पानी में डूबी किसानों की किस्मत, चौकी-कुर्सी लगाकर सड़ी गली फसल काट रहे किसान

फसल कटनी के समय दो-चार दिन बरसी मुसीबत की बारिश ने अन्नदाता के माथे पर चिता की ऐसी लकीरें खींच दी है कि उसका खामियाजा आम जनमानस भी इस बार भुगतेगा। पानी में फसल क्या डूबी मानो किसानों की किस्मत ही डूब गई है।

JagranThu, 28 Oct 2021 07:34 PM (IST)
पानी में डूबी किसानों की किस्मत, चौकी-कुर्सी लगाकर सड़ी गली फसल काट रहे किसान

सीतामढ़ी । फसल कटनी के समय दो-चार दिन बरसी मुसीबत की बारिश ने अन्नदाता के माथे पर चिता की ऐसी लकीरें खींच दी है कि उसका खामियाजा आम जनमानस भी इस बार भुगतेगा। पानी में फसल क्या डूबी मानो किसानों की किस्मत ही डूब गई है। धान की फसल पानी में डूबकर बर्बाद हो गई है। जिससे इस बार धान के लाले पड़ने वाले हैं। आलम यह है कि फसल कटनी के लिए भी खेतों में पहुंचना मुहाल हो गया है। घुटने भर पानी खेतों में जमा है जिसमें धान की फसल सड़-गल गई है। फसल कटकर खलिहान में आई भी तो वह पुआल के काम ही आ पाएगी। इस साल मौसम की मार व बाढ़ से किसानों को बड़ी क्षति हुई है। क्षति की भरपाई के लिए नेताओं की ओर से सिर्फ बयानबाजी व आश्वासनों के सिवा कुछ हासिल न हो सका है। उधर, कृषि विभाग अभी सही ढंग से क्षति का आकलन भी नहीं कर पाया है। ऐसे में इस बार धान के लाले पड़ने वाले हैं। कोविड संकट, बाढ़ और सुखाड़ जैसी समस्याओं के बीच किसानों को इस बार धान की बंपर पैदावार से काफी उम्मीदें थी। खेतों में लहलहाते धान की फसल देखकर किसान काफी खुश थे। लेकिन अंत में हुई भारी बारिश ने उनके चेहरे से मुस्कान छीन लिए। बेलसंड प्रखंड के हंसौर गांव में जरा देखिए किसानों की नियती

बेलसंड प्रखंड के हंसौर गांव में धान फसल सारी नष्ट होने जाने से यहां के किसान कर्ज में डूब गए हैं। अब फसल की उपज आने से रही तो कर्ज कहां से चुकता करेंगे। जमा पूंजी भी नहीं रही। साहूकार व बैंक वालों की ताकादा की चिता खाए जा रही है उनको। फसल अच्छी होती तो घर-परिवार का भरण-पोषण होता। किसान उपेंद्र साह, गायत्री देवी ,चंद्रकांत झा, अमीरी साह, लखींद्र साह, जीतेंद्र साह, धरीक्षण साह, मीना देवी, शैल देवी का कहना है कि खेत में कही कमर भर तो कही घुटने भर पानी लगा है। धान का पौधा पानी में गिरे होने से सड़-गलकर बर्बाद हो गया है। अरमानों पर पानी फिर गया है। धान की बाली में डिभी उग आया है। ऐसे में किसानों के बीच त्राहिमाम मचा है। किसान सुशीला देवी, कुष्मी देवी, सुनील कुमार, चंद्रिका साह, सुकन साह, शशिकांत झा ने कहा कि कोरोना की मार से अभी उबर भी नहीं पाए कि यास तूफान, बाढ़-बरसात ने तोड़कर रख दिया। बड़ी हिम्मत करके महंगे खाद व बीज पर पानी की तरह पैसे बहाकर हमलोगों ने खेती की थी। मगर, बेमौसम बरसात ने सारे अरमानों पर पानी फेर दिया। खेती अब तो अभिशाप बन गई है। सरकार से उचित मदद भी समय पर नहीं मिल पाती। इधर, किसान ललन कुमार, मंगल साह, आंनद कांत झा ने बताया कि हमलोगों की तरफ शासन-प्रशासन का ध्यान नहीं गया तो अपना कृषि यंत्र लेकर प्रखंड कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन करेंगे।

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