हादसे होते रहे हैं और इसमें बड़ी संख्या में मजदूरों की प्रत्येक वर्ष जान जाती रहती है।

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