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कंकड़बाग में हो रही थी रेमडेसिविर की कालाबाजारी, तीन गिरफ्तार

कंकड़बाग में हो रही थी रेमडेसिविर की कालाबाजारी, तीन गिरफ्तार

कोरोना वायरस की दूसरी लहर में एक तरफ जीवन को बचाने की जिद्दोजहद है तो दूसरी ओर लोग आवश्यक दवाओं की कालाबाजारी से भी नहीं चूक रहे हैं।

JagranSun, 09 May 2021 01:37 AM (IST)

पटना। कोरोना वायरस की दूसरी लहर में एक तरफ जीवन को बचाने की जिद्दोजहद है तो दूसरी ओर रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वालों का गिरोह भी सक्रिय है।

आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की टीम ने रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने वाले एक ऐसे ही गिरोह का पर्दाफाश किया है। ईओयू की टीम ने कंकड़बाग में इंजेक्शन बेचने वाले गिरोह के तीन लोगों को दबोच लिया। उनके पास से तीन पैक और दो खाली इंजेक्शन बरामद किए गए।

तीनों की पहचान कंकड़बाग के चांदमारी रोड नंबर आठ निवासी अमित कुमार, अशोक नगर रोड नंबर एक सी निवासी नीतिश कुमार और कंकड़बाग के चांदमारी रोड नंबर आठ निवासी भास्कर पाठक के रूप में हुई है।

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फार्मा कंपनी का सेल्स अधिकारी भी धंधे में शामिल :

पूछताछ में पता चला कि नीतिश कुमार एक फार्मा कंपनी का सेल्स अधिकारी है, जबकि भास्कर एक निजी कंपनी में एचआर का काम करता है। सूत्रों की मानें तो पकड़े गए लोगों ने शशि नाम के एक युवक के बारे में बताया है। वह उनलोगों को इंजेक्शन मुहैया कराता था। वह इस गिरोह का मास्टरमाइंड है। उसका संपर्क कंकड़बाग में ही संचालित एक अन्य निजी हॉस्पिटल से है।

ईओयू को आशंका है कि मास्टरमांड को उसी हॉस्पिटल से इंजेक्शन मिल रहा था। इसके बाद रात करीब नौ बजे ईओयू की टीम उस निजी अस्पताल में छापेमारी को पहुंच गई। साथ में डीएसपी, पुलिस और औषधि विभाग की टीम भी थी। देर रात तक टीम अस्पताल के स्टाक की जांच में जुटी रही।

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70 हजार रुपये में बेच रहे थे एक इंजेक्शन :

ईओयू को सूचना मिली कि कंकड़बाग में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वाला एक गिरोह सक्रिय है। टीम ने दो दिनों तक उस इलाके की रेकी की। उसे शनिवार की दोपहर एक दलाल का मोबाइल नंबर मिला। टीम ने ग्राहक बनकर इंजेक्शन दिलाने की मांग की। दलाल ने शाम चार बजे इंजेक्शन उपलब्ध कराने की बात कही। एक इंजेक्शन के बदले 70 हजार रुपये की डिमांड की गई। 50 हजार रुपये पर बात बनी। फिर दलाल से दो इंजेक्शन की मांग की गई। शाम के चार बजे दो बाइक पर सवार तीनों दलाल पहुंच गए। ईओयू की टीम ग्राहक बनकर तय ठिकाने पर खड़ी थी। पहले इंजेक्शन दिखाने की बात हुई। जैसे ही तीनों ने बाइक की डिक्की से दोनों इंजेक्शन निकालकर ईओयू को दिखाया, टीम ने तीनों को वहीं दबोच लिया। थोड़ी देर में कंकड़बाग थाने की पुलिस भी पहुंच गई। पूछताछ में यह भी बात सामने आ रही है कि मास्टरमाइंड एक निजी अस्पताल का मालिक भी है।

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दो दर्जन से अधिक लोगों को बेच चुके थे इंजेक्शन

पूछताछ में यह बातें भी सामने आई कि तीनों के अलावा चार और भी इस गिरोह में शामिल हैं। तीनों कंकड़बाग में कई अन्य निजी अस्पताल के संपर्क में थे, जहां कोरोना संक्रमित मरीज भर्ती थे। वे जरूरतमंद से संपर्क करते थे और उन्हें 50 से 70 हजार रुपये में एक इंजेक्शन बेच देते थे। अब तक यह गिरोह दो दर्जन से अधिक लोगों को इंजेक्शन बेच चुका है।

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बैंक अकाउंट और मोबाइल का डिटेल खंगाल रही पुलिस

तीनों के पास से बरामद मोबाइल को पुलिस ने जब्त कर लिया है। देर रात इनके मोबाइल की वाट्सएप चैटिंग और संदिग्ध नंबरों की जांच की जा रही थी। इनके संपर्क में और कितने लोग थे इसकी जानकारी भी जुटाई जा रही है। कॉल डिटेल भी खंगाली जा रही है। ईओयू तीनों के बैंक अकाउंट की भी जांच करेगी।

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ऑक्सीजन, जीवन रक्षक दवा और रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वाले बच नहीं पाएंगे। इस मामले में कार्रवाई अभी जारी है। एक निजी अस्पताल का भी नाम सामने आया है। टीम वहां पहुंचकर जांच में जुटी है।

नैयर हसनैन खान

एडीजी, ईओयू

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