बिहार के प्रखंडों, पंचायतों व गांवों में जदयू की संगठन इकाई होगी गठित, जिलाध्यक्षों को मिला टास्क

प्रखंडों पंचायतों एवं गांवों में जदयू की संगठन इकाई अस्तित्व में आ जाएगी। ये काम एक महीने में होगा। अपने सभी जिलाध्यक्षों को जदयू ने यह टास्क दिया है। पार्टी की मजबूती के संकल्प के साथ जदयू की दो दिवसीय प्रमंडलीय समीक्षा बैठक रविवार को संपन्न हो गई।

Akshay PandeySun, 19 Sep 2021 09:23 PM (IST)
जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह। जागरण आर्काइव।

राज्य ब्यूरो, पटना : एक माह के भीतर सभी प्रखंडों, पंचायतों एवं गांवों में जदयू की संगठन इकाई अस्तित्व में आ जाएगी। अपने सभी जिलाध्यक्षों को जदयू ने यह टास्क दिया है। पार्टी की मजबूती के संकल्प के साथ जदयू की दो दिवसीय प्रमंडलीय समीक्षा बैठक रविवार को संपन्न हो गई। 

जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह प्रमंडलीय समीक्षा बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। उन्होंने बताया कि पार्टी के जिलाध्यक्षों को संपूर्ण जिले में पार्टी का विस्तार गांव-गांव तक कर संगठन को स्थापित करने की जिम्मेवारी दी गई है। इस दिशा में सभी जिलाध्यक्षों ने काम भी शुरू किया है। रविवार को हुई बैठक में 38 विधायक व पार्टी के पूर्व प्रत्याशी मौजूद थे। सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, भागलपुर, बांका, खगडिय़ा, मुंगेर, लखीसराय, शेखपुरा, जमुई, बेगूसराय, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, अररिया, नवादा, औरंगाबाद, गया, जहानाबाद और अरवल जिले से आए विधायकों ने समीक्षा बैठक में हिस्सा लिया।

हर गांव से मांगी गई दस लोगों की सूची

जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने इस मौके पर कहा कि सभी प्रखंड, पंचायत व गांव में जो संगठन बनेंगे उनसे जुड़े लोगों के नाम, पता व मोबाइल नंबर भी प्रदेश मुख्यालय को उपलब्ध कराया जाए। प्रत्येक गांव से कम से कम दस लोगों की सूची मांगी गई है। समीक्षा बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय सचिव रवींद्र प्रसाद सिंह, मुख्यालय प्रभारी व प्रदेश उपाध्यक्ष डा. नवीन कुमार आर्य, प्रदेश महासचिव मृत्युंजय कुमार सिंह, सचिव मनीष कुमार सिंह व वासुदेव कुशवाहा भी मौजूद थे। बता दें कि जदयू की नजर अब बिहार के बाहर भी है। पार्टी अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी भूमिका मजबूत कर रही है। इसको लेकर आने वाले समय में यूपी और अन्य राज्यों में चुनाव लड़ने की तैयारी की जा रही है। जदयू साफ कर चुका है कि यूपी में वह बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगा। अगर गठबंधन नहीं हो पाता है तो पार्टी अकेले भी हाथ आजमा सकती है। 

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