कोरोना की तरह बिगड़ा है मौसम का मिजाज, रुक-रुककर हो रही बारिश

कोरोना की तरह बिगड़ा है मौसम का मिजाज, रुक-रुककर हो रही बारिश

जागरण संवाददाता सुपौल लगातार आंधी-बारिश का असर फसलों पर भी देखा जा रहा है। शुरुआती

JagranThu, 13 May 2021 05:32 PM (IST)

जागरण संवाददाता, सुपौल : लगातार आंधी-बारिश का असर फसलों पर भी देखा जा रहा है। शुरुआती बारिश निस्संदेह मूंग की बोआई के लिए मुफीद साबित हुई लेकिन जब यह रोजाना होने लगी तो फसल को बर्बाद करने लगी है। इसी तरह तेज हवा के कारण आम और लीची की फसल को भी नुकसान हो रहा है। बुधवार की सुबह और दोपहर भी कई स्थानों पर बारिश हुई। बारिश के कारण शहरी इलाकों में भी जलजमाव से परेशानी हो रही है। मौसम विज्ञान केंद्र पूर्णिया द्वारा मंगलवार को अगले 48 घंटे मौसम इसी तरह बने रहने का आसार जताया गया था लिहाजा गुरुवार को भी बादल छाए रहे और और बूंदाबांदी होती रही।

पिछले कई दिनों से कोरोना की ही तरह मौसम का मिजाज भी बिगड़ा रहा। कभी सुबह के वक्त तो कभी दोपहर में बारिश होती रही। बारिश के कारण अब सबसे अधिक नुकसान मूंग की खेती को हो रही है। मूंग यहां के किसानों के लिए दलहन की मुख्य फसल है। दलहन की यह फसल किसानों के लिए नकदी फसल भी मानी जाती है। यह फसल किसानों के लिए फायदेमंद इस लिहाज से भी है कि इसकी खेती में किसानों को लागत अधिक नहीं आती। गेहूं काटने के साथ खेतों की जोताई कर मूंग बो देते हैं। गेहूं की खेती में खेत की अच्छी तरह से जोताई हुई रहने के कारण इसमें भी खर्च कम आता है। दूसरा यह कि इस फसल की सिचाई के लिए किसानों को अधिक परेशान नहीं होना पड़ता। इस महीने आंधी-बारिश होती रहती है, जिससे इस फसल की सिचाई हो जाती है। मूंग की फसल तैयार होने के बाद दलहन होने के कारण इसका बाजार भाव भी काफी अच्छा मिलता है। किसानों की कई जरूरतें पूरी होती हैं। इस फसल का सबसे अधिक फायदा किसानों की खेतों को मिलता है। यह फसल हरित खाद के रूप में है। फसल तैयार होने पर दो-तीन बार तोड़ने के बाद बारिश शुरू हो जाती है और किसान इसके पौधे को खेतों में लगे रहने पर ही जोताई कर देते हैं। इससे खेतों को हरा खाद तो मिलता ही है साथ ही इसकी जड़ों में जमा राइजोबियम कल्चर खेतों को प्रचुर मात्रा में नाइट्रोजन उपलब्ध करता है। फसल के साथ किसानों को खाद भी प्राप्त हो जाता है। इसकी खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार द्वारा हरी चादर योजना भी चलाई जाती है, इसके तहत किसानों को मूंग और ढैंचा का बीज मुहैया कराया जाता है। बहरहाल हो रही बारिश मूंग की फसल के लिहाज नुकसानदेह साबित हो सकती है, क्योंकि मूंग के पौधे अधिक पानी बर्दाश्त नहीं करते और अधिक पानी लगने के बाद सूख जाते हैं।

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