मौसम में बदलाव से किसानों की जेब पर पड़ेगा अतिरिक्त बोझ

मौसम में बदलाव से किसानों की जेब पर पड़ेगा अतिरिक्त बोझ

समस्तीपुर। अचानक मौसम में आए बदलाव ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। तापमान ज्यादा बढ़ने के

JagranMon, 01 Mar 2021 12:24 AM (IST)

समस्तीपुर। अचानक मौसम में आए बदलाव ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। तापमान ज्यादा बढ़ने के कारण सिचाई के बाद भी खेतों से नमी खत्म हो रही है और महंगे पटवन से परेशान किसान की जेब पर अतिरिक्त बोझ भी पड़ने लगा है। क्षेत्र के कई किसानों ने तापमान में बढ़ोतरी से गेहूं सरसों चना मटर आदि फसल पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई है। लोगों की माने तो गेहूं एवं अन्य फसलों के पैदावार में कमी आ सकती है। क्षेत्र के किसानों ने बदलते मौसम में अपनी अलग-अलग राय व्यक्त की है।

बढ़ते तापमान व पछुआ हवा में आम लीची के मंजर सूखने की आशंका

इधर बागवानी से जुड़े किसानों ने मौसम का प्रभाव आम लीची के फसल पर भी पड़ने की आशंका जतायी है। कहा कि तापमान बढ़ते ही छोटे-छोटे कीड़े एवं लाही की संख्या बढ़ जाएगी। इससे बचाव के लिए नियमित रूप से पेड़ों पर छिड़काव करना आवश्यक होगा। क्षेत्र के किसान बढ़ते तापमान से परेशान दिख रहे हैं। अत्यधिक तापमान बढ़ने और पछुआ हवा चलने से आम और लीची के मंजर भी सूखने की आशंका जता रहे हैं। फोटो : 28 एसएएम 21

किसानों की आर्थिक स्थिति ऐसे ही चरमराई है। तापमान बढ़ने के कारण फसल को बचाने के लिए अतिरिक्त पटवन करना अनिवार्य हो गया है। जिससे फसल काटने के लिए खर्चा का बोझ बढ़ गया है।

अशोक कुमार, कलवाड़ा

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फोटो : 28 एसएएम 16

तापमान बढ़ने से फसल बेहतर भी हो सकता है। सामान्य मौसम की तुलना में इस मौसम में पटवन ज्यादा करना होगा। अत्यधिक धूप के कारण पटवन के दो-चार दिन बाद ही खेत की नमी समाप्त हो रही है ।

रामकिशोर यादव, महुली

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फोटो : 28 एसएएम 22

खेतों में वर्षा का पानी काफी दिनों तक लगे रहने के कारण गेहूं की बुआई विलंब से हुई और अभी पछता गेहूं में बाली भी नहीं निकला है। ऐसी परिस्थिति में मौसम में अचानक बदलाव आने से उपज में कमी होने की संभावना प्रबल हो गई है।

कन्हैया राय, भिरहा

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फोटो : 28 एसएएम 19

फसल को बचाने के लिए पटवन अत्यंत आवश्यक है। सरकार की उद्वह सिचाई योजना एवं स्टेट बोरिग की स्थिति चरमराई हुई है। गरीब किसानों के समक्ष महंगा पटवन एक गंभीर समस्या बन कर खड़ी है। बगैर सिचाई के फसल उपजना इस मौसम में संभव नहीं लग रहा।

भरत चौधरी, पवड़ा

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फोटो : 28 एसएएम 17

आम और लीची में कली ही निकलना प्रारंभ हुआ है। इस स्थिति में इतना अत्यधिक तापमान होने से सूखने की आशंका प्रबल हो गई है। हालांकि अभी तक इस कली में बीमारी किसी प्रकार का नजर नहीं आ रहा है। लेकिन पेड़ो पर लाही की संख्या काफी अधिक हो गई है। जो चिता का विषय है

