मुंगेर गोली कांड को ले राज्‍यपाल से मिले रणदीप सुरजेवाला, CM नीतीश कुमार को बताया अयोग्‍य मुख्‍यमंत्री

पटना में संवाददाता सम्‍मेलन करते कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला।
Publish Date:Fri, 30 Oct 2020 03:05 PM (IST) Author: Amit Alok

पटना, जेएनएन। कांग्रेस के राष्‍ट्रीय महासचिव रणदीप सुरजेवाला (Randeep Surjewala) ने मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) व उपमुख्‍यमंत्री सुशील मोदी (Dy.CM Sushil Modi) को तत्‍काल निलंबित (Suspend) करने की मांग राज्‍यपाल फागू चौहान (Fagu Cahauhan) से की है। सुरजेवाला ने मुंगेर लाठीचार्ज एवं गोलीकांड (Munger Lathicharge and Firing Case) के मामले में जांच व कार्रवाई की मांग को लेकर कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल के साथ शुक्रवार को राज्‍यपाल से मुलाकात की। रणदीप सुरजेवाला ने बिहार की स्‍वास्‍थ्‍य व्‍यवस्‍था पर भी सवाल उठाते हुए नीतीश कुमार को अयोग्‍य मुख्‍यमंत्री करार दिया।

सुरजेवाला ने बिहार की कानून-व्‍यवस्‍था पर खड़े किए सवाल

रणदीप सुरजेवाला ने बिहार की कानून-व्‍यवस्‍था पर सवाल खड़े करते हुए मुंगेर की घटना को बर्बरतापूर्ण कार्रवाई करार दिया। कहा कि इस मामले की जांच करा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्‍होंने घटना के लिए मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार एवं उपमुख्‍यमंत्री सुशील मोदी को भी जिम्‍मेदार बताते हुए उन्‍हें निलंबित करने की मांग राज्‍यपाल से की है।

अयोग्‍य मुख्यमंत्री कर रहे स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ खिलवाड़

मीडियो से बातचीत करते हुए कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। कहा कि बिहार में 50 फीसद डॉक्टरों और 70 फीसद नर्सों के पद रिक्त पड़े हैं। उन्‍होने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सब कुछ जानते हुए भी एक ऐसे अयोग्‍य मुख्यमंत्री को गद्दी पर बनाये रखना चाहते हैं, जो बिहार के लोगो की स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ खिलवाड़ कर रहा है। यदि ऐसा ही चलता रहा तो बिहार की जनता एक दिन प्रधानमंत्री को भी नकार देगी।

डॉक्‍टरों व नर्सों के खाली पद भरेगी महागठबंधन की सरकार

सूरजेवाला ने आरोप लगाया कि बिहार सरकार ने स्वास्थ्य व्यवस्था को आइसीयू में डाल दिया है। यह व्यवस्था वेटीलेटर पर है। स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाली इस सरकार को एक मिनट भी सत्ता में रहने का अधिकार नहीं है। महागठबंधन की सरकार आते ही डाक्टरों और नर्सो सहित सभी पारा मेडिकल स्टाफ के पद सीधी बहाली से भरे जाएंगे। केवल डिग्री की प्रामणिकता की जांच के बाद साक्षात्कार होगा।

स्वास्थ्य के हर सूचकांक पर बिहार सबसे निचले पायदान पर

उन्होंने कहा कि कोई प्रदेश नहीं है, जहां सरकार अपने ही लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करे। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले नीति आयोग ने तो यहां तक कहा है कि बिहार के कारण देश मानव विकास सूचकांक में पिछड़ गया। केन्द्र सरकार की रिपोर्ट, संसद में सरकार के जवाब और सुप्रीम कोर्ट में बिहार सरकार के शपथ पत्र से ही जो तथ्य सामने आते हैं, वे शर्मनाक हैं। स्वास्थ्य के हर सूचकांक पर बिहार सबसे निचले पायदान पर है। 60 प्रतिशत डाक्टर, 71 प्रतिशत नर्स और लैब टेक्निशियन के 70 प्रतिशत पद खाली हैं। स्वास्थ्य केन्द्रों में 12 हजार 206 डाक्टरों की जगह मात्र पांच हजार हैं। 19 हजार 155 नर्सो की जगह मात्र 5 हजार 634 हैं। जबकि, स्वास्थ्य उपकेन्द्र भी आधे ही हैं। 774 कम्युनिटी स्वास्थ्य केन्द्रों की जगह मात्र 150 हैं। शर्मनाक तो यह है कि इन केन्द्रों को मात्र आठ डाक्टर चलाते हैं। यह आंकडा 2011 की जनगणना के आधार पर है। वर्तमान जनसंख्या के अनुसार तो स्थिति और भयावह है।

नतीजा है कि 40 प्रतिशत बच्चों को टीका नहीं लगाया जाता है। 10 प्रतिशत गर्भवती को ही सौ दिन तक फोलिक एसिड दी जाती है जबकि यह सभी गर्भवती को देना अनिवार्य है। 58 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं में खून कमी है।

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