व्रतियों ने किया उपवास, बाजार में रही भीड़

व्रतियों ने किया उपवास, बाजार में रही भीड़

शिवहर। लोक आस्था के चार दिवसीय महापर्व चैती छठ को लेकर इलाका भक्तिमय हो गया है। महापर्व

JagranSat, 17 Apr 2021 11:09 PM (IST)

शिवहर। लोक आस्था के चार दिवसीय महापर्व चैती छठ को लेकर इलाका भक्तिमय हो गया है। महापर्व के दूसरे दिन शनिवार को व्रतियों ने दिनभर उपवास पर रहकर खरना किया। इस दौरान सपरिवार सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। रविवार को अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को पहला अ‌र्घ्य दिया जाएगा। सोमवार को उदीयमान सूर्य को अ‌र्घ्य देने के साथ ही पर्व का समापन हो जाएगा। इधर, पर्व को इलाके में उत्साह है। वहीं छठ के गीत गूंज रहे है। जबकि, बाजारों में भी भीड़ है। शनिवार को बाजार में केला, नारियल, सेव, नारंगी, दउरा, सूप, चावल, गेहूं, घी, दीप, अरकत पात, मिठाई, मिट्टी के बर्तन, अगरबत्ती आदि की जमकर खरीदारी हुई। शहर के मेन रोड, राजस्थान चौक, गुदरी बाजार, रजिस्ट्री आफिस चौक समेत विभिन्न इलाकों में लोगों की भारी भीड़ रही। कोरोना के साये के बीच होने वाले इस महापर्व में लोग नदी-घाटों की बजाए घरों में ही घाट बनाकर अ‌र्घ्य देने की तैयारी में है। व्रतियों ने किया खरना, अस्ताचलगामी सूर्य को अ‌र्घ्य आज बथनाहा। लोक आस्था का महापर्व चैती छठ के दूसरे दिन व्रतियों ने खरना का अनुष्ठान किया। दिन भर उपवास रखकर व्रती शाम को मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ वाली खीर का प्रसाद बनाकर पूजा अर्चना की और फिर प्रसाद ग्रहण किया। षष्ठी तिथि 18 अप्रैल यानी रविवार को व्रती अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अ‌र्घ्य देगी। चैती छठ का समापन 19 अप्रैल सप्तमी तिथि सोमवार को होगा इस दिन सूर्योदय से पहले व्रती नदी या तालाब के पानी में उतरकर अ‌र्घ्य देंगी और सूर्यदेव से अपनी तथा अपने स्वजनों के कल्याण की कामना को लेकर उगते सूर्य को अ‌र्घ्य देकर पर्व का समापन करेगी। उसके बाद अन्न-जल ग्रहण कर पारण का अनुष्ठान कर व्रत का समापन किया जाएगा। हालांकि करोना सक्रमण को लेकर इस बार घर पर ही छठ करने की अपील प्रशासन द्वारा की गई है। छठ पर्व के बारे में पंडित पारसनाथ आचार्य ने बताया कि पौराणिक मान्यता है कि छठी मैया सूर्य देव की बहन हैं। यही वजह है कि छठ में सूर्य देव को पूजा अर्चना की जाती है। मान्यता है कि छठी मैया संतानों की रक्षा करती है और उन्हें दीर्घायु प्रदान करती हैं। शास्त्रों में षष्ठी देवी को ब्रह्मा जी का मानस पुत्री भी कहा जाता है।

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