सारण के मढौरा में 55 हजार दुधारु मवेशी की स्वास्थ्य रक्षा के लिए हैं सिर्फ एक पशु चिकित्सक

सारण के मढौरा में 55 हजार दुधारु मवेशी की स्वास्थ्य रक्षा के लिए हैं सिर्फ एक पशु चिकित्सक

किसान कृषि एवं पशुपालन को बढावा देने तथा किसानों का जीवन खुशहाल करने की बातें तो बहुत की जाती है लेकिन मढौरा प्रखंड में 55 हजार पशुओं की स्वास्थ्य रक्षा की जिम्मेदारी अकेले एक पशु चिकित्सक संभाल रहे हैं। इस अस्पताल के लिए छह चिकित्सकों का पद स्वीकृत हैं।

Publish Date:Mon, 30 Nov 2020 11:14 PM (IST) Author: Jagran

सारण। किसान, कृषि एवं पशुपालन को बढावा देने तथा किसानों का जीवन खुशहाल करने की बातें तो बहुत की जाती है, लेकिन मढौरा प्रखंड में 55 हजार पशुओं की स्वास्थ्य रक्षा की जिम्मेदारी अकेले एक पशु चिकित्सक संभाल रहे हैं। इस अस्पताल के लिए छह चिकित्सकों का पद स्वीकृत हैं। वहीं पशुओं के इलाज के लिए दो केंद्र मढ़ौरा व गौरा में बनाए गए है। मुख्यालय में पशु अस्पताल को आज तक अपना सरकारी भवन नसीब नहीं हो सका। एक छोटे से कमरे में पशु की चिकित्सा का कामकाज किया जाता है। ग्रामीण व पशुपालकों की मानें तो नगर पंचायत क्षेत्र के अलावा लगभग एक सौ गांव वाले इस प्रखंड में एक पशु चिकित्सक के भरोसे पशुपालक नहीं रह सकते। गांव में भ्रमण करने वाले ग्रामीण पशु चिकित्सक के भरोसे ही पशुओं की स्वास्थ्य रक्षा है। खस्ताहाल सरकारी अस्पताल में सरकार द्वारा लाखों की लागत से कई जरूरी दवा के साथ कई आवश्यक उपकरण तो दिए गए । परंतु देखरेख के अभाव में सब बर्बाद हो रहे।

जानकारी के अनुसार इस मवेशी अस्पताल में पशुओं के इलाज एवं मल मूत्र जांच सहित कई महंगे उपकरण मौजूद है। परंतु आज तक इन उपकरणों का उपयोग नही किया जा सका है। इस मवेशी अस्पताल में इलाज के नाम पर केवल मवेशियों के गोबर की जांच की जाती है। जरूरत के अनुसार कुछ दवाएं दी जाती है। भवन के अभाव में एक कमरे में चलता है अस्पताल :

सरकार द्वारा 2008 में ही प्रखंड में पशु अस्पताल बनाने के लिए जमीन का सर्वेक्षण कराया गया था । भवन बनने के पहले लाखों की लागत से आवश्यक उपकरण खरीदे गए थे । परंतु जो पुराना भवन था वह इतना जर्जर था कि इन उपकरणों का आज तक उपयोग भी नही हो सका । बिना उपयोग किए ही ये सारे उपकरण खराब हो गए । वर्तमान में प्रखंड कार्यालय परिसर में एक कमरे में सिर्फ कोरम पूरा करने के लिए अस्पताल का संचालन होता है। तीन दिन कार्यालय तो तीन दिन भ्रमणशील रहते हैं एक मात्र चिकित्सक :

पूरे प्रखंड में सिर्फ गाय तथा भैंस की संख्या लगभग 55 हजार है। जबकि अन्य पालतू पशु की संख्या सरकारी स्तर पर ज्ञात नहीं है। एक जानकारी के अनुसार करीब एक लाख पालतु पशुओं की संख्या है । इन पशुओं के इलाज के लिए मात्र एक चिकित्सक की नियुक्ति की गई है । तीन दिन वे प्रभारी रहते हैं। बाकी तीन दिन भ्रमणशील चिकित्सक की भूमिका में रहते हैं। बोले पशुपालक : फोटो 29 सीपीआर 22

दवा के अभाव में पशुओं का इलाज प्राइवेट स्तर पर कराया जाता है, जिससे पशु पालकों को काफी आर्थिक क्षति होती है। मनोज राय

फोटो 29 सीपीआर 23

भवन के अभाव में लाखों रुपये के उपकरण बर्बाद हो गए। अब सिर्फ कोरम पूरा करने के लिए सरकारी पशु अस्पताल है । मनोज कुमार

फोटो 29 सीपीआर 24

इस समय सर्दी के मौसम में कई संक्रामक रोग पशुओं को हो जाता है । परंतु जांच के अभाव में बीमारी का पता सही समय पर नही होने से पशुओं की मौत भी हो जाती है। विभाग को इसपर ध्यान देना चाहिए। भुलाई राय वर्जन :

फोटो 29 सीपीआर 25 पशु अस्पताल के नए भवन निर्माण हेतु 2014 में मढौरा अंचलाधिकारी के द्वारा पांच कट्ठा जमीन का चयन कर लिया गया है। जिसका प्रतिवेदन जिला पशुपालन पदाधिकारी को वर्ष 2014 में ही भेज दिया गया था। पशु अस्पताल का अपना भवन होने पर सुविधा बढे़गी। डॉ. मुकेश कुमार, पशु चिकित्सा पदाधिकारी मढौरा।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.