सासाराम नगर निगम के प्रभारी आयुक्त बने डीडीसी शेखर आनंद

डीडीसी शेखर आनंद को सासाराम नगर निगम का नया प्रभारी नगर आयुक्त बनाया गया है। डीएम धर्मेन्द्र कुमार ने आय से अधिक करोड़ों की संपत्ति मिलने पर निवर्तमान प्रभारी नगर आयुक्त राजेश कुमार गुप्ता को तत्काल प्रभार सौंपने का निर्देश दिया है।

JagranMon, 29 Nov 2021 11:43 PM (IST)
सासाराम नगर निगम के प्रभारी आयुक्त बने डीडीसी शेखर आनंद

जागरण संवाददाता,सासाराम:रोहतास। डीडीसी शेखर आनंद को सासाराम नगर निगम का नया प्रभारी नगर आयुक्त बनाया गया है। डीएम धर्मेन्द्र कुमार ने आय से अधिक करोड़ों की संपत्ति मिलने पर निवर्तमान प्रभारी नगर आयुक्त राजेश कुमार गुप्ता को तत्काल प्रभार सौंपने का निर्देश दिया है।

नगर निगम के प्रशासक सह डीएम ने भारतीय प्रशासनिक संवर्ग के अधिकारी व डीडीसी शेखर आनंद को अपने कार्य के अतिरिक्त नगर आयुक्त सासाराम के सभी कार्यों का निष्पादन के लिए अधिकृत कर दिया है। राजेश कुमार गुप्ता जिला भू अर्जन पदाधिकारी को सासाराम नगर निगम का संपूर्ण प्रभार डीडीसी को तत्काल सौंप देने के लिए कहा है। डीएम ने बताया कि दो दिन पूर्व प्रभारी नगर आयुक्त सह जिला भू अर्जन पदाधिकारी राजेश कुमार गुप्ता के आवास तथा कार्यालय में निगरानी की टीम ने छापेमारी की थी। जिसके बाद ही राजेश गुप्ता को नगर परिषद के प्रभार से तत्काल हटा दिया गया। आय से अधिक मामले में निगरानी विभाग की छापेमारी के बाद अब भू-अर्जन विभाग द्वारा विभागीय कार्रवाई का इंतजार है। ज्ञात हो कि राजेश गुप्ता के कई ठिकानों पर छापेमारी में करोड़ों की चल-अचल संपत्ति का खुलासा हुआ है। छापेमारी के बाद जिला प्रशासन में भी हड़कंप की स्थिति रही, क्योंकि राजेश गुप्ता सासाराम में न सिर्फ भू -अर्जन पदाधिकारी के रूप में तैनात हैं, बल्कि अपने तीन साल के कार्यकाल में स्थापना प्रशाखा के वरीय उप समाहर्ता के अलावा नोखा प्रखंड के वरीय प्रभारी भी रहे चुके हैं। जुलाई में बने थे नगर निगम आयुक्त:

राजेश गुप्ता गत जुलाई के प्रथम सप्ताह में नगर निगम आयुक्त बने थे। लगभग साढ़े चार माह का इनका कार्यकाल में शहर के भयंकर जलजमाव की समस्या से जुझना पड़ा था। शहर के न्यू एरिया, पंचशीेल कालोनी, समाहरणालय और उसके आसपास के इलाके कई दिनों तक जलमग्न रहे थे। सूत्र बताते हैं कि निवर्तमान नगर आयुक्त के कार्यशैली से कर्मचारी से ले आम आदमी तक खुश नहीं था। नक्शा पास कराना भी टेढ़ी खीर साबित हो रहा था। अतिक्रमण के नाम पर कुछ बड़े भवनों को भी इनके द्वारा नोटिस भी किया गया था, परंतु कार्रवाई का परिणाम सिफर रहा।

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