मापतौल के इंतजार में बर्बाद हुई खेतों में लगी गन्ना, धोखाधड़ी के शिकार हुए किसान

मापतौल के इंतजार में बर्बाद हुई खेतों में लगी गन्ना, धोखाधड़ी के शिकार हुए किसान

शिवहर। मापतौल केंद्र खुलने के इंतजार में खेतों में खड़ी गन्ने की फसल बर्बाद हो गई और इलाके

JagranMon, 22 Feb 2021 01:12 AM (IST)

शिवहर। मापतौल केंद्र खुलने के इंतजार में खेतों में खड़ी गन्ने की फसल बर्बाद हो गई और इलाके का किसान धोखाधड़ी का शिकार बन गया। न केवल रीगा चीनी बल्कि गोपालगंज, सिधवलिया और मझौलिया की चीनी मिल और बिहार सरकार का गन्ना विभाग की साजिश में इलाके के किसानों के अरमान डूब गए। निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की बेपरवाही, प्रशासनिक उदासीनता और गन्ना विभाग के नकारेपन का फायदा गोपालगंज, सिधवलिया और मझौलिया की चीनी मिल प्रबंधन उठा ले गई। तीनों चीनी मिल ने ईखायुक्त बिहार के साथ रीगा चीनी मिल प्रक्षेत्र के गन्ने का सरकारी दर पर खरीदारी का एकरारनामा तो किया, किसानों के बजाए बिचौलियों के माध्यम से इलाके की गन्ने की खरीदारी कर अपना कोष भरने में कामयाबी पाई। शिवहर-सीतामढ़ी से गन्ने की ढुलाई में होने वाले खर्च को लेकर फंसे पेंच के चलते तीनों चीनी मिल ने सीतामढ़ी-शिवहर में कही भी अपना मापतौल केंद्र नहीं खोला और बिचौलियों के माध्यम से सौ-डेढ़ सौ रुपये प्रति क्विटल की दर से गन्ने की खरीदारी की। इधर, तीनों चीनी मिल मापतौल केंद्र खोलने की बात कहती रही, इलाके का किसाना मापतौल केंद्र खुलने का इंतजार करता रहा और इसी बीच चीनी मिलें बंद कर दी गई। जबकि, किसानों का हजारों क्विटल गन्ना खेतों में पड़ा रह गया। अब हालत यह हैं कि खेतों में लगी गन्ने की फसल सूख कर बर्बाद हो रही है और किसान अपना कलेजा पीट रहा है। ईंखोत्पादक संघ अध्यक्ष नागेंद्र प्रसाद सिंह बताते हैं कि रीगा गन्ना प्रक्षेत्र के हजारों किसानों के साथ धोखाधड़ी हुई है। इसकी जांच होनी चाहिए। दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं जिनका गन्ना बर्बाद हो रहा है, उन्हें मुआवजा मिलना चाहिए। बताते चलें कि, भुगतान के सवाल पर किसान और मजदूरों के साथ मिल प्रबंधन का टकराव हो गया। कई दौर की वार्ता के बाद रीगा चीनी मिल प्रबंधन ने इस सीजन में मिल चलाने से इन्कार कर दिया। गन्ना आयुक्त द्वारा दस जनवरी को रीगा चीनी मिल परिसर में की गई बैठक में कोई निर्णय नहीं निकला। लिहाजा, इलाके की गन्ना गोपालगंज, सिधवलिया और मझौलिया की चीनी मिलों को आवंटित कर दिया। 13 जनवरी को ईंखायुक्त बिहार अरशद अजीज ने तीनों चीनी मिल को शिवहर-सीतामढ़ी में 19 स्थानों पर मापतौल केंद्र खोलने का निर्देश दिया था। उन्होंने किसानों से गन्ना लेने और राशि का भुगतान एक सप्ताह के भीतर किसानों के बैंक खाते में भेजने का निर्देश दिया था। साथ ही गन्ने की ढुलाई में होने वाले खर्च के भुगतान पर बाद में निर्णय लेने की बात कही थी। ढुलाई में खर्च के पेंच के चलते तीनों में से किसी भी चीनी मिल ने मापतौल केंद्र नहीं खोला। जबकि, बिचौलिए आधी कीमत पर किसानों से गन्ना खरीदने में कामयाब हो गए। हालांकि, बड़ी संख्या में किसान वैध मापतौल केंद्र खुलने का इंतजार करते रह गए। मामले को लेकर ईंखोत्पादक संघ अध्यक्ष नागेंद्र प्रसाद सिंह ने पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को ई-मेल भेज कर, हस्तक्षेप करने की मांग की थी। वहीं मुख्य सचिव से भी कार्रवाई की मांग की थी। लेकिन कोई पहल नहीं की जा सकी। इधर, अवैध मापतौल केंद्र संचालकों के खिलाफ प्रशासनिक स्तर पर कोई भी कार्रवाई नहीं की गई। तीनों चीनी मिल, बिचौलियों और प्रशासन की मिलीभगत के चलते अब गन्ना किसान धोखाधड़ी के शिकार बन गए है।

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