नहीं रहे पूर्व विधायक कौशलेंद्र शाही उर्फ बबुआजी

सिवान। दारौंदा क्षेत्र के पितामह कहे जाने वाले कौशलेंद्र प्रसाद शाही उर्फ बबुआ जी का निधन मंगलवार की रात उनके पैतृक आवास बगौरा कोठी पर हो गया। बुधवार की सुबह उनके अंतिम दर्शन के लिए काफी संख्या लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। वे 1967 में महाराजगंज से निर्दलीय विधायक बने थे।

JagranWed, 18 Dec 2019 05:39 PM (IST)
नहीं रहे पूर्व विधायक कौशलेंद्र शाही उर्फ बबुआजी

सिवान। दारौंदा क्षेत्र के पितामह कहे जाने वाले कौशलेंद्र प्रसाद शाही उर्फ बबुआ जी का निधन मंगलवार की रात उनके पैतृक आवास बगौरा कोठी पर हो गया। बुधवार की सुबह उनके अंतिम दर्शन के लिए काफी संख्या लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। वे 1967 में महाराजगंज से निर्दलीय विधायक बने थे। विधायक कर्णजीत सिंह उर्फ व्यास सिंह, राजद नेता मुन्ना शाही, राजद नेता उमेश सिंह, प्रखंड प्रमुख बेबी सिंह, पूर्व प्रमुख विनय सिंह, जिला पार्षद हितेश कुमार, पूर्व जिला पार्षद सुरेंद्र राय, मन्नू सिंह, तारकेश्वर सिंह, बैजनाथ प्रसाद, वीरेंद्र शर्मा, बृजनंदन सिंह, शंभू सिंह, बलिराम सिंह, ईश्वर सिंह, मानवेंद्र सिंह, दिनेश्वर सिंह, जंगीलाल प्रसाद, शिवशंकर दुबे, धर्मनाथ माली, टुनटुन माली, शोभनाथ महतो, आचार्य जितेंद्र नाथ पांडेय, त्रिपुरारी शरण मिश्र समेत अन्य ने गहरी शोक-संवेदना व्यक्त की है।

राम लक्ष्मण सीता मूर्तियों के साथ हुआ अंतिम संस्कार :

पूर्व विधायक कौशलेंद्र प्रसाद शाही उर्फ बबुआजी के अंतिम संस्कार में काफी संख्या में लोग शामिल हुए। उनका दाह संस्कार सिसवन घाट स्थित सरयू नदी में किया गया। मुखाग्नि उनके पुत्र कमलकिशोर शाही ने दी। पुत्र कमलकिशोर शाही ने बताया कि उनकी अंतिम इच्छा थी कि कोठी में लगे राम, लक्ष्मण, सीता की मूर्तियों के साथ उनका विसर्जन किया जाए।

बगौरा बाजार में बंद रहीं दुकानें :

बबुआ जी के निधन की सूचना मिलते हीं बगौरा के शोकाकुल व्यवसायियों ने स्वेच्छा से बुधवार को अपनी दुकानें बंद रखीं। व्यवसायियों ने बताया कि ऐसे इंसान बिरले हीं पैदा होते हैं, जिनका पूरा जीवन समाजसेवा में लगा रहा। ऐसे इंसान लोगों के लिए हमेशा प्रेरणा के स्रोत बने रहेंगे।

आइएएस छोड़कर समाज सेवा में लगे रहे बबुआ जी:

कौशलेंद्र प्रसाद शाही उर्फ बबुआ जी कुलीन परिवार के होने के बावजूद उन्होंने अपना पूरा जीवन सामाजिक कार्यों में लगाया। कौशलेंद्र प्रसाद शाही उर्फ बबुआ जी के पिता शत्रुघ्न प्रसाद शाही मुजफ्फरपुर जिले में स्वतंत्र भारत के पहले जिलाधिकारी थे। बबुआ जी ने पिता के पदचिह्नों पर चलकर 1952 में आइएएस की परीक्षा पास की। इसका प्रशिक्षण भी ले रहे थे, तभी एक छोटी सी घटना ने उनकी पूरी जीवन शैली ही बदल डाला। उनके यहां एक नौकर था जो काफी तबीयत खराब हो जाने के कारण बच नहीं सका था। उन्होंने कहा कि दूसरे को कुछ देने में जो सुकून मिलता है, वह लेने में नहीं। इस बात का असर इतना पड़ा कि उन्होंने जीवन जीने का तरीका हीं बदल दिया। 1967 में महाराजगंज से निर्दलीय विधायक बने थे।

पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री से काफी प्रभावित रहे बबुआजी :

दारौंदा प्रखंड के बगौरा में 1971 में भूमि दान देकर लालबहादुर शास्त्री उच्च विद्यालय एवं मध्य विद्यालय की स्थापना की। इसके अलावा पंचायत भवन स्वास्थ्य केंद्र, बगौरा बाजार आदि का निर्माण कराया था, पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री से निकट संबंध कारण उनकी स्मृति में उन्होंने विद्यालय का नाम लाल बहादुर शास्त्री उच्च विद्यालय रखा था। वे लालबहादुर शास्त्री उच्च विद्यालय एवं मध्य विद्यालय में स्वयं छात्रों को पढ़ाते थे। उन्हें जब भी फुर्सत मिलता लाल बहादुर शास्त्री उच्च विद्यालय में छात्रों को पढ़ाने चले जाते थे। इससे बच्चे काफी प्रभावित थे। गांव में बच्चों के खेलने के लिए कंपाउड और गरीबों को अपनी जमीन दान में दे दी है। बगौरा, रामाछपरा, दवन छपरा, उस्ती आदि क्षेत्र में उनकी 50 एकड़ भूमि में गरीबों एवं असहाय बसे हुए हैं।

सारण प्रमंडल में थी एक अलग पहचान :

उम्र के 100 बसंत देख चुके कौशलेंद्र प्रसाद शाही उर्फ बबुआ जी का न केवल सिवान, बल्कि पूरे सारण प्रमंडल में इनकी अलग पहचान थी। उनमें वे हर तरह से सहयोग में शामिल होते थे। वे इन महायज्ञ में आर्थिक एवं शारीरिक रूप से सहयोग करते। ग्रामीणों ने बताया कि करीब चार सौ से अधिक महायज्ञ में शामिल हो गए थे। अपने कोठी पर प्रत्येक वर्ष महायज्ञ कराते थे। वे अपने कोठी पर 48 महायज्ञ करा चुके हैं।

कई मंदिर स्थापना में किए हैं सहयोग :

बबुआ जी सिवान स्थित कचहरी दुर्गा मंदिर एवं राधा कृष्ण मंदिर के निर्माण में सहयोग के अलावा कई मंदिरों की स्थापना की थी। वे परिवार की कुलीन परिवार से दूर गांव में संन्यासी का जीवन जीकर समाजसेवा की राह पर चले। इस कारण उन्होंने कुछ व्यक्तिगत परेशानी भी हुई, लेकिन वे कभी विचलित नहीं हुए।

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