खुद हैं बदहाल, दूसरों को दे रहे रोजगार

खुद हैं बदहाल, दूसरों को दे रहे रोजगार
Publish Date:Fri, 30 Oct 2020 04:44 PM (IST) Author: Jagran

सहरसा। बदहाल की जिदगी जी रहा है प्रखंड मनरेगा कार्यालय।प्रत्येक वर्ष छह से आठ करोड़ राशि से दूसरों को रोजगार देने वाली यह कार्यालय छोटे से एक कमरे में संचालित हो रही हैं। तेरह वर्षों से संचालित इस कार्यालय की बदकिस्मती यही हैं कि यहां मनरेगाकर्मियों को एक साथ बैठने की जगह तक नहीं है। प्रखंड परिसर स्थित आरटीपीएस कमरे से सटे एक छोटी सी कमरे मे संचालित मनरेगा कर्मियों को सप्ताहिक बैठक करने में काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता हैं। कई कर्मी को बैठक के दौरान घंटों खड़े होना पड़ता है।

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वर्ष 2007 में शुरु हुआ था मनरेगा

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बेरोजगारों को रोजगार मुहैया करा जीवन यापन को सु²ढ़ बनाने के उद्देश्य से सरकार ने मनरेगा योजना चालू कराया। जनहित में चलाये गये इस योजना के माध्यम से सरकार द्वारा लोगों को एक साथ दो-दो लाभ पहुंचाने का प्रयास जारी हैं। बेरोजगारों को रोजगार मुहैया करा उनके जीवन यापन को सु²ढ़ कराती हैं तो वही इस दौरान किये गए कार्य से क्षेत्र का विकास भी होते रहता हैं जबकि अपनों से दूर रह कर रोजगार करने वालों को अपने घर में ही रोजगार मिल जाता हैं।तथा मजदूर पलायन की रोकथाम के लिये भी सार्थक कदम प्रतीत होता हैं।

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एक साथ नहीं हो पाती हैं बैठक

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छोटे से एक कमरे में संचालित मनरेगा कार्यालय की सच्चाई यही हैं कि यहां एक साथ सभी कर्मियों की बैठक तक नहीं हो पाती हैं। मंगलवार को होने वाली सप्ताहिक बैठक में 14 पंचायतों के पंचायत रोजगार सेवक, पंचायत तकनीकी सहायक, कनीय अभियंता, लेखापाल एवं कार्यक्रम पदाधिकारी उपस्थित तो होते हैं मगर पर्याप्त जगह नहीं रहने के कारण बैठक के दौरान कई कर्मी को खड़े रहना पड़ता है जबकि विगत बारह वर्षों से संचालित इस कार्यालय में अबतक चार अधिकारी कार्यभार संभाल चुके हैं बावजूद किसी ने भी पहल करना उचित नहीं समझे।

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भवन के अभाव में एक कमरे में कार्यालय संचालित है।भवन के कारण कर्मियों को हो रहे कठिनाईयो से वरीय पदाधिकारी को अवगत कराया गया हैं। इस दिशा में प्रयास जारी हैं।शीघ्र ही समस्याओं का समाधान कर लिया जाएगा।

पंकज कुमार गिरी

कार्यक्रम पदाधिकारी

मनरेगा सत्तरकटैया।

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