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जनसंख्या का बढ़ रहा ग्राफ, महिलाएं भी नहीं करतीं गर्भनिरोधक की बात

समस्तीपुर। कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए बहुस्तरीय रणनीति अपनाई गई है। स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अनचाहें गर्भधारण से रोकथाम, जिसके कारण मातृ एवं शिशु के प्रभाव को कम करने एवं रुग्णता के साथ स्वास्थ्य देखभाल किया जा सके। जिसके परिणामस्वरूप जनसंख्या स्थिरीकरण की आवश्यकता एवं इससे होने वाले दूरगामी लाभ के प्रति आमजन के मध्य जागरूकता उत्पन्न किया जा सकता है। छोटा परिवार-सुखी परिवार, ये नारा जिले के शहरी इलाकों में कुछ हद तक तो कारगर है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में हकीकत आज भी कुछ और बयां कर रही है। यहां शादीशुदा जोड़ों को बच्चों के बीच कितना अंतर रखना है, यह भी नहीं मालूम। परिवार नियोजन तक के विषय में जानकारी नहीं है। परिवार नियोजन का नाम सुना भी है तो ये पता नहीं कि ये क्या होता है। एक तो शिक्षा का अभाव, कम उम्र में शादी और पुरुष नसबंदी के प्रति उदासीनता, ये सारी बातें जिले में बढ़ते प्रजनन दर के लिए चिता की बात है।

इन तीनों कारणों से स्वास्थ्य विभाग और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे परिवार नियोजन के सारे दावे फेल हो रहे हैं। साथ ही इसके लिए चलाई जा रहीं बड़ी-बड़ी योजनाएं भी प्रचार-प्रसार के अभाव में दम तोड़ती नजर आ रही हैं। जनसंख्या नियंत्रण के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है लड़कियों, युवाओं को आवश्यक जानकारी के साथ सुरक्षा के उपाय के बारे में उनसे खुलकर बात करने की। कोरोना काल के बीच परिवार नियोजन की तैयारी

इस बार भी स्वास्थ्य विभाग विश्व जनसंख्या दिवस पर जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा मनाएगा। कोरोना संकट के बीच इस बार स्वास्थ्य विभाग का फोकस न सिर्फ अनचाहे गर्भधारण को रोकना बल्कि मातृ और शिशु स्वास्थ्य कल्याण पर भी होगा। जिलेभर में दंपती संपर्क पखवाड़ा मनाया जा रहा है। जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा का थीम आपदा में भी परिवार नियोजन की तैयारी, सक्षम राष्ट्र और परिवार की पूरी जिम्मेदारी है। दो चरणों में मनेगा पखवाड़ा

जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा का आयोजन दो चरणों में होगा। दंपती संपर्क पखवाड़ा 10 जुलाई तक चलेगा। इसके बाद 11 से 31 जुलाई तक जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा मनाया जाएगा। हालांकि इस दौरान पूरी तरह से शारीरिक दूरी का पालन किया जाएगा। सिविल सर्जन डॉ. रति रमण झा ने बताया कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के माध्यम से प्रखंड स्तरीय अधिकारी और आशा का ऑनलाइन उन्मुखीकरण किया जाएगा ताकि जनसंख्या स्थिरीकरण के लिए बेहद जरूरी सही उम्र में शादी, पहले बच्चे की देरी और बच्चों में सही अंतराल के बारे में वे लोगों को जागरूक कर सके। इसको लेकर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। इन गतिविधियों पर होगा विशेष जोर

जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़े के दौरान गर्भनिरोधक की मांग पर प्रत्येक लाभार्थी को दो महीने तक का अतिरिक्त इच्छित गर्भ निरोधक सामग्री दिया जाएगा ताकि लाभार्थी को बार-बार गर्भनिरोधक सामाग्रियों के लिए स्वास्थ्य केंद्र नहीं जाना पड़े। परामर्श के साथ परिवार नियोजन की सुविधा

जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा के दौरान इच्छुक दंपतियों को परामर्श दिया जाएगा। इसके लिए स्वास्थ्य संस्थानों में परामर्श पंजीयन केंद्र खोले जाएंगे, जहां परिवार कल्याण परामर्शी, प्रशिक्षित स्टाफ नर्स व एएनएम की तैनाती होगी। इसके अलावा ओपीडी, एएनसी सेवा केंद्र, प्रसव कक्ष व टीकाकरण केंद्र पर भी कॉन्ट्रासेप्टिव डिस्प्ले ट्रे व प्रचार प्रसार सामग्रियों के माध्यम से परामर्श देते हुए इच्छुक लाभार्थी को परिवार नियोजन सेवा देने का निर्देश दिया हैँ। सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर आवश्यक मात्रा में गर्भनिरोधक सामाग्रियों का वितरण किया जाएगा। 1220 ऑपरेशन करने का दिया गया लक्ष्य

परिवार नियोजन को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा जनसंख्या स्थिरता पखवारा का आयोजन किया जा रहा है। इसमें 11 से 31 जुलाई तक विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यक्रम होंगे। विभाग की ओर से अलग-अलग स्वास्थ्य संस्थानों को महिला बंध्याकरण और पुरुष नसबंदी का लक्ष्य भी दिया गया है। इसमें जिले में 1090 महिला बंध्याकरण और 130 पुरुष नसबंदी करने को कहा गया है। सदर अस्पताल में महिला बंध्याकरण और पुरुष नसबंदी के लिए क्रमश: 90 और 30, अनुमंडलीय अस्पताल पूसा, रोसड़ा, दलसिंहसराय, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र वारिसनगर, कल्याणपुर, पूसा, मोरवा, सरायरंजन, पटोरी, मोहिउद्दीनगर, उजियारपुर, विभूतिपुर, हसनपुर, सिघिया, मोहनपुर, विद्यापतिनगर, शिवाजीनगर, खानपुर व बिथान में क्रमश: 50-50 व पांच-पांच ऑपरेशन करने का लक्ष्य दिया गया है। रेफरल अस्पताल ताजपुर को क्रमश: 40 व तीन और पीएचसी कोठिया को क्रमश: 10 व दो ऑपरेशन करने को कहा गया है। 48 लाख पार कर चुकी है समस्तीपुर की आबादी

जिले में वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 44 लाख आबादी थी। आज यह बढ़कर 48 लाख से अधिक हो चुका है। दरअसल जनसंख्या नियंत्रण को लेकर चलाये जा रहे सरकारी और गैर सरकारी अभियान पूरी तरह कारगर नहीं हो रहे है। सरकार द्वारा जनसंख्या विस्फोट रोकने के लिए चलाये जा रहे परिवार नियोजन सहित अन्य कार्यक्रम भी फ्लॉप साबित हो रहे है। जानकारों की मानें, तो विभागीय उदासीनता की वजह से परिवार नियोजन कार्यक्रम का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है।

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