प्रधानाध्यापक चुनाव कार्य में, शैक्षणिक व्यवस्था चरमराई

एक तो कोरोना काल में शैक्षणिक संस्थानों की स्थिति चरमराई हुई थी उसके बाद पंचायत चुनाव ने शैक्षणिक संस्थानों की हालत और खराब कर दी। हद यह कि प्रधानाध्यापक को भी चुनाव कार्य में लगाया गया है। ऐसी स्थिति में विद्यालय को व्यवस्थित तरीके से कैसे संचालित किया जाएगा यह यक्ष प्रश्न है।

JagranTue, 07 Dec 2021 02:16 AM (IST)
प्रधानाध्यापक चुनाव कार्य में, शैक्षणिक व्यवस्था चरमराई

समस्तीपुर । एक तो कोरोना काल में शैक्षणिक संस्थानों की स्थिति चरमराई हुई थी उसके बाद पंचायत चुनाव ने शैक्षणिक संस्थानों की हालत और खराब कर दी। हद यह कि प्रधानाध्यापक को भी चुनाव कार्य में लगाया गया है। ऐसी स्थिति में विद्यालय को व्यवस्थित तरीके से कैसे संचालित किया जाएगा यह यक्ष प्रश्न है।

स्कूलों में शैक्षणिक व्यवस्था का हाल जानने के लिए दैनिक जागरण की टीम मोहिउद्दीननगर- मुदाबाद पथ से सटे बलुआही स्थित राजकीयकृत मध्य विद्यालय सुल्तानपुर पश्चिम पहुंची। टीम के पहुंचते ही सभी शिक्षक चौकन्ने हो गए। जबकि बच्चे स्कूल परिसर में उछल-कूद कर रहे थे। प्रधानाध्यापक की कुर्सी खाली मिली। बताया गया कि चुनाव को लेकर प्रधानाध्यापक प्रखंड कार्यालय में प्रतिनियुक्त किये गए हैं। शिक्षकों को चुनाव ड्यूटी में लगाए जाने के कारण बच्चों की पढाई की खानापूर्ति ही हो रही है। शिक्षक मो. सिराज और अनिल कुमार ने बताया कि कुल नामांकित 366 बच्चे हैं। जबकि विभिन्न वर्गों में कुल उपस्थिति 179 ही रही। जबकि शिक्षकों की संख्या आठ है। इसमें एक शिक्षिका का प्रतिनियोजन नवादा उच्च विद्यालय में किया गया है। शिक्षकों का प्रतिनियोजन हर चरण के पंचायत चुनाव में किया जा रहा है।

विद्यालय के छात्रों ने बताया कि पढाई तो होती है। परंतु इधर कुछ दिनों से प्रभावित हुई है। एचएम के विद्यालय नहीं आने से बच्चे उदास थे। बच्चों का कहना था कि एचएम सर रहते हैं तो पढ़ाई बेहतर तरीके से होती है। प्रधानाध्यापक इंतखाब आलम ने दूरभाष पर बताया कि चुनाव कार्य में उनकी प्रतिनियुक्ति है। विद्यालय में नहीं रहने से स्वाभाविक है कि व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

जमीन पर बैठ बच्चे करते हैं पढाई

दावे चाहे जो भी हो परंतु अब भी बच्चे जमीन पर बैठकर ही पढ़ाई करते हैं। शिक्षकों ने बताया कि बेंच- डेस्क के अभाव में वर्ग एक से पांच तक के बच्चों को जमीन पर बैठाकर पढ़ाया जाता है। जबकि वर्ग 06 से आठ तक के बच्चों के लिए कम मात्रा में ही सही पर बेंच उपलब्ध है। मजबूरी में एक ही बेंच पर छह- छह बच्चे बैठते है। वहीं अन्य बच्चे अपने घर से बैठने के लिए बोरा लाते हैं।

पेयजल की है घोर समस्या

विद्यालय परिसर में एक मात्र चापाकल है। इससे बच्चों को काफी दिक्कत होती है। काफी संख्या में बच्चे अपने घर से बोतल में भरकर पानी लाते हैं। महिला एवं पुरुष के लिए अलग-अलग शौचालय है।

वर्ग कक्ष का है अभाव

विद्यालय में वर्ग कक्ष का भी अभाव है। कहने को तो कई कक्ष हैं परंतु जर्जरता के कारण पांच कमरे में ही वर्ग कक्ष संचालित हो रहा है। वर्ग एक और दो के एक कमरे में और चार व पांच को एक साथ चलाया जाता है।

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