नरेश झा, टेकुना मठ

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फोटो : 28 एसएएम 23

अभी तक आम लीची में पूरा मंजर नहीं आया है पैरों पर पूर्व में छिड़काव किया गया है । लेकिन मर्राते फतिगे व कीड़ों की स्थिति से स्पष्ट है कि अतिरिक्त छिड़काव भी करना होगा। इससे हम किसानों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

अरुण सिंह, मुरादपुर

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फोटो : 28 एसएएम 20

तापमान का मिजाज यदि इसी प्रकार बढ़ता रहा तो आम और लीची को बचाना संभव नहीं लगता है। गरीब किसान महंगे छिड़काव करने के लिए सक्षम नहीं है। कर्ज लेकर ही पूर्व में मंहगे छिड़काव किए गए हैं ।अब पुन: करना संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में फसल को बचा पाना मुश्किल है।

मनोज शर्मा, गोविदपुर

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फोटो : 28 एसएएम 18

किसानों के लिए सरकार की घोषणा जो भी हो लेकिन समय पर समुचित सहायता नहीं मिल पा रहा है। वर्तमान स्थिति में मौसम के मिजाज को देखते हुए किसानों को छिड़काव के लिए अनुदान देना जरूरी है। बगैर अतिरिक्त छिड़काव के आम लीची का फसल आंशिक रूप में भी होना संभव नहीं है।

अखिलेश्वर कुंवर ,सहीयार बोले विज्ञानी : आम और लीची की फसल पर छिड़काव जरूरी

वर्तमान मौसम आम और लीची की फसल के लिए बहुत ही बेहतर है। बशर्ते कि तापमान में और अधिक बढ़ोतरी नहीं हो। पेड़ों में अभी मंजर लगना प्रारंभ ही हुआ है। इसे कीड़ों से बचाने के लिए दो-तीन दिनों के अंदर एमीडाक्लोरोप्रीड एवं कॉपर ऑक्सिक्लोराइड से छिड़काव करना आवश्यक है । गेहूं चना एवं मटर आदि के फसल में अच्छी उपज के लिए खेतों में नमी बनाए रखना जरूरी है।

देवेंद्र प्रसाद सिंह

कृषि वैज्ञानिक

राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय पूसा

इनसेट तापमान में वृद्धि से फसलों को पहुंचा सकता है नुकसान पूसा, संस : उत्तर बिहार में तापमान में हो रही बढ़ोतरी फसलों के लिए नुकसानदेह हो सकती है। किसान अपने खेतों में नमी बनाए रखें। तापमान में वृद्धि एवं पछिया हवा दूध की अवस्था वाले गेहूं को नुकसान पहुंचाएगी। किसान अगर अपने फसलों में दो बार सिचाई कर चुके हैं तो खेत की नमी को देखते हुए उसे पुन: सिचाई करें। उक्त जानकारी कृषि विज्ञान केंद्र बिरौली के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. आरके तिवारी ने दी। बताया कि वर्तमान समय फसलों के लिए नुकसान देह के साथ-साथ फायदेमंद भी है। पछिया हवा चलने के कारण फसलों में लगने वाले कीड़े मकोड़े खासकर लाही का प्रकोप खत्म हो जाएगा। कहा कि किसानों का अनुभव यही बताता है कि ऐसे समय में अगर पछिया हवा चले तो गेहूं के लिए लाभदायक है। लेकिन गेहूं की बुआई समय से होने पर ही इसका लाभ मिलता है। कहा कि मसूर एवं चने में भी फूल आने का समय समाप्त हो चुका है। ऐसे में ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाएगा।

अगले दो दिनों तक होगी तापमान में वृद्धि

डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी डॉ. ए सत्तार का बताना है कि अगले दो दिनों तक तापमान में वृद्धि होगी। उसके बाद आने वाले दिनों में 2 से 4 डिग्री की गिरावट आएगी। पछिया हवा चलने के साथ ही मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। मौसम विज्ञानी का बताना है कि अभी का सामान्य अधिकतम तापमान 27 डिग्री के आसपास एवं न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस रहना चाहिए।

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