भए प्रकट कृपाला दीन दयाला ..के उद्घोष से गुंजायमान हुआ संपूर्ण क्षेत्र

भए प्रकट कृपाला दीन दयाला ..के उद्घोष से गुंजायमान हुआ संपूर्ण क्षेत्र

भारतीय त्योहारों में रामनवमी का अपना ही महत्व है। चैत्र नवरात्र के नौवें दिन रामनवमी का उत्सव भी मनाया जाता है। वैश्विक महामारी कोरोना के बीच बुधवार को जिला मुख्यालय समेत ग्रामीण क्षेत्रों में रामनवमी का पर्व मनाया गया। रात 12 बजते ही घरों में भए प्रकट कृपाला दीन दयाला .. से तथा जय श्रीराम के जयघोष गुंजायमान हो उठे थे।

JagranWed, 21 Apr 2021 04:32 PM (IST)

सिवान। भारतीय त्योहारों में रामनवमी का अपना ही महत्व है। चैत्र नवरात्र के नौवें दिन रामनवमी का उत्सव भी मनाया जाता है। वैश्विक महामारी कोरोना के बीच बुधवार को जिला मुख्यालय समेत ग्रामीण क्षेत्रों में रामनवमी का पर्व मनाया गया। रात 12 बजते ही घरों में भए प्रकट कृपाला दीन दयाला .. से तथा जय श्रीराम के जयघोष गुंजायमान हो उठे थे। रामनवमी के मौके पर लोगों ने मंदिरों की बजाए अपने-अपने घरों में ही मर्यादा पुरुषोतम राम, माता सीता व पवनपुत्र हुनमान की पूजा-अर्चना कर सुख-शांति की कामना की। इस दौरान श्रद्धालु पवनसूत हनुमान की आराधना में लीन रहे। लोगों ने घरों में हवन-पूजन कर वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के नाश के लिए प्रार्थना की। साथ ही परिवार की सुख-समृद्धि के लिए मंगलकामना की। बता दें कि कोरोना के खौफ और मंदिरों में सन्नाटा पसरा हुआ है। रामनवमी के मौके पर भक्तों की भीड़ से गुलजार रहने वाला शहर कोरोना संक्रमण के कारण इस बार बिल्कुल सुनसान रहा। रामनवमी में यह दूसरी बार है जब मंदिरों में सन्नाटा पसरा हुआ था।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी घरों में ही मना रामनवमी का उत्सव :

गौरतलब हो कि दिनोंदिन कोरोना वायरस के बढ़ रहे संक्रमण के कारण शहर के गांधी मैदान से निकलने वाली शोभायात्रा को रद कर दिया गया था। इसके साथ ही जीरादेई, मैरवा, नौतन, रघुनाथपुर, दरौली, गुठनी, आंदर, सिसवन, हसनपुरा, बसंतपुर, भगवानपुर हाट, पचरुखी, दारौंदा, महाराजगंज, सदर, गोरेयाकोठी, बड़हिरया समेत अन्य सभी प्रखंडों में भी लोगों ने भगवान श्रीराम की पूजा-अर्चना की और हवन किया। लोगों ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में धारण करने का संकल्प लिया।

कन्या पूजन व हवन के बीच चैत्र नवरात्र संपन्न :

बुधवार को महानवमी व कन्या पूजन तथा हवन के साथ चैत्र नवरात्र का समापन हो गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने घर में ही विधि विधान पूर्वक भगवान गणेश की पूजा करने के बाद मां सिद्धिदात्री की पूजा व आराधना की। इसके बाद कन्या पूजन के लिए दो साल से लेकर 10 साल तक की नौ कन्याओं और एक बालक को आमंत्रित कर उनका भी पूजन किया। इसके बाद उन्हें रोली, कुमकुम और अक्षत का टीका लगाया और उनके हाथों में मौली बांधी। सभी कन्याओं और बालक को घी का दीपक दिखाकर उनकी आरती उतारी और यथाशक्ति भोग लगाया। साथ ही यथाशक्ति भेंट और उपहार दिया और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया, साथ ही परिवार की मंगल कामना की। कोरोना वायरस संक्रमण के कारण अधिकांश श्रद्धालुओं ने कन्याओं को भोजन ना कराकर उनको सिर्फ दान ही दिया और आर्शीवाद लिया। आचार्य पंडित उमाशंकर पांडेय ने बताया कि 13 अप्रैल मंगलवार को मां जननी जगदंबा अश्व पर सवार होकर मंदिरों में विराजमान हुई थीं। वहीं नवरात्र को अश्व पर ही सवार होकर माता का गमन हुआ है। माता का अश्व पर आगमन देश के लिए अशुभ है, तो गमन शुभ फलदायी है। आगमन जहां देश में राजभंग का द्योतक है, तो गमन देश में शुभ फलकारक रहा है।

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