टीबी मुक्त वाहिनी की बैठक में मरीजों को समय से दवा नहीं मिलने का उठा मामला

जिला यक्ष्मा केंद्र कार्यालय कक्ष में सोमवार को टीबी मुक्त वाहिनी जिला इकाई की बैठक हुई। अध्यक्षता जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डा. सुधा वर्मा ने की। बैठक में टीबी चैम्पियन ने विभिन्न समस्याओं की जानकारी दी। जिसमें पहली प्राथमिकता दवाई को दी गई।

JagranMon, 25 Oct 2021 11:39 PM (IST)
टीबी मुक्त वाहिनी की बैठक में मरीजों को समय से दवा नहीं मिलने का उठा मामला

समस्तीपुर । जिला यक्ष्मा केंद्र कार्यालय कक्ष में सोमवार को टीबी मुक्त वाहिनी जिला इकाई की बैठक हुई। अध्यक्षता जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डा. सुधा वर्मा ने की। बैठक में टीबी चैम्पियन ने विभिन्न समस्याओं की जानकारी दी। जिसमें पहली प्राथमिकता दवाई को दी गई। टीबी से प्रभावित लोगों को समय से दवा उपलब्ध होने, समय से फॉलोअप जांच करने, पोषण राशि समय से मिलने, टीबी सेंटर पर मरीज के साथ भेदभाव दु‌र्व्यवहार नहीं करने सहित अन्य समस्याओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा हुई। जिला यक्ष्मा पदाधिकारी समस्याओं पर विचार विमर्श करते हुए तत्काल निराकरण करने का निर्देश दिया। टेली काउंसिलिग कर रहे टीबी चैंपियन ने काउंसिलिग रजिस्टर दिखाकर गलत नंबर की जानकारी दी। साथ समाधान करने का अनुरोध किया। बैठक के अंत में चैंपियन कार्य की सराहना हुइ। मौके पर कृष्णबली, सत्येंद्र नाथ झा, आशा कुमारी, विपिन दास, रंजीत साहू, सोनु कुमारी, सोनम कुमारी, शोभा देवी, जुलेखा खातून, मो. एजाज, सतीश राय, ममता कुमारी, पूजा कुमारी, भोला साहू, कश्मीर पासवान, अरविद कुमार, मो. जमालुद्दीन, रितेश कुमार आदि उपस्थित रहे। एमडीआर-टीबी हो सकता है खतरनाक :

एमडीआर-टीबी होने पर सामान्य टीबी की कई दवाएं एक साथ प्रतिरोधी हो जाती हैं। टीबी की दवाओं का सही से कोर्स नहीं करने एवं बिना चिकित्सक की सलाह पर टीबी की दवाएं खाने से ही सामान्यता एमडीआर-टीबी होने की संभावना बढ़ जाती है। टीबी मुक्त करने के लिए व्यापक स्तर पर चलाया जा रहा अभियान :

2025 तक को टीबी मुक्त बनाने को लेकर व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग इस अभियान के सफल क्रियान्वयन को लेकर व्यापक स्तर पर यक्ष्मा मरीजों की पहचान कर रहा है ताकि उन्हें समय पर इलाज कर बीमारी पर नियंत्रण किया जा सके। यक्ष्मा मरीजों के बेहतर इलाज एवं सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा आरोग्य साथी एप की मदद ली जा रही है। एप के माध्यम से यक्ष्मा मरीज न सिर्फ अपनी प्रगति रिपोर्ट देख पाएगा, बल्कि टीबी से संबंधित समस्त जानकारी उन्हें आसानी से प्राप्त हो सकेगी।

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