रोसड़ा सर्राफा मंडी में अरबों का कारोबार प्रभावित

रोसड़ा सर्राफा मंडी में अरबों का कारोबार प्रभावित

लगातार दो वर्षो से लगन के समय ही लॉकडाउन होने के कारण रोसड़ा के सर्राफा बाजार पर प्रतिकूल असर पड़ा है। कोरोना की मार से मर्माहत व्यवसायियों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है। कोरोना के दोनों दौर में शादी-ब्याह का मुहूर्त भी अपने चरम पर रहा है।

JagranTue, 18 May 2021 11:21 PM (IST)

समस्तीपुर । लगातार दो वर्षो से लगन के समय ही लॉकडाउन होने के कारण रोसड़ा के सर्राफा बाजार पर प्रतिकूल असर पड़ा है। कोरोना की मार से मर्माहत व्यवसायियों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है। कोरोना के दोनों दौर में शादी-ब्याह का मुहूर्त भी अपने चरम पर रहा है। इस दौरान लॉकडाउन होने के कारण सर्राफा बाजार में अरबों का कारोबार प्रभावित होना बताया जाता है। छोटे व्यवसायियों के समक्ष व्यवसाय को स्थापित रखने तक की समस्या उत्पन्न हो गई है। वहीं स्वर्ण कारीगर की स्थिति अब भूखमरी की ओर बताया जा रहा है। अपने-अपने दुकानदार या महाजन से कर्ज लेकर ये कारीगर जीवनयापन करने को मजबूर हैं। बताते चलें कि रोसड़ा का सोना मंडी की राज्य स्तर पर अपनी एक अलग पहचान है। समस्तीपुर जिला के अलावा खगड़िया, बेगूसराय, दरभंगा एवं सहरसा-मधेपुरा तक के लोग यहां से स्वर्ण आभूषण की खरीददारी करते आये हैं। आज भी इन जिलों के लोग, खासकर शादी-ब्याह के मौके पर निश्चित रूप से आभूषण की खरीददारी को रोसड़ा पहुंचते हैं। लेकिन विगत दो वर्षों से लॉकडाउन के कारण अधिकांश लोगों ने तो शादी-ब्याह की तिथि ही बढ़ा दी। वहीं यदि इस परिस्थिति में लगन सम्पन्न हुआ तो, घर के सोना से ही लोगों ने काम चलाया है। व्यवसायियों और कारीगरों की मानें तो यदि यही स्थिति रही तो कई छोटे व्यवसायियों को कारोबार बदलना उनकी मजबूरी होगी। वहीं कारीगरों को भी अपना पारंपरिक कार्य छोड़ जीवनयापन के लिए कुछ और करना होगा।

रोसड़ा में एक सौ से अधिक सोना-चांदी व आभूषण की दुकानें है। राज्य स्तर पर यहां के स्वर्णाभूषण की अपनी पहचान है। सर्राफा बाजार पर लॉकडाउन का प्रतिकूल असर पड़ा है। निर्माण से लेकर व्यापार तक प्रभावित हुआ है। दोनों वर्ष में लॉकडाउन के बीच ही लगन मुहूर्त के साथ-साथ अक्षय तृतीया की भी तिथि आई थी। जो कि सोना व्यवसाय के लिए सर्वोत्तम समय है। विगत लॉकडाउन में गिरे बाजार का ग्राफ माह दिसम्बर से ऊपर होना शुरू हुआ था। अप्रैल मध्य तक अपने चरम पर पहुंच ही रहा था कि लॉकडाउन ने पूरे बाजार को फिर एकबार जमीन पर ले आया। इस दौरान अरबों का कारोबार निश्चित रूप से प्रभावित हुआ है।

- दिलीप कुमार ठाकुर, अध्यक्ष, सर्राफा व्यवसायी संघ, रोसड़ा

लॉकडाउन समाप्त होने के बाद भी सोना मंडी को उबरने में काफी समय लगेगा। इसका मुख्य कारण है आभूषण निर्माण और सोना की बाहर से आपूर्ति में विलम्ब होना। लॉकडाउन के कारण सर्वाधिक प्रभावित इस कारोबार को मंदी से उबरना अब इस वर्ष संभव नहीं हो सकेगा। व्यवसायियों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। इस लॉकडाउन में विगत वर्ष से अधिक बाजार का नुकसान हुआ है। कोरोना संक्रमण के कारण शादी-ब्याह की तिथि आगे बढ़ गई है। कई लोग बगैर जेवरात के ही उस मूल्य की राशि देकर ही बहु एवं बेटियों को विदा कर रहे हैं। निश्चित रूप से यह सर्राफा बाजार के लिए काला दिन की तरह ही है।

- विजय साह, उपाध्यक्ष, सर्राफा व्यवसायी संघ, रोसड़ा

दुकान बंद होने के कारण हम कारीगर के समक्ष रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई है। तीन माह की मुख्य कमाई पर सालों भर परिवार का भरण-पोषण होता है। दुर्भाग्य है कि विगत दो वर्षों से शादी-ब्याह जैसे लगन के तीन माह में ही कोरोना की आफत के कारण लॉकडाउन लग रहा है। इससे कारीगरों के समक्ष रोजी-रोटी के साथ-साथ भूखमरी की स्थिति उत्पन्न होने लगी है।

- अवधेश कुमार ठाकुर, स्वर्ण कारीगर, रोसड़ा

प्रतिदिन मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण होता है। लॉकडाउन में आभूषण निर्माण नहीं होने के कारण आय का साधन बंद हो गया है। अब तक महाजन से ही उधार लेकर परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। यदि इस माह बाद भी व्यवसाय प्रारंभ नहीं हुआ तो भुखमरी तक की समस्या उत्पन्न हो जाएगी।

- वीरो ठाकुर, चांदी कारीगर, रोसड़ा कई दशक पूर्व बंगाल से रोसड़ा आकर सोना के जेवर पर पॉलिस का काम शुरू किया। आज भी अपनी पारंपरिक कार्य से जुड़ा हूं। पूर्व में कभी भी आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ा था। लेकिन इन दो वर्षों से लॉकडाउन की मार ने आर्थिक रूप से कमर तोड़ दी है। पॉलिस का काम करना ही हमारे जीवनयापन का एकमात्र साधन है। जब व्यवसाय ही बंद है, तो स्वत: पॉलिस का काम भी बंद रहना तय है।

- कुर्बान नबी, स्वर्ण कारीगर, रोसड़ा

अपने पूर्वजों की राह पर चल महाराष्ट्र से रोसड़ा आकर सोना गलाने के काम से जुड़ा हुं। करीब दस वर्षों से रोसड़ा में यह कार्य कर रहा हूं और खुशहाल जीवन भी जी रहा था। लेकिन कोरोना की मार ने कहीं का नहीं छोड़ा। विगत वर्ष के लॉकडाउन को तो हमलोग झेल गए। लेकिन इस वर्ष कमाने के वक्त ही फिर लॉकडाउन लगने से काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

- माणिक बम्बइया, स्वर्ण कारीगर, रोसड़ा

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