बक्सर की अधजली लाश की कहानी: जिसके लिए जमाने से बगावत की उसने दगा दिया, पिता ने दी मौत

पटना, जेएनएन। बेटी शादी के दूसरे दिन ही ससुराल से भागकर मायके आ गई थी और प्रेमी के साथ रहने की जिद पर अड़ी थी, लेकिन प्रेमी भी शादी के बाद अपनाने को तैयार नहीं था। मायके में रह रही बेटी को देखकर समाज के लोग घरवालों को ताना मारते थे, बेटी की जिद और समाज के ताने से आजिज होकर फौजी पिता ने बेटे और रिश्तेदारों के साथ मिलकर बेटी की हत्या कर डाली। उसके पैर की बिछिया और सैंडल ने हत्या का राज खोल दिया।

हत्या को बड़े ही शातिराना तरीके से अंजाम दिया गया था, ताकि पुलिस हत्यारे की पहचान ना कर सके। हत्या की गुत्थी सुलझाने में पुलिस को भले ही देर लगी, लेकिन पुलिस ने हत्यारे पिता को सड़क से पैदल जाते हुए ही गिरफ्तार किया। पुलिस को उसने बताया कि लाखों रुपये खर्च कर बेटी की शादी बड़े धूमधाम से की थी। इसके बावजूद, वह शादी के दूसरे दिन अपने प्रेमी के साथ भाग निकली।

पिता ने रोते हुए कहा कि प्रेमी ने भी बाद में उसे छोड़ दिया था। फिर वह मेरे इज्जत को बर्बाद करने लगी थी। वह जिद पर अड़ी थी और उसका प्रेमी शादी के लिए तैयार नहीं था। जब हमने उसपर दबाव दिया तो उसने कहा कि मोहनिया काण्ड (गैंगरेप) दोहरा दूंगा। जिसके डर से मुझे यह फैसला लेना पड़ा। यह बताते हुए वह फफक-फफक कर रो पड़ा। 

रिसेप्शन की रात ही लड़की ने बता दी थी अपनी प्रेम कहानी

 इंदु की शादी डुमरांव के जिस परिवार में की गई थी, वह डुमरांव के संपन्न व्यवसायी का परिवार है। 5 मार्च 2018 को शादी होने के बाद सात मार्च को डुमरांव में रिसेप्शन का आयोजन था। उसी रात इंदु ने ससुराल वालों को अपनी पूरी प्रेम कहानी बताते हुए ससुराल से मायके जाने की इच्छा जताई थी।

भव्य रिसेप्शन समारोह में सैकड़ों लोग शामिल हुए थे। ससुरालवालों ने इंदु को समझाया कि सिर्फ रात भर इंतजार के बाद सुबह होते ही उसे मायके पहुंचा दिया जाएगा।

ससुराल में रिशेप्सन की रात ही मायके जाने की जिद कर रही थी

इस संबंध में डुमरांव निवासियों की मानें तो रिसेप्शन पार्टी डुमरांव की सबसे भव्य पार्टियों में शुमार थी। काफी भव्य इंतजाम किया गया था। रिसेप्शन की शाम ही इंदु ने ससुराल वालों के समक्ष अपनी पूरी प्रेम कहानी बताते हुए ससुराल से उसी रात मायके जाने की जिद पकड़ ली।

इस दौरान ससुराल वालों ने किसी प्रकार समझा-बुझाकर इंदु को शांत किया कि अभी पार्टी चल रही है। जिसमें उसका रहना ही सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। अचानक पार्टी के बीच उसके चले जाने से भारी बदनामी होगी। सिर्फ रात बीतने का इंतजार करे और सुबह होते ही उसे मायके भेज दिया जाएगा।

इस बीच पार्टी बीतने के बाद अगले दिन सुबह इंदु के पिता को ससुरालवालों ने फोन करते हुए पूरी बात बताई और आठ मार्च की सुबह पिता के आते ही उसकी विदाई कर दी थी, जिसके बाद वह मायके में ही रह रही थी। 

तीन दिसंबर को पिता ने कर दी थी हत्या

बताते चलें कि तीन दिसंबर की सुबह कुकुढ़ा गांव के बाहर खेत में युवती का अधजला शव मिलने से सनसनी मच गई थी। युवती को पहले सिर में गोली मारी गई थी, इसके बाद जला दिया गया था, पैर को छोड़ पूरा शरीर जल गया था।

मोबाइल सर्विलांस से खुला राज 

आरक्षी अधीक्षक उपेन्द्रनाथ वर्मा ने बताया कि शव मिलने के बाद पड़ताल के लिए पुलिस ने दो दिसंबर की रात में घटनास्थल पर सक्रिय सभी मोबाइल को सर्विलांस पर लिया। छानबीन के बाद 15-20 मोबाइल को छांटकर नजर रखी जा रही थी। नौ दिसंबर को पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि दिनारा बाजार के महेन्द्र प्रसाद के घर से एक लड़की गायब है।

पुलिस ने महेन्द्र के मोबाइल को सर्विलांस में मिले मोबाइल नंबरों से मिलाया तो वह उसमें मिल गया। इसके बाद महेन्द्र के बेटे मुकेश, मां शर्मिला देवी और पुत्री प्रीति को शव के पैर में मिले चप्पल की पहचान के लिए बुलाया गया। युवती की मां और भाई ने पहचानने से मना कर दिया। युवती की छोटी बहन प्रीति ने चप्पल के आधार पर बहन की पहचान की। इसके बाद सख्ती से पूछताछ में घरवालों ने सारा राज खोल दिया। 

बोधगया ले जाने के बहाने घर से ले गए

युवती को उसके पिता और भाई बोधगया ले जाने के बहाने बक्सर लेकर आए। दो दिसंबर की रात एक ही मोटरसाइकिल पर पिता और भाई लड़की को लेकर कुकुढ़ा पहुंचे। यहां पहले से पिता के भांजे समेत तीन और लोग मौजूद थे। भांजा कुकुढ़ा का ही रहने वाला है, उसने हत्या के लिए जगह तय की थी। रात 12 बजे युवती की हत्या कर शव को पुआल से जलाने के बाद सभी लोग दिनारा भाग गए।

 

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