गंगा के पानी से घूमेगा बक्सर ताप बिजली घर का टरबाइन, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू

बक्सर बिजली संयंत्र परियोजना का निर्माण कार्य तेजी से हो रहा है। दूसरी ओर प्लांट के लिए आधारभूत ढांचे के निर्माण में भी तेजी आई है। परियोजना क्षेत्र में चिमनी और टरबाइन को स्थापित करने का काम प्रारंभ हो गया है।

Akshay PandeyMon, 02 Aug 2021 05:20 PM (IST)
बक्सर बिजली संयंत्र परियोजना में निर्माण किया जा रहा टरबाइन।

मो.मोइन, चौसा (बक्सर) : चौसा में लगभग 11 हजार करोड़ की लागत से बन रही 1320 मेगावाट की बक्सर बिजली संयंत्र परियोजना का निर्माण कार्य तेजी से हो रहा है। दूसरी ओर प्लांट के लिए आधारभूत ढांचे के निर्माण में भी तेजी आई है। परियोजना क्षेत्र में चिमनी और टरबाइन को स्थापित करने का काम प्रारंभ हो गया है, वहीं  बिजली उत्पादन करने वाली टरबाइन का निर्माण तेज गति से किया जा रहा है। टरबाइन को घुमाने और बिजली पैदा करने के लिए गंगा के पानी का इस्तेमाल होगा। हालांकि, जिस टरबाइन से बिजली उत्पादित होगी उसके लिए पानी की जरूरत गंगा नदी से पूरी की जाएगी। प्लांट तक गंगा का पानी पहुंचाने के लिए महादेवा घाट के पास से प्लांट तक करीब पांच किलोमीटर पाइप लाइन बिछाई जाएगी।

पाइप लाइन बिछाने हेतु सर्वे कर भूमि खरीद व अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रशासन द्वारा शुरू कर दी गई है। पाइप लाइन, मेन गेट और रेलवे कारिडोर के लिए कुल 78.399 एकड़ भूमि चिह्नित की गई है, जिसपर पाइप लाइन बिछाई जाएगी। प्लांट से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अधिकारियों ने बताया कि वाटर पाइप लाइन बिछाने, मेन गेट व रेल कारिडोर के लिए कुल दस गांव के ग्यारह मौजे की जमीन का मुआवजा देकर अधिग्रहण किया जाएगा। वर्ष 2023 तक 660 मेगावाट के एक यूनिट से बिजली का उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य तय किया गया है। पाइप लाइन बिछाने के लिए बेचनपुरवा, अखौरीपुर गोला, कनक नारायणपुर, न्यायीपुर, धर्मागतपुर, चौसा, बहादुरपुर, सिकरौल की एक व दो मौजा, बनारपुर व मोहनपुरवा मौजा की भूमि का अधिग्रहण होना है। अधिग्रहण की जद में कुल 228 किसानों की जमीन आ रही है। इस भूमि पर वाटर कॉरिडोर 45.832 एकड़, सिकरौल के दोनों मौजों के कुल 22.584 एकड़ में रेल कारीडोर का बल्ब भाग, पौने चार एकड़ मोहनपुरवा मौजा की भूमि पर मेन गेट का निर्माण होना है। इसके बाद कच्चे माल व कोयला ले जाने के लिए रेल कारिडोर का भी निर्माण किया जाएगा। इसके लिए अलग से भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

डोम राजा की भूमि आएगी पावर प्लांट के काम

बिजली संयंत्र योजना के लिए भूमि अधिग्रहण में कई बड़े व छोटे भू-मालिक की भूमि खरीद की गई है, इस बड़ी परियोजना में चौसा के डोम राजा की भूमि भी काम आ रही है। दरअसल चौसा के तड़पन डोम गांव के डोम राजा थे। वे मोक्षधाम पर अंतिम संस्कार में मुखाग्नि देने का कार्य करते थे। किसी ने उन्हें साढ़े चार डिसमिल कृषि योग्य भूमि दान में दे दी थी। पावर प्लांट के लिए बिछाने वाली पाइप लाइन उसी भूमि से होकर गुजरेगी। अब तड़पन डोम इस दुनिया मे नही हैं लेकिन उनके इकलौते वारिस को अधिग्रहण की सूची में शामिल किया गया है। 

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