स्कूली बच्चों को नहीं दिए जा रहे मौसमी फल व अंडे

सुपौल। सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को दोपहर में मिलने वाले भोजन के नाम पर लूटखसोट रूकने का नाम ही नहीं ले रहा है। कहीं बच्चों की गलत उपस्थिति दर्शाकर तो कहीं मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता में कटौती कर सरकारी धनराशि की लूटखसोट की जा रही है। इतना ही नहीं, प्रत्येक शुक्रवार को विद्यालय के द्वारा उपस्थित बच्चों को पौष्टिक आहार के नाम पर मौसमी फल और अंडा देने का प्रावधान है। कितु विद्यालय प्रधान के द्वारा पौष्टिक आहार के नाम पर बच्चों को अंडे के बदले केला दिया जा रहा है। कई विद्यालयों में छात्रों को आजतक अंडा मिला ही नहीं है।

जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को बच्चों को दिए जाने वाले पौष्टिक आहार के लिए राज्य सरकार द्वारा प्रति छात्र छह रुपए देती है। लेकिन विद्यालय प्रधान छह रुपये के बदले प्रति छात्र को दो रुपये खर्च कर भोजना मुहैया कराने की खानापूर्ति कर रहे हैं। अचरज की बात है कि यह सब कुछ जानते हुए भी शिक्षा विभाग के अधिकारी कार्रवाई करने के बदले उदासीन रवैया अपनाए हुए हैं। हालांकि इस पूरे प्रकरण को लेकर कई बार बच्चों के अभिभावक विभागीय अधिकारी शिकायत भी कर चुके हैं। कितु मामला जस की तस है।

वहीं विद्यालय प्रधान की मानें तो सीमित बजट के कारण छह रुपये में अंडा नहीं मिल रहा है। इसकी वजह से बच्चों को सेब भी देना कठिन हो रहा है।

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