शहर से ज्यादा सजग दिखे ग्रामीण क्षेत्रों के मतदाता

समस्तीपुर । सोमवार की सुबह से ही समस्तीपुर सुरक्षित लोकसभा क्षेत्र में लोकतंत्र का महापर्व मना। दिनभर गहमागहमी रही। पिछले पंद्रह दिनों से रहनुमाओं की जुबानी, दावों की कहानी सुनने व भविष्य के सुनहले सपने देखने के बाद मतदाताओं ने अपनी पारी खेली। बहुत कुछ सुनने, हर पहलू पर सोचने या और कोई बात..। जो भी हो, लेकिन आज उन्होंने अपना इजहार इलेक्ट्रानिक वोटिग मशीन के माध्यम से जता दिया है। फर्क यही कि नेताओं की जुबानी हर रोज सुनी गई। लेकिन, इनके इजहार को जानने के लिए दो दिन का इंतजार करना होगा। तब तक सियासी पहलवान मैदान के भूगोल और गणित को पढ़ने में समय काटेंगे। प्रबंधक आशा दिलाएंगे। वोटर फिर चुपचाप सबकुछ सुनेंगे। दलील उल्टी हुई तो मुस्कान के साथ वे भी इंतजार करेंगे। सियासत के बदलते रंग की तरह मतदान के गणित का रंग भी बदला रहा। वोट का प्रतिशत बताता है कि कहीं उत्साह परवान पर था तो कहीं उदासीनता भी उसी अनुपात में। सबकी परीक्षा थी। वह घड़ी खत्म हो गई। चुनावी समर में भाग्य आजमाने उतरे सियासी पहलवान का लक अब लॉक हो चुका है। रहनुमाओं की राजनीतिक फसल की कटनी चुनाव आयोग की देखरेख में जिला प्रशासन ने करवा दी। समस्तीपुर सुरक्षित लोकसभा उपचुनाव में आठ प्रत्याशी हैं। सबों ने अपने तरह से मेहनत की है। वोटरों ने अपना काम कर दिया। प्रशासन ने भी महापरीक्षा दे दी है। ईवीएम की रखवाली करते हुए 24 अक्टूबर को इसे खोलने का काम शेष है। उसी दिन तय होगा कि किसके सिर ताज होगा।

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सुबह पांच बजे से रही चहल-कदमी

समस्तीपुर शहर का बीएड कॉलेज मैदान। सुबह के पांच बजे हैं। कुछ लोग मार्निंग वाक कर रहे हैं तो कुछ बच्चे खेलकूद। बीएड कॉलेज पर भी बूथ है। मतदान कराने के लिए पहुंचे कर्मी नहा-धोकर तैयार हो रहे थे। चुनाव कराने के लिए पहुंचे करीब आधा दर्जन पुलिसकर्मी मतदान शुरू होने से पहले कुछ नाश्ता करना चाह रहे थे, इसलिए नाश्ते की दुकान तलाश रहे थे। इसी बीच एक व्यक्ति ने कहा, आजाद चौक पर दुकान है, पर अभी नहीं खुली होगी। इतना सुनते ही वे लोग वापस फिर बूथ पर लौट गए। सुबह सात बजे से मतदान शुरू होना था, इस वजह से सभी पहले से ही तैयारी में जुटे थे। अब मतदान का समय शुरू हो चुका था। सात बजे मध्य विद्यालय मगरदही बूथ पर करीब दर्जनभर मतदाता कतार में खड़े दिखे। लोकतंत्र के इस महापर्व में सभी अपनी भागीदारी सुनिश्चित करना चाह रहे थे। मौसम बहुत ही खुशनुमा था, इसलिए लोगों में थोड़ा ज्यादा उत्साह दिख रहा था। पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं वोटर कुछ ज्यादा ही उत्साहित नजर आ रही थीं। इसी बीच एक वृद्ध मतदाता अपने परिवार के साथ फोटो पहचान पत्र लिए बूथ की ओर आ रही थी। पूछने पर अपना नाम सावित्री देवी बताया। उन्होंने कहा, जब तक जिदा है, अपना वोट जरूर गिराऊंगी। बगल में मवेशी अस्पताल में भी बूथ हैं। पर, यहां वोटिग प्रतिशत काफी कम। पूछने पर पीठासीन पदाधिकारी मुकेश कुमार मृदुल ने बताया कि 11 बजे तक मात्र सात प्रतिशत मतदान हुआ है। यहां से मुसरीघरारी की ओर बढने पर रोड साइड में उत्क्रमित मध्य विद्यालय मोहनपुर मिला। यहां सुरक्षा में जवान तैनात दिखे। लाइन में करीब पचास से ऊपर मतदाता अपनी बारी की प्रतीक्षा करते दिखे। इस केंद्र पर दो बूथ थे। बूथ नंबर 134 पर वोटरों की अच्छी खासी संख्या कतार में दिखी। जबकि, बूथ संख्या 135 पर महज 20 से 25 वोटर दिखे। आसपास भी पूरी तरह शांति थी।

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शहरी क्षेत्र में एक-एक कर आते रहे मतदाता

मुसरीघरारी-समस्तीपुर मुख्य पथ पर अन्य दिनों की अपेक्षा आज आवाजाही थी। सड़कों पर अन्य दिनों की तरह ही वाहन दिखे। कुछ दूर आगे बढ़ने पर सरयुग महाविद्यालय बूथ पर भी मतदाता कतार में दिखे। गश्ती दल दंडाधिकारी भी मौजूद थे। समस्तीपुर लोकसभा क्षेत्र का अंतिम गांव हरपुर एलौथ है। यहां पर उत्क्रमित मध्य विद्यालय हरपुर एलौथ पर बूथ बनाए गए हैं। बूथ संख्या 107 और 108। दोनों बूथों पर करीब तीन सौ मतदाता कतार में खड़े दिखे। सुरक्षा के लिए जवान तैनात थे। बूथ पर पूरी तरह शांति थी। न कोई टेंशन न कोई आपाधापी। सब अपनी पसंद के उम्मीदवार को वोट देने के लिए कतार में खड़े थे। लोग आते गए, वोट गिराकर लौटते रहे। इसी बीच पेट्रोलिग गाड़ी भी पहुंच गई। बूथ पर पहुंचकर उन्होंने जायजा लिया। पूरी तरह शांति दिखी। कुछ देर ठहरने के बाद फिर दूसरे बूथ के लिए रवाना हो गए। सबसे बड़ी बात यह थी कि शहर की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में वोटिग के प्रति मतदाताओं में ज्यादा उत्साह दिखा। बालिका उच्च विद्यालय घोषलेन पर मुश्किल से दस वोटर कतार में दिखे। वहीं लगुनियां सूर्यकंठ में कम से सौ वोटर लाइन में लगे हुए थे। यही हाल जितवारपुर निजामत गांव के विभिन्न बूथों पर देखने को मिला। हर जगह वोटरों की अच्छी खासी संख्या थी।

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दिनभर आते-जाते रहे मतदाता, उत्साह नहीं दिखा

मतदान शुरू होने के समय वोटरों का जो उत्साह और मतदान केंद्रों पर भीड़ थी, वह धीरे-धीरे कम पड़ती गई। हालांकि, मतदाता आते-जाते रहे। बारह बजे तक 24 प्रतिशत मतदान हो चुका था। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों की भूमिका अहम रही। शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्र के मतदाता मतदान के प्रति ज्यादा सजग दिखे। जबकि, सबसे ज्यादा जागरूकता कार्यक्रम शहरी क्षेत्र में ही चलाए गए थे।

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