पश्चिम बंगाल की सीएम ममता की विपक्षी एकता मुहिम से भाजपा पर नहीं पड़ेगा फर्क: सुशील मोदी

सुशील मोदी ने कहा है कि ममता बनर्जी पहले से बने यूपीए को खारिज कर विपक्ष का नया मोर्चा बनाने में कितना सफल होंगी यह तो समय बताएगा लेकिन इससे सबको साथ लेकर चलने वाली भाजपा की लोकप्रियता और चुनावी सफलता पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

Akshay PandeyFri, 03 Dec 2021 05:30 PM (IST)
बिहार को पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी। जागरण आर्काइव।

राज्य ब्यूरो, पटना: राज्यसभा सदस्य सुशील मोदी ने गुरुवार को जारी बयान में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी पर कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा है कि ममता बनर्जी पहले से बने यूपीए को खारिज कर विपक्ष का नया मोर्चा बनाने में कितना सफल होंगी, यह तो समय बताएगा, लेकिन इससे सबको साथ लेकर चलने वाली भाजपा की लोकप्रियता और चुनावी सफलता पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। सुशील मोदी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी ने अघोषित तौर पर कांग्रेस और वामदलों के साथ मिल कर चुनाव लड़ा, तो भाजपा वहां मात्र तीन विधायकों से बढ़ कर 77 विधायकों की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई। लालू प्रसाद को ममता बनर्जी का समर्थन प्राप्त होने के बावजूद 2019 के संसदीय चुनाव में राजद जीरो पर आउट हुआ। अब ममता बनर्जी क्षेत्रीय दलों के परिवारवादी जोड़ से भाजपा को चुनौती नहीं दे पाएंगी। उन्होंने कहा कि संसद सत्र के समय लंबी छुट्टी मनाने विदेश जाने वाले राहुल गांधी की शौकिया सियासत के बारे में ममता बनर्जी का आकलन गलत नहीं है।

सरकार को बदनाम न करें अधिकारी: राजीव रंजन 

भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव रंजन ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि लोकतंत्र में जनता मालिक होती है और निर्वाचित जनप्रतिनिधि उनके नुमाइंदे। उन्होंने विधानसभा गेट पर श्रम संसाधन मंत्री जीवेश कुमार को पुलिस द्वारा रोककर डीएम-एसएसपी की गाड़ी को पास दिए जाने पर सख्त नाराजगी जताई है। राजीव रंजन ने कहा कि जनप्रतिनिधियों का सम्मान जनता का सम्मान होता है और उनका अपमान जनता का अपमान, लेकिन बिहार के कुछ अफ़सर शायद इस बात को भूल चुके हैं। इन अधिकारियों को अपने दायरे को समझना ही होगा, नहीं तो जनप्रतिनिधियों को भी अपना विशेषाधिकार प्रयोग में लाना आता है। उन्होंने कहा कि कौन नहीं जानता है कि राजद के राज में अफसरों के साथ कैसा व्यवहार होता था। एनडीए सरकार में सबको सम्मान और काम करने की आजादी मिली, लेकिन बिहार में कुछ अफसरों ने इस आजादी का गलत अर्थ लगा लिया है और खुद को विधायकों और मंत्रीगणों से भी ऊपर समझने लगे 

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