बरसात में घाटकुसुंभा के आधा दर्जन गांवों का सहारा है नाव

शेखपुरा। आजादी के सात दशक बाद भी गांव में सड़क की सुविधा नहीं हो और हर वर्ष चार महीने पूरे बरसात लोगों के गांव से बाहर निकलने का एकमात्र साधन नाव हो तो गांव वालों के दर्द और परेशानी को महसूस किया जा सकता है।

JagranWed, 23 Jun 2021 11:51 PM (IST)
बरसात में घाटकुसुंभा के आधा दर्जन गांवों का सहारा है नाव

शेखपुरा। आजादी के सात दशक बाद भी गांव में सड़क की सुविधा नहीं हो और हर वर्ष चार महीने पूरे बरसात लोगों के गांव से बाहर निकलने का एकमात्र साधन नाव हो तो गांव वालों के दर्द और परेशानी को महसूस किया जा सकता है। ऐसी ही स्थिति शेखपुरा जिले के घाटकुसुंभा प्रखंड के एक दर्जन गांव की है।

कुछ गांव में तो किसी तरह से यातायात की सुविधा गांव वालों की पहल से हो पाई है, परंतु आधा दर्जन गांव के लोग प्रखंड मुख्यालय जाने अथवा अस्पताल जाने के लिए नाव का ही सहारा लेते हैं। यदि नाव नहीं हो तो इलाज के लिए चिकित्सक तक पहुंचने से पहले ही कई लोग दम तोड़ देते हैं।

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आधा दर्जन गांव में नाव ही सहारा

घाटकुसुंभा प्रखंड के आधा दर्जन गांव में एकमात्र यातायात की सुविधा नाव है। किसी गंभीर मरीज के होते ही नाव के सहारे ही प्रखंड मुख्यालय के अस्पताल तक पहुंचाया जाता है। इन गांवों में पानापुर, हरिनामचक, प्राणापुर, जितवारपुर, महबतपुर शामिल है। चंदन कुमार, सच्चिदानंद प्रसाद, बनारसी महतो बताते हैं कि गांव में कोई बीमार पड़ जाए तो प्राण बचाना मुश्किल हो जाता है। खाट के सहारे उसे नाव तक ले जाया जाता है। फिर वहां से घाटकुसुंभा प्रखंड मुख्यालय अस्पताल ले जाने में खटिया का ही सहारा लेना पड़ता है। हर चुनाव में प्रतिनिधियों के द्वारा सड़क की सुविधा बहाल करने का वादा किया जाता है परंतु कई सालों से हम लोग सड़क का इंतजार ही कर रहे। महबतपुर गांव के रमेश महतो, गुरेरा गांव के विनोद राम बताते हैं कि प्रखंड में लोगों को काफी परेशानी होती है। प्रशासन और जनप्रतिनिधि के द्वारा प्रखंड की उपेक्षा की गई है और विकास से वंचित प्रखंड रह गया है।

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इस बार सड़क बनने की जगी थी उम्मीद, पर रह गया अधूरा

इस साल सड़क बनने की उम्मीद गांव वालों को जगी थी। सड़क बनाने को लेकर मिट्टी गिराने का काम प्रारंभ किया गया था पर अंतिम समय में मिट्टी भरने का काम किया गया और फिर तूफान आने और समय से पहले मानसून आने की वजह से मिट्टी भरे सड़क को छोड़कर ही ठेकेदार चले गए। इस वजह से बरसात होने के बाद इस पर बाइक का चलना मुश्किल हो गया। पैदल लोग भी नहीं चल सकते। वहीं कुछ दबंग लोग रोड की जमीन पर अतिक्रमण भी कर लिया है जिससे भी सड़क बनने में परेशानी हुई।

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सरकारी स्तर पर है नाव की सुविधा

पानापुर गांव में सरकारी स्तर पर नाव की सुविधा दी गई है। नाव चालक पहले ग्रामीणों से प्रति यात्री बीस रूपये से लेकर तीस रूपये वसूलते थे परंतु इधर लगातार बारिश होने की वजह से अनुमंडल पदाधिकारी के निर्देश पर गांव के लोगों को निशुल्क नाव से नदी पार कराया जा रहा है।

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