पांच दिवसीय पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ, साढ़े सात लाख बच्चों को खुराक पिलाने का लक्ष्य

समस्तीपुर। पांच दिवसीय पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ सिविल सर्जन डॉ. सत्येंद्र कुमार गुप्ता ने रविवार को सदर अस्पताल में नवजात को खुराक पिलाकर किया।

JagranMon, 27 Sep 2021 12:51 AM (IST)
पांच दिवसीय पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ, साढ़े सात लाख बच्चों को खुराक पिलाने का लक्ष्य

समस्तीपुर। पांच दिवसीय पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ सिविल सर्जन डॉ. सत्येंद्र कुमार गुप्ता ने रविवार को सदर अस्पताल में नवजात को खुराक पिलाकर किया। सिविल सर्जन ने सख्त रूप से सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी एवं चिकित्सा पदाधिकारी को अभियान की मॉनिटरिग करने का निर्देश दिया ताकि अभियान में निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप शत-प्रतिशत उपलब्धि मिल सके। उन्होंने कहा कि लापरवाही बरतने वाले चिकित्सा पदाधिकारी एवं कर्मियों के वेतन पर रोक लगाई जाएगी। पांच दिनी पल्स पोलियो अभियान 26 सितंबर से पांच अक्टूबर तक कार्य दिवस के दिन ही चलेगा। पोलियो कार्यक्रम में टीकाकर्मी के रूप में महिला कार्यकर्ता यथा एएनएम, आशा तथा आंगनबाड़ी सेविका कार्य करती है। विदित हो कि 28 व 29 सितंबर को जितिया पर्व होने के कारण महिला टीकाकर्मी उपवास में रहेंगी। जिसके कारण उक्त दो दिनों का पोलियो का कार्य आगे बढ़ाते हुए 1 एवं 3 अक्टूबर को लगातार कार्य दिवसों में किया जाना है। मौके पर अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विनोद कुमार सिंह, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. सतीश कुमार सिन्हा, उपाधीक्षक डॉ. गिरीश कुमार, डब्लूएचओ के एसएमओ डॉ. सुधानंद आदि उपस्थित रहे। वहीं दूसरी ओर अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मोरदीवा में स्वास्थ्य प्रशिक्षक राजीव रंजन ने भी शिशु को खुराक पिलाई। खुराक पिलाने के लिए लगाया गया 2481 दल

विभाग की ओर से आठ लाख 55 हजार 195 घरों में सात लाख 38 हजार 412 बच्चों को खुराक पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। पोलियो कि खुराक पिलाने का लक्ष्य पूरा करने के लिए जिले में 2481 दल को लगाया गया है। जिसमें घर- घर दल में 2067, ट्रांजिट दल में 233, मोबाइल दल में 100, वन मैन दल में 81 को लगाया गया है। दल को निगरानी करने के लिए 775 सुपरवाइजर, सब डिपो में 141 को तैनात किया गया है। दरअसल, भारत में तो पोलियो के उन्मूलन के दावे किए गए। पिछले कई वर्षों से इस तरह का एक भी मामला सामने नहीं है। डब्लूएचओ की ओर से भी इसके बारे में कहा गया है कि भारत में इसका खतरा कम है । लेकिन, पड़ोसी देशों नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान और भूटान में इसके मामले पूरी तरह से खत्म नहीं हुए है। ऐसे में इस बात की आशंका हमेशा बनी रहती है कि एक बच्चे से संक्रमण किसी भी रूप में भारत आ सकता है। इसलिए समय समय पर पोलियो वैक्सीन बच्चों को दिव्यांगता से बचाने के लिए दिया जाता है।

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