बिहार के आंगनबाड़ी केंद्रों का हाल बता देगा ये ऐप, पता चलेगा कब आते-जाते हैं बच्चे

बिहार में अब एक ऐप बता देगा कि आंगनबाड़ी केंद्र पर कितने बच्चे आए और कितनी देर मौजूद रहे। राज्य के आंगनबाड़ी केंद्रों की मानीटरिंग के लिए जल्द ही पूरे प्रदेश में नई तकनीक का इंतजाम किया गया है।

Akshay PandeySun, 28 Nov 2021 05:14 PM (IST)
बिहार के आंगनबाड़ी केद्रों का हाल ऐप पर दिखेगा। सांकेतिक तस्वीर।

राज्य ब्यूरो, पटना। आंगनबाड़ी केंद्र पर एक दिन में कितने बच्चे आए इसकी मानीटरिंग के लिए अब सूूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) की मदद ली जाएगी। समाज कल्याण विभाग एक ऐसा ऐप तैयार कर रहा है। इससे हर दिन यह जानकारी मिलेगी कि किसी आंगनबाड़ी केंद्र पर कितने बच्चे आए, कितने को पोषाहार मिला और कितने बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र का समय खत्म होने के बाद घर गए।

हर दिन अपनी रिपोर्ट पोर्टल पर देनी होगी

मानीटरिंग की इस नयी व्यवस्था के लिए समाज कल्याण विभाग एक ऐप बना रहा। इस ऐप पर सभी आंगनबाड़ी संचालिकाओं को आंगनबाड़ी आरंभ होते ही एक कतार में खड़े कर बच्चों की तस्वीर लेनी है। तस्वीर का एक्सेस उच्च स्तर पर रहे इसके लिए एक पोर्टल काम करेगा। उक्त तस्वीर को अपने संबंधित जिले के आइकान पर जाकर आंगनबाड़ी संचालिकाओं को डाल देना है। जिले के हिसाब से उनके आंगनबाड़ी केंद्र का नाम उक्त ऐप पर पहले से फीड रहेगा। संबंधित आंगनबाड़ी केंद्र की सीडीपीओ और अन्य आला अधिकारी के पास इसका एक्सेस रहेगा। तस्वीर पोषाहार देने के समय और आंगनबाड़ी केंद्र से जब बच्चे घर जा रहे होंगे तो उस समय भी की जाएगी। तीन महीने तक पूरी तस्वीर सर्वर पर रहेगी। इससे संबंधित अधिकारी को मानीटङ्क्षरग में सुविधा होगी। आंगनबाड़ी केंद्र की संचालिकाओं का भी दोहन नहीं हो पाएगा। मानीटरिंग की पूरी व्यवस्था पारदर्शी हो जाएगी।

अभी एक-दो जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत चल रही यह व्यवस्था

समाज कल्याण विभाग के आला अधिकारी ने बताया कि वर्तमान एक-दो जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत यह व्यवस्था चल रही है। इसके परिणाम अच्छे आए हैैं। इसके बाद यह विचार किया गया कि सभी जिलों में इस व्यवस्था को लागू कर दिया जाए।

टाइमिंग का प्रोग्राम रहने के कारण सब कुछ साफ-साफ रहेगा


इस ऐप के लिए जो साफ्टवेयर काम करेगा उसके प्रोग्राम में टाइमिंग की भी व्यवस्था है। अगर आठ बजे वीडियो ली गयी तो उसके डालने के समय साफ-साफ नजर आएगा। आंगनबाड़ी केंद्र पर आठ बजे कितने बच्चे थे और बारह बजे कितनी संख्या थी यह भी नजर आएगा। इससे आंगनबाड़ी संचालिकाओं की जवाबदेही बढ़ जाएगी। 

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