उपमुखिया फरार, गांव के चप्पे-चप्पे पर तैनात है पुलिस

समस्तीपुर। मुफस्सिल थाना के आधारपुर के चकनिजाम गांव की घटना कोई सुनियोजित साजिश नहीं थी

JagranTue, 22 Jun 2021 11:47 PM (IST)
उपमुखिया फरार, गांव के चप्पे-चप्पे पर तैनात है पुलिस

समस्तीपुर। मुफस्सिल थाना के आधारपुर के चकनिजाम गांव की घटना कोई सुनियोजित साजिश नहीं थी। न ही इसमें कोई षडयंत्र ही था। यह सबकुछ उपमुखिया मो. हसनैन की बददिमागी से हुई क्रिया के विपरीत प्रतिक्रिया थी। जिस श्रवण को उपमुखिया ने गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया उस हत्या के प्रतिशोध में तमतमायी भीड़ ने सारी घटना को अंजाम दे डाला। इसके बाद दो और हत्याएं और आगजनी हुई। घटना के दूसरे दिन गांव में सन्नाटा पसरा रहा। तनाव कम करने के लिए गांव और प्रवेश मार्ग पर पुलिस की चौकसी बढ़ा दी गई है। इलाके में तीन जिलों की पुलिस कैंप कर रही है। पुलिस पदाधिकारी व दंडाधिकारी भी प्रतिनियुक्त किए गए हैं। आने जाने वालों पर नजर रखी जा रही है। पुलिस प्रशासन की ओर से दोनों समाज के लोगों के बीच सामंजस्य बिठाने की भी कोशिश जारी है। वहीं आरोपित उपमुखिया आज भी फरार है। इधर, इस मामले में उपमुखिया की गोली का शिकार बने मृत श्रवण के पिता रघुनाथ भगत ने एक प्राथमिकी दर्ज कराई है। वहीं प्रशासन ने बुधवार को आधारपुर पंचायत भवन पर शांति समिति की बैठक बुलाई है।

अपनों के खोने के गम में गमगीन है श्रवण का परिवार मंगलवार को पूरे दिन गांव में सन्नाटा पसरा रहा। लोग घरों से बाहर नहीं निकले। सोमवार को हुई घटना के बाद इलाके में चहल पहल कम हो गई है। पूरा गांव पुलिस छावनी में तब्दील है। घटना के बाद उपमुखिया मो. हसनैन और उसके भाई नूर आलम का मकान खाली पड़ा है। वहां दंडाधिकारी व पुलिस बल तैनात हैं। वहीं मृतक श्रवण कुमार के घर के पास भी पुलिस कैंप कर रही है। उनके घर मातम का माहौल है। उसके दो छोटे-छोटे बच्चे केवल आने-जाने वालों का मुंह टुकुर-टुकुर निहार रहे हैं। पीड़ित परिवार से मिलने कई लोग आए। मृतक के स्वजनों को ढ़ाढस बंधाया, लेकिन अपनों को खोने का दुख उनके आंसू नहीं रुकने दे रहा था। थानाध्यक्ष प्रवीण मिश्रा ने बताया कि आवेदन मिलते ही प्राथमिकी दर्ज कर अग्रेतर कार्रवाई की जाएगी। क्षेत्र में शांति व्यवस्था बहाल करने के लिए पहल की जा रही है। समाचार प्रेषण तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई थी। राजद नेता फैर्जुरहमान फैज व जाप नेता मनीष यादव निरंतर सक्रिय हैं। --------------------------------------------------------

तीन जिलों की पुलिस कर रही कैंप

प्रशासन के द्वारा इलाके में तनाव को देखते हुए तीन जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाए गए हैं। पटना से बीएमपी 10, दरभंगा से बीएमपी 13, मधुबनी और दरभंगा जिला बल के जवान इलाके में कैंप कर रहे हैं। गांव में अलग अलग स्थानों पर छह पोस्ट बनाए गए हैं। जहां दंडाधिकारी व पुलिस बल तैनात हैं। बता दें कि सोमवार को घटना की सूचना पर पहुंचे दरभंगा प्रक्षेत्र के आइजी अजिताभ कुमार ने स्थिति का जायजा लिया। पुलिस पदाधिकारी को कई आवश्यक निर्देश भी दिए थे।

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क्या कसूर था सनौव्वर का

जिस भीड़ ने शिक्षिका सनौव्वर पर हमला किया। जिस भीड़ ने नूर आलम और अनवर पर जानलेवा हमला किया। उनका कसूर सिर्फ यही था कि वे सभी उपमुखिया मो. हसनैन के रिश्तेदार थे। सनौव्वर पत्नी थी तो नूर आलम भाई व अनवर भतीजा। ये लोग उस हत्यारोपित उपमुखिया के षडयंत्र के हिस्सा भी नहीं थे। सभी अपने-अपने घरों में हर रोज की तरह एक नए विहान का इंतजार कर रहे थे। सबसे अहम तो यह कि उन मासूम किशोरियों का क्या कसूर था जो अपनी मां के हाथ सुबह के नाश्ते का इंतजार कर रही थीं। वे तीनों भी उतावली भीड़ का शिकार बनी। सनौव्वर की दो बेटियों का इलाज आज भी समस्तीपुर शहर के एक निजी अस्पताल में इलाज जारी है। वहीं एक बेटी अपने ननिहाल में है। इन घटनाओं पर ऐसे राजनीतिक दलों के नेताओं की चुप्पी छायी रही जो इनके वोट के सौदागर थे।

मैंने क्या बिगाड़ा है, मुझे तो छोड़ दो उपमुखिया की पत्नी सनौव्वर खातून को जब भीड़ अपना शिकार बना रही थी, उस भीड़ को रोकने में शामिल आधारपुर के एक नौजवान ने बताया कि हमलोगों को जब सूचना मिली कि कुछ उपद्रवी उपमुखिया के परिवार को निशाना बना रहे हैं, तो हमलोग उसे बचाने गए थे। पर भीड़ हमपर ही टूट गई थी। उस समय सनौव्वर कह रही थी हमने क्या बिगाड़ा है। हमें क्यों मार रहे हो। हम चलकर कोर्ट में खुद गवाही दे देंगे कि हमारे पति ने ऐसी घटना की है। आप कहें तो हम अपनी सारी संपत्ति श्रवण के दोनों बच्चों के नाम कर देंगे। लेकिन हमें छोड़ दीजिए। पर भीड़ नहीं मानी। उसकी परिणति सनौव्वर की मौत के रूप में सामने आई।

एक साथ तीन परिवार पर खुशियों का ग्रहण

तीन परिवारों की खुशियां एक साथ काल के गाल में समा गई। बेकाबू भीड़ के सामने व्यवस्था बौनी पड़ गई। किसी ने नहीं सोचा था कि मामूली विवाद से उपजे इस खौफनाक मंजर का ऐसा अंत होगा। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में जल जमाव की समस्या थी। श्रवण ने पहल करते हुए स्थानीय लोगों की मदद से ग्रामीण सड़क के एक ओर से दूसरी ओर जलनिकासी का रास्ता बना दिया था। रविवार की देर रात इसी बात को लेकर श्रवण और उपमुखिया के बीच विवाद हुआ। सोमवार सुबह जब श्रवण घर से चाय पीने के लिए बाहर निकाला। इस क्रम में उपमुखिया ने बीच सड़क पर सरेआम गोली मार कर हत्या कर दी।

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