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सदियों से गुरु-शिष्य की परंपरा भारतीय सभ्यता का अंग

सिवान। प्रखंड के भरौली मठ परिसर में रविवार को परम् गुरु रामनारायण दास महाराज के सानिध्य में गुरु पूर्णिमा भक्ति भाव से मनाया गया। इस मौके पर शारीरिक दूरी पालन किया गया। इस मौके पर भजन-कीर्तन का भी आयोजन किया गया। भक्तों ने गुरु रामनारायण दास महाराज की पूजा अर्चना व वंदना कर गुरु-शिष्य परंपरा को जीवंत किया। अपनी श्रद्धा व साम‌र्थ्य के मुताबिक भक्तों ने गुरु के प्रति अपनी समर्पण भाव को व्यक्त किया। गुरु रामनारायण दास ने कहा कि पूर्ण निष्ठा के साथ माता-पिता व गुरु की सेवा व सम्मान परम कल्याणकारी होता है। सपनों में भी उक्त लोगों की अवहेलना नरक व दु:ख का कारण बनता है। उन्होंने कहा कि सदियों से गुरु शिष्य की परंपरा भारतीय सभ्यता व संस्कृति का अंग है व इसको जीवंत रखना हम सबका नैतिक कर्तव्य बनता है। महाराज ने कोरोना वायरस से बचने व शारीरिक दूरी का पालन करने का सुझाव दिया। वृज बिहारी दुबे ने कहा कि गुरु अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने तथा परम् सिद्धि का सरल माध्यम हैं। पुरुषोत्तम दास ने बताया कि गुरु साक्षात परमेश्वर हैं, उन्हें मनुष्य समझना महान मूर्खता है, क्योंकि गुरु राग, द्वेष से परे होता है जो केवल विश्व कल्याण का ही बात करता है। इस मौके भंडारे का आयोजन किया गया। जिसमें सैकड़ों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस मौके पर प्रधानाचार्य कृष्ण कुमार सिंह, पूर्व जिला पार्षद लालबाबू प्रसाद, रामेश्वर सिंह, श्रवण कुमार, विकास सिंह, बजरंगी सिंह, नंद चौधरी, रघुवंश दुबे, उपेंद्र सिंह, कमलेश राय, आदि उपस्थित थे।

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