शक्ति की देवी की आराधना में जुटे हैं भक्त

शक्ति की देवी की आराधना में जुटे हैं भक्त

संवाद सूत्र करजाईन बा•ार (सुपौल) चैती नवरात्र के अवसर पर क्षेत्र में हर तरफ श्रद्धा व उल्लास

JagranSat, 17 Apr 2021 06:18 PM (IST)

संवाद सूत्र, करजाईन बा•ार (सुपौल): चैती नवरात्र के अवसर पर क्षेत्र में हर तरफ श्रद्धा व उल्लास का वातावरण है। शक्ति की देवी की आराधना के लिए मां दुर्गा के दरबार में पूर्ण आस्था से भक्त पहुंच रहे हैं। सुबह से ही पूजा-अर्चना के लिए भक्तों का आगमन शुरु हो जाता है। नवरात्र के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने शनिवार को माता स्कंदमाता की पूजा अर्चना की। सुबह से श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचने लगे। क्षेत्र के रतनपुर पुरानी बा•ार, समदागढ़ी एवं सितुहर स्थित दुर्गा मंदिरों में श्रद्धालु माता के के लिए पहुंचे। बुधवार को मां स्कंदमाता की पूजा के लिए रतनपुर पुरानी बाजार में पंडित नीतीश झा पूरी निष्ठा से पूजा-अर्चना में जुटे हुए हैं। वहीं रतनपुर पुरानी बाजार, समदागढ़ी एवं सितुहर पूजा समिति से जुड़े लोगों ने बताया कि पूजा कमेटी तथा ग्रामीणों की निगरानी में पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना हो रही है। कोरोना महामारी को देखते हुए सरकारी दिशा-निर्देशों का विशेष ख्याल रखा गया है।

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कात्यायिनी की पूजा से मिलता है विशेष फल

आदि शक्ति माता दुर्गा का षष्ठम रूप श्री कात्यायिनी के नाम से जाना जाता है। महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदि शक्ति उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म ली थी। इसलिए वे कात्यायनी कहलाती हैं। नवरात्र के छठे दिन इनकी पूजा-अर्चना की जाती है। इस बारे में आचार्य पंडित धर्मेंद्रनाथ मिश्र ने बताया कि भगवती कात्यायिनी की भक्ति व उपासना से साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चारों फलों की प्राप्ति होती है। साथ ही रोग, शोक, संताप, भय आदि सर्वथा विनिष्ट हो जाते हैं। इनका उपासक निरंतर इनके सानिध्य में रहकर परम शांति, सुख व ऐश्वर्य का अधिकारी बन जाता है। मां कात्यायनी के भक्त इस लोक में स्थित रहकर अलौकिक तेज और प्रभाव से युक्त हो जाता है। आचार्य ने बताया कि माता कात्यायिनी की आराधना के दौरान साधक को अपना चित्त आज्ञा चक्र में स्थिर करके साधना करनी चाहिए। इसकी उपासना से आज्ञा चक्र स्वत: जागृत हो जाती है।

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