सारण : चैती छठ व्रत आज

सारण : चैती छठ व्रत आज

चैती छठ के चार दिवसीय अनुष्ठान का दूसरे दिन चैत्र शुक्ल पंचमी यानी शनिवार की देर शाम खरना के साथ संपन्न हुआ। भगवान भास्कर की उपासना के पर्व का रविवार को तीसरा दिन होगा। इस दिन संध्या पहर डूबते सूर्य का व्रती अ‌र्घ्य अर्पित करेंगे। सोमवार को उगते सूर्य को अ‌र्घ्य देने के बाद व्रतियों का पारण होगा। इसके साथ ही लोकआस्था का यह महापर्व संपन्न हो जायेगा।

JagranSat, 17 Apr 2021 10:36 PM (IST)

सारण। चैती छठ के चार दिवसीय अनुष्ठान का दूसरे दिन चैत्र शुक्ल पंचमी यानी शनिवार की देर शाम खरना के साथ संपन्न हुआ। भगवान भास्कर की उपासना के पर्व का रविवार को तीसरा दिन होगा। इस दिन संध्या पहर डूबते सूर्य का व्रती अ‌र्घ्य अर्पित करेंगे। सोमवार को उगते सूर्य को अ‌र्घ्य देने के बाद व्रतियों का पारण होगा। इसके साथ ही लोकआस्था का यह महापर्व संपन्न हो जायेगा। व्रत पर कारोना संक्रमण का साया है। ऐसे में गंगा, सरयू व गंडक सहित यहां के अन्य छोटी-छोटी नदियों और तालाब घाटों पर अ‌र्घ्य अर्पित नहीं होंगे। प्रशासनिक बंदिश और महामारी के डर से शहर और गांव तक के लोगों को नदी व तालाब घाटों पर न जाने का फैसला लिया है। पूरे जिले में घर की छतों व दरवाजों पर ही कृत्रिम तालाब बना अ‌र्घ्य अर्पण करने की तैयारी चल रही है। ऋग्वैदिक काल से चली आ रही है छठ पर्व की परंपरा छठ बिहार व पूर्वी यूपी के लोकआस्था का पर्व है। यहां के लोग देश व विदेश के कोने में इस पर्व को उल्लास के साथ मनाते है। आस्था में डूबे लोग इस सूर्य षष्ठी के व्रत को आरोग्यता, सौभाग्यता और संतान सुख के लिए करते हैं। वैसे छठ व्रत की परंपरा ऋग्वैदिक काल से चली आ रही है। स्कंद पुराण में प्रतिहार षष्ठी के तौर पर इस व्रत की चर्चा है। इसके मुताबिक राजा प्रियवर्त ने यह व्रत तब रखा था जब वे कुष्ठ रोग से ग्रसित हो गये हैं। उन्होंने इस व्रत को किया और निरोग हो गये। छठ व्रत का है धार्मिक, प्राकृतिक व वैज्ञानिक महत्व छठ व्रत का धार्मिक ही नहीं प्राकृतिक व वैज्ञानिक महत्व भी है। धार्मिक आस्था के अनुसार इस व्रत का प्रसाद तेजस्विता, निरोगिता व बौद्धिक क्षमता को बढ़ाती है। स्वास्थ विज्ञान कहता है कि परिवर्तित होते मौसम में मानव शरीर में फॉस्फोरस की कमी हो जाती है। शरीर में कफ, सर्दी व जुकाम के लक्षण परिलक्षित होने लगते हैं। प्राकृतिक वस्तुओं में सबसे अधिक फॉस्फोरस गुड़ में पाया जाता है। छठ पूजनोत्सव जिस दिन से शुरू होता है उसी दिन से गुड़ वाले पदार्थ का सेवन शुरू हो जाता है। छठ के प्रसाद में चीनी की जगह गुड़ का प्रयोग और ईख तथा अन्य मौसमी फलों का होना मानव शरीर के फॉस्फोरस की कमी को दूर करता है।

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