शहरनामा :::: सुपौल

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हर नेतानुमा चेहरा वर्चुअला गया है सामने विधानसभा चुनाव है। नेताजी लोग एक्टिव हो गए हैं। सामाजि

Publish Date:Sun, 09 Aug 2020 07:50 PM (IST) Author: Jagran

हर नेतानुमा चेहरा वर्चुअला गया है

सामने विधानसभा चुनाव है। नेताजी लोग एक्टिव हो गए हैं। सामाजिक सरोकारों में भी दिलचस्पी लेने लगे हैं। राजनीतिक बैठकों में भी सक्रियता बढ़ गई है। कोरोना संक्रमण में वर्चुअल शब्द क्या आ गया अब हर नेतानुमा चेहरा वर्चुअला गया है। हर पार्टी के ऐसे नेता अब अपने टिकट को फाइनल बता रहे हैं। कोई चूकने वाला नहीं है, सबकी बात सुनिए। सभी कहते हैं, उनकी तो आलाकमान से हो गई है। आलाकमान ने कह दिया है कि क्षेत्र जाओ और अपनी बागडोर संभालो। क्षेत्र में स्थिति विकराल टाइप से होने लगी है। कई ऐसे चेहरे सामने आ रहे हैं जिनकी दल में फिलहाल कोई चर्चा भी नहीं होनी है। इतना ही नहीं जहां सीटिग एमएलए भी हैं लेकिन उसी दल से इस टाइप के नेता भी अपनी दावेदारी बता रहे हैं। कौन मैदान में रहेगा ये तो वक्त ही बताएगा लेकिन फिलहाल तो सभी काफी एक्टिव हो गए हैं।

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आपदा में अवसर

कोरोना का संक्रमण काल चल रहा है। शहर में लॉकडाउन है। थोड़ा-थोड़ा अनलॉक भी है। अब किस फेज का लॉकडाउन है और किस फेज का अनलॉक! भारी कन्यफ्यूजन है। इसको लेकर कई नियम कानून जारी किए गए हैं। इससे पुलिस के पौ-बारह हैं। लॉकडाउन काफी लंबा चल गया है सो आम व्यापारियों का धैर्य भी जवाब देने लगा है। वैसे भी ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए भी वे चोरी-छिपे सामान देने से परहेज नहीं करते। करें भी कैसे उनका ग्राहक सब दिन से बना हुआ है तो उसका भी ख्याल रखना लाजिमी है। बस क्या है थानेवालों के लिए दोनों हाथ लड्डू। कानून का कानून भी और अपने लिए अवसर भी। ये तो आए दिन की बात है कि अमूमन रोज कोई न कोई दुकानदार थाने तक ले जाया जाता है कोई कार्रवाई की जद में आ जाता है तो अधिकांश अपनी बुद्धि विवेक से फौरन वापस।

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मरीज से अधिक परेशान डॉक्टर

बड़ा अजीब मामला चल रहा है। पहले मरीज बीमार होने के साथ ही परेशान होने लगते थे और अब डॉक्टर परेशान होने लगे हैं। एक तो लॉकडाउन की बंदिशें और ऊपर से कोरोना का डर। पहले तो तमाम क्लीनिक ही इनलोगों ने बंद कर डाला। अब डर-डर कर मरीज देखने लगे हैं। वैसे घर से भी उन्हें नसीहत मिल रही है कि जान है तो जहान है। पर अब उनका कर्तव्य झकझोरता रहता है और खाली पॉकेट भी। कल तक बीमारी को ये दूर भगाते थे आज खुद ही भाग रहे हैं। हो भी क्यों नहीं डाक्टरों का संक्रमित हो जाना और जिदगी की जंग हार जाना ने इन्हें भयभीत कर दिया है। कोरोना के अलावा भी यदि किसी कारण से आप बीमार पड़ गए तो आसान नहीं है डॉक्टरों से इलाज करा लेना। कई तो खुद क्वारंटाइन के बहाने क्लीनिक नहीं खोलते तो कई इसके शिकार भी हो गए।

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बदलनी पड़ गई चिट्ठी

सरकारी निर्देशों का भी प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा उसके अपने-अपने मायने लगा लिए जाते हैं। स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त 2020 के अवसर पर विद्यालयों में झंडोत्तोलन कार्यक्रम में विद्यालय के किसी भी छात्र-छात्राओं एवं अभिभावकों को विद्यालय में भाग नहीं लेने का आदेश शिक्षा विभाग के बड़े अधिकारी ने जिले के सभी सरकारी, निजी, प्राथमिक एवं माध्यमिक, उच्च माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक को पत्र लिखकर जारी कर दिया। बस क्या था एक विद्यालय के प्रबंध समिति के अध्यक्ष ने अपनी आपत्ति दर्ज कर दी। उन्होंने इस आदेश को राज्य सरकार के निर्देश एवं गाइडलाइन का उल्लंघन सहित आम नागरिकों के मौलिक अधिकार एवं राष्ट्रीय पर्व का अपमान मान लिया। अध्यक्ष ने जिलाधिकारी से उनके आदेश को निरस्त करते हुए दोषी पदाधिकारी के विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई करने का अनुरोध तक कर डाला। एकदम से आवेशित थे। लेकिन समय से ही साहब को आत्मज्ञान हो गया और साहब ने चिट्ठी बदल डाली।

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