किशोरियों के स्वास्थ्य जांच के लिए आइसीडीएस व स्वास्थ्य विभाग चला रहा है संयुक्त अभियान

पूर्णिया। संतुलित आहार और नियमित चेकअप से एनिमिया रोग से बचाया जा सकता है। एनिमिया से बचाव

JagranMon, 18 Oct 2021 08:33 PM (IST)
किशोरियों के स्वास्थ्य जांच के लिए आइसीडीएस व स्वास्थ्य विभाग चला रहा है संयुक्त अभियान

पूर्णिया। संतुलित आहार और नियमित चेकअप से एनिमिया रोग से बचाया जा सकता है। एनिमिया से बचाव के लिए समेकित बाल विकास परियोजना के अंतर्गत किशोरियों में एनीमिया से बचाव के लिए अभियान चलाया जा रहा है। स्कूल के साथ समुदाय स्तर पर चल रहा है। विद्यालय में छात्राओं का गठित मेडिकल टीम हेल्थ चेकअप भी करती है और उन्हें स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की भी सलाह देती है। मेडिकल टीम स्कूल टू स्कूल भ्रमण कर छात्राओं का हेल्थ चेकअप के साथ आयरन की दवा दी जाती है। महिलाओं को एनीमिया रोग से बचाने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है। हरी पत्तेदार सब्जी खाने की सलाह दी जाती है। समुचित पोषण से एनीमिया रोग से किशोरावस्था में ही बचाव संभव है। गर्भवती माता का सुरक्षित प्रसव हो यह सुनिश्चित करने के लिए किशोरावस्था स्वस्थ होना आवश्यक है।

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प्रसव के बाद समुचित देखभाल आवश्यक

2030 तक मातृ मृत्यु दर को न्यून करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए किशोरावस्था में एनीमिया की रोकथाम आवश्यक है। गर्भावस्था से लेकर प्रसव के 42 दिनों के अंदर महिलाओं की मृत्यु से संबंधित विभिन्न तरह के आंकड़ों के साथ विस्तृत जानकारी संकलन किया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं के मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए आंगनबाड़ी सेविकाओं के सहयोग लिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग आईसीडीएस, जीविका और डवलपमेंट साझीदार के सहयोग से मातृ मृत्यु दर में कमी लाने का प्रयास कर रहा है। किशोरियों के स्वास्थ्य के साथ गर्भवती महिलाओं को नियमित एएनसी जांच के लिए आंगनबाड़ी सेविका की मदद ली जा रही है। गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच यानी एएनसी चेकअप नियमित करने पर बल दिया जा रहा है। गर्भावस्था के दौरान कम से कम चार बार एएनसी आवश्यक है। राष्ट्रीय पोषण अभियान की जिला समन्वयक निधि प्रिया ने बताया कि गर्भवती महिलाओं के प्रसव दौरान सामुदायिक स्तर पर स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधा उपलब्ध है। प्रसव पूर्व गर्भवती महिलाओं का ब्लडप्रेशर, नब्ज, तापमान, हीमोग्लोबिन, मलमूत्र में ग्लूकोज की मात्रा और गर्भस्थ शिशु के हृदय गति की जांच की जाती है। नवजात शिशु पूरी तरह से स्वस्थ व सुरक्षित रहे। प्रसव के दौरान गर्भवती महिलाओं को दवा, काटन या पैड्स की व्यवस्था पहले से उपलब्ध रहती है। प्रसव के समय और उससे पूर्व स्वास्थ्य केंद्रों की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए बुनियादी स्तर पर हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है।

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