बाजारों में नोटबंदी का असर अब भी कायम

जिले में नोटबंदी का असर अबतक बरकरार है। कोइ ऐसा रोजगार नहीं है जो नोटबंदी से प्रभावित न हो। कई व्यवसाय ऐसा है जहां अबतक बोहनी तक नहीं हो पा रही है।

Publish Date:Fri, 23 Dec 2016 03:04 AM (IST) Author:

नवादा। जिले में नोटबंदी का असर अबतक बरकरार है। कोइ ऐसा रोजगार नहीं है जो नोटबंदी से प्रभावित न हो। कई व्यवसाय ऐसा है जहां अबतक बोहनी तक नहीं हो पा रही है। खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स,मोबाइल,ऑटो मोबाइल के साथ हार्डवेयर का धंधा अब भी मंदा है। जिले के प्रमुख बाजारों में सन्नाटा छाया है। नगर पुरानी बाजार के कपड़ा मंडी का हाल बेहाल है। बाजार में बिक्री मात्र 20 से 30 प्रतिशत तक रह गई है। दुकानदारों की मानें तो लग्न समाप्ति के बाद दिनभर इंतजार के बाद भी ग्राहकों के दर्शन नहीं हो पा रहे है।

नोटबंदी से सबसे ज्यादा प्रभावित इलोक्ट्रॉनिक्स बाजार हुआ है। टीवी,फ्रीज,वा¨शग मशीन से लेकर गीजर,हीटर सभी की बिक्री लगभग 10 से 15 प्रतिशत तक रह गई है। नोटबंदी का असर मोबाइल कारोबार पर भी पड़ा है। बड़ी-बड़ी मोबाइल कम्पनियां अपना प्रोडक्ट बेचने में हाफ रही है। कारण स्पष्ट है पैसे का अभाव। सैमसंग जैसे नम्बर वन मोबाइल कम्पनी के कारोबार में काफी गिरावट आई है। इसके साथ ही ओपो, जीयोनी, लायफ, इंटेक्स, माइक्रामैक्स,लावा, भीगो जैसी मोबाइल कम्पनियों का तो और भी बुरा हाल है। मोबाइल की बिक्री 25 प्रतिशत तक सिमट कर रह गई है। कुछ एक खरीदार बाजार में आते भी हैं तो वे कम पैसे का मोबाइल खरीदने में ही अपनी भलाई समझते हैं। अधिक कीमत का मोबाइल पैसे के अभाव में चाहकर भी नहीं खरीद पाते हैं।

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स्वैप मशीन की सुविधा खास दुकानों में

- नगर के खास-खास दुकानों में स्वैप मशीन की सुविधा उपलब्ध हो सकी है। वाहन व्यवसाय से जुड़े मात्र दो एजेंसियों में ही स्वैप मशीन की सुविधा है। इसके साथ सागरमल एंड सन्स से जुड़े कई कपड़ा व रेडीमेड दुकानों में स्वैप मशीन की सुविधा है, जहां संपन्न लोग खरीदारी कर रहे हैं। वैसे संपन्न लोगों को भी असुविधाएं हो रही है उन्हें खरीदारी के लिये स्वयं दुकानों पर आने को मजबूर होना पड़ रहा है। जो चेक के माध्यम से सामानों की खरीदारी करना चाहते हैं उन्हें जान पहचान न होने के कारण वापस लौटना पड़ रहा है। इस प्रकार की स्थिति सिर्फ दुकानों व शो रूमों की नहीं बल्कि फुटपाथियों की भी है। फुटपाथ पर दुकानें सजती प्रतिदिन है लेकिन ग्राहक नदारद। जाड़े के इस मौसम में फुटपाथों पर गर्म कपड़ों की बिक्री परवान पर रहता था जहां सन्नाटा का आलम है।

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रेडीमेड व्यवसाय भी प्रभावित

- रेडीमेड व्यवसाय भी बुरी तरह प्रभावित है। कड़ाके की ठंड व कनकनी के बावतूद रेडीमेड व हॉजरी की दुकानों में सन्नाटा है। इसके पूर्व हल्की ठंड पड़ते ही रेडीमेड व हॉजरी की दुकानों में खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती थी। नोटबंदी के लगभग डेढ़ माह व्यतीत होने को हैं और व्यवसाय चौपट है। हालांकि व्यवसायी कैशलेस की राह चलना चाहते हैं लेकिन बैंकों द्वारा अबतक रूची नहीं लिए जाने तथा तरह तरह के कागजातों की मांग से वे परेशान हैं। ऐसे में सरकार जो भी चाहे कैशलेस भुगतान फिलहाल संभव नहीं है।

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