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शौचालयविहीन घरों में निकाह नहीं पढ़ाते मुफ्ती

शौचालयविहीन घरों में निकाह नहीं पढ़ाते मुफ्ती
Publish Date:Mon, 03 Aug 2020 05:32 PM (IST) Author: Jagran

सहरसा। समाज को स्वस्थ और स्वच्छ रखने के लिए नवहट्टा प्रखंड के नवहट्टा पश्चिमी पंचायत निवासी मो मुहीउद्दीन कासमी ने अद्भूत निर्णय लिया है। उनके इस संकल्प में कई बाधाएं भी आई, लेकिन वे अपने संकल्प से पीछे नहीं हटे। परिणाम यह रहा कि अब समाज के लोग उनके निर्णय पर अमल कर रहे हैं।

स्वच्छता अभियान से प्रभावित होकर कोसी के पिछड़े इलाके के मुफ्ती मुहीउद्दीन कासमी ने जिस घर में शौचालय नहीं होगा वहां निकाह नहीं पढ़ाने का सख्त निर्णय लिया। उन्हें लोगों का विरोध भी सहना पड़ा लेकिन वे अपने इरादे से नहीं डिगे। उन्होंने कहा कि इस्लाम में ना केवल शारीरिक स्वच्छता बल्कि मानसिक और आचरण की शुद्धता पर भी जोड़ दिया गया है। कुरान में बाकायदा इसके लिए नियम बनाए गए हैं। खुले में शौच गंदगी के साथ ही स्वच्छ व स्वस्थ समाज के लिए अभिशाप है। लोगों से भी अपील किया कि जिस घर में शौचालय नहीं वहां धार्मिक रिवाज में शामिल न हों। बीडीओ विवेक रंजन ने भी माना कि मुफ्ती के इस निर्णय का असर समाज के लोगों पर पड़ा। जागरूकता आने से लोग शौचालय निर्माण के लिए आगे आए।

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तीन लाख घरों में शौचालय बनाने की थी योजना

सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के तहत जिले में तीन लाख घरों के दो लाख 30 हजार शौचालय बनाने की योजना थी। जिसे पूरा कर लिया गया। अर्थात जिला प्रशासन ने जिले के सभी 151 पंचायत को ओडीएफ घोषित कर दिया है। हालांकि धरातल की सच्चाई इन दावों को खोखला साबित कर रहा है। हर गांव में दर्जनों ऐसे गरीब लोग हैं, जिनका शौचालय अबतक नहीं बना। जिन लोगों का शौचालय अबतक नहीं बना उसके लिए ओडीएफ प्लस के तहत कार्रवाई शुरू हुई है। जिला स्वच्छता कार्डिनकेटर डा. सोनम कुमारी का कहना है कि जिन लोगों को किसी कारणवश शौचालय का लाभ नहीं मिल सका है। उसका सर्वे चल रहा है। इसमें अधिकांश लोग ऐसे हैं, जिन्हें जमीन के अभाव में शौचालय नहीं मिल सका। सर्वे उपरांत इनलोगों के लिए सामुदायिक स्वच्छता परिसर का निर्माण कराया जाएगा। बताया कि इनलोगों को शीघ्र ही यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। कहा कि जिन लोगों ने पूर्व में शौचालय बनाया, उसमें अधिकांश को प्रोत्साहन की राशि भी मिल चुकी है। शेष के भुगतान की प्रक्रिया चल रही है।

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केस स्टडी 1

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इस्लामपुर में मो. सुलेमान के बच्ची की शादी सुपौल जिले के करीहो में तय हुई। शादी की तैयारी के बाद तय तिथि को घर वालों ने निकाह पढ़ाने हेतु मुफ्ती से संपर्क किया। उन्होंने शौचालय के बारे में पूछा। शौचालय नहीं होने की जानकारी मिली तो निकाह पढ़ाने से इंकार कर दिया।

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केस स्टडी 2

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नवहट्टा पूर्वी पंचायत के बड़गांव पट्टी में मो. अरबाज की भगिनी की शादी धरहरा में तय हुई। शौचालय विहीन घर में निकाह पढ़ाने से इंकार पर मुफ्ती को लोगों के ताने भी सुनने पड़े। कहा गया गरीब लोग कहां से शौचालय बनवाएंगे। शादी की तिथि टालनी पड़ी। शौचालय निर्माण बाद निकाह पढ़ाने पहुंचे तो ग्रामीणों ने भी पहल की सराहना की।

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400 शादी करा चुके हैं मुफ्ती

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मौलना कासमी अब तक 8 वर्षों में चार सौ से अधिक शादी में निकाह पढ़ा चुके हैं। अरबीक यूनिवर्सिटी दारुल उलूम देवबंद सहारनपुर से डिग्री लेने के बाद आठ वर्षों से फतवा नवीसी का काम कर रहे हैं। नवसृजित प्राथमिक विद्यालय बालुटोला में प्रधान शिक्षक भी हैं।

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इस्लाम में स्वच्छता

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मुफ्ती ने कहा कि कुरान और हदीस की रोशनी में धर्मगुरुओं और समाज द्वारा तय किए गए नियमों को शरीयत के मसले कहते हैं। इस मसले में पाकी•ागी व पवित्रता पर जोड़ दिया गया है। पैगंबर इस्लाम फरमाते हैं कि अल्लाह स्वच्छता को पसंद करते हैं और गंदगी से घृणा करते हैं। मदस्सिर में लिखा है ऐ पैगंबर अपने लिबास को पाक रखें कसाफत से दूर रहें । उन्होंने कहा कि अल्लाह ने आसमान से पानी नाजिल किया ताकि तुम उससे तहारत हासिल करो।

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