आउटसोर्सिग के नाम पर पीयू में हो रहा है राशि का गबन

आउटसोर्सिग के नाम पर पीयू में हो रहा है राशि का गबन

पूर्णिया पूर्णिया विश्वविद्यालय बनाओ संघर्ष समिति के संस्थापक एवं राजद के जिला प्रवक्ता आलोक राज

JagranFri, 07 May 2021 09:21 PM (IST)

पूर्णिया: पूर्णिया विश्वविद्यालय बनाओ संघर्ष समिति के संस्थापक एवं राजद के जिला प्रवक्ता आलोक राज ने कहा है कि पीयू एक बार फिर से विवादों के घेरे में आ गया है। विवि के पूर्व कुलपति एवं विश्वविद्यालय प्रशासन के बारे में जो बातें समाचार पत्रों एवं इंटरनेट मीडिया में आ रही है, उससे विवि की छवि धूमिल हो रही है। नवसृजित विवि के शैशव अवस्था में ही कुछ लोगों ने अपने निजी स्वार्थ के लिए इसकी छवि को गलत कार्य करके धूमिल करने का जो काम किया है, उसकी जितनी भी निदा की जाए वह कम है। विश्वविद्यालय प्रशासन इसकी सही तरीके से जांच करे तो इससे भी बड़ा खुलासा होगा। विवि प्रशासन ने सभी नियम-कानून को ताक पर रखकर पहले लोगों को संविदा पर रखा। जब शिक्षा विभाग से विवि को संविद पर नहीं रखने का पत्र प्राप्त हुआ तो उन्हीं लोगों को आउटसोर्सिंग के माध्यम से रख लिया गया। जबकि आउटसोर्सिंग का प्रावधान ही अलग है। विवि को कितने लोगों को आउटसोर्सिंग से रखने के लिए राज्य सरकार एवं राज्य भवन से अनुमोदन प्राप्त है, यह पत्र विवि को जारी करना चाहिए। बड़ी संख्या में लोगों को आउटसोर्सिंग के माध्यम से दिखाकर राशि की लूट की जा रही है। कई ऐसे लोग हैं जो आउटसोर्सिंग के माध्यम से भुगतान ले रहे हैं एवं उनके द्वारा किसी प्रकार का कोई कार्य नहीं किया जा रहा है। आउटसोर्सिंग एजेंसी का चयन भी सवालों के घेरे में है। आश्चर्य की बात यह है कि आउटसोर्सिंग की एजेंसी तो बदल जाती है लेकिन व्यक्ति नहीं बदलता। इससे साफ जाहिर है कि अपने चहेते आउटसोर्सिंग एजेंसी को विवि में रखा जाता है, जिसके माध्यम से विवि अपने लोगों को रखकर कार्य कराती है। सिर्फ भुगतान का माध्यम आउटसोर्सिंग एजेंसियां होती है। यह बहुत बड़ा खेल है और बड़े पैमाने पर राशि का गबन प्रत्येक माह हो रही है।

वर्तमान विवि प्रशासन को भुगतान से पहले यह जांच करनी चाहिए थी कि आउटसोर्सिंग को जो भुगतान हो रहा है वह सही है या गलत। आउटसोर्सिंग का चयन सही है या गलत। बिना जांच पड़ताल के वर्तमान विवि प्रशासन को भुगतान नहीं करना चाहिए। जबकि पूर्व कुलपति के सभी कारनामों से वर्तमान विवि प्रशासन अवगत थी। ऐसे मौके पर विवि प्रशासन का मौन हो जाना सवालों के घेरे में है। पूर्व कुलपति के समय में कई धांधली की गई है, नियम के विरूद्ध नियुक्तियां की गई है। ऐसे लोगों को आज भी विवि से भुगतान हो रहा है।

राज्य सरकार को चाहिए कि हाई कोर्ट की निगरानी में या फिर एसआईटी, सीआईडी या सीबीआई से पीयू के अब तक के कार्यकाल की जांच करानी चाहिए। यह विवि सीमांचल के लोगों के लिए गर्व की बात है, लेकिन जिस तरह से बदनामी हो रही है, इससे तो लगता है यह विवि सीमांचल के लोगों के लिए अभिशाप बन गया है। जांच होगी तो दुलारी देवी जैसे कई मामलों का उजागर होगा। जिला प्रशासन को विश्वविद्यालय में हुए अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की भी जांच करनी चाहिए। पूर्व कुलपति के द्वारा जो गलतियां की गई थी उसे वर्तमान विश्वविद्यालय प्रशासन को नहीं दोहराना चाहिए बल्कि उसको उजागर करना चाहिए।

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