अमित शाह के बयान का बिहार में एेसा हुआ असर, नीतीश चमके, महागठबंधन हुआ फीका..

पटना [काजल]। एक तरफ जहां बिहार में राष्‍ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व में बना पांच दलों को मिलाकर बना महागठबंधन बिखरता दिख रहा है, वहीं भारतीय जनता दल (बीजेपी) व जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के साथ बना राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) एक बार फिर से मजबूत दिख रहा है। आनेवाले विधानसभा चुनाव को लेकर जहां एनडीए ने तैयारी पूरे जोर-शोर से शुरू कर दी है और अपने नेता का भी एेलान कर दिया है, वहीं महागठबंधन अभीतक नेतृत्वविहीन बना हुआ है। 

एनडीए को मिल गया अपना नेता, महागठबंधन का कौन...

विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव को एक ओर जहां विपक्षी पार्टियों ने अपना नेता मानने से इनकार कर दिया है तो बीजेपी ने एक बार फिर अपने पुराने दोस्त जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भरोसा जताते हुए बिहार में उन्हें एक बार फिर एनडीए की कमान सौंप दी है।

अमित शाह ने कहा-एनडीए एकजुट, नीतीश कुमार ही हैं हमारे नेता 

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने एक वाक्य में ये कहकर तमाम कयासबाजी पर विराम लगा दिया है कि एनडीए गठबंधन अटल है और भाजपा वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ेगी और वही बिहार में एनडीए का चेहरा होंगे।

 

बयानवीरों की बोलती हुई बंद

अमित शाह का ये बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार प्रदेश बीजेपी के कई बड़े नेता नीतीश कुमार की कार्यशैली पर सवाल उठा चुके हैं। पिछले दिनों जब बाढ़ से बिहार खासकर पटना बुरी तरह प्रभावित हुआ तो सरकार में होने के बावजूद बीजेपी ने नीतीश कुमार पर सवाल खड़े किए थे। सबसे तेज आवाज केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की थी। उन्होंने यहां तक कह दिया कि ताली सरदार को तो गाली भी सरदार को।

विपक्ष को लगा धक्का, फुल कॉन्फिडेंस में दिखे नीतीश 

अमित शाह की इस घोषणा के बाद नीतीश कुमार भी उपचुनाव को लेकर हो रही चुनावी सभाओं में फुल कॉन्फिडेंस के साथ उतरे और मंच से जनसभाओं में भरोसा दिलाया कि बिहार में गठबंधन एकजुट है और कुछ लोग अख़बार में छपने के लिए जो बयान देते रहते हैं उसको ज़्यादा तरजीह ना दें। उनके इस बयान ने बयानवीरों की बोलती बंद हो गई है और विपक्ष को गहरा धक्का लगा है।

पासवान ने भी नीतीश को स्वीकारा

वहीं, एनडीए के तीसरे घटक दल लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने भी अमित शाह की बात का समर्थन करते हुए कहा है कि बिहार में एनडीए नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ेगा। नीतीश एनडीए के मुख्यमंत्री वर्तमान में हैं और आने वाले चुनाव में भी वे ही एनडीए के सीएम रहेंगे।

राजद नेता ने कहा-विपक्ष दिशाहीन, इसीलिए एनडीए आगे

एनडीए की एकजुटता को देखते हुए बिखरे हुए महागठबंधन के सबसे बड़े घटक दल राजद के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने खुलेआम कहा कि बिहार में विपक्ष दिशाहीन है इसलिए वोट की गणित में एनडीए आगे है। तिवारी ने कहा कि केंद्र हो या बिहार की एनडीए सरकार के एजेंडे में रोजी-रोजगार और भूख-प्यास का कोई स्थान नहीं है, लेकिन वोट के गणित में सरकार आगे है। उन्होंने कहा कि इसका सेहरा बहुत हद तक दिशाहीन विपक्षियों के सिर भी जाता है। 

नीतीश के महागठबंधन में आने की हो रही थी चर्चा, लगा विराम

बता दें कि बीजेपी और जेडीयू के बीच पिछले दिनों नोंकझोंक को देखते हुए महागठबंधन के कई नेता ये कहते नजर आए कि नीतीश कुमार का फिर से एनडीए में दम घुट रहा है और वो वापस महागठबंधन में आ जाएंगे। नेताओं को इंतजार था और व खुलेआम कहते फिर रहे थे कि नीतीश कुमार बीजेपी को छोड़कर आ रहे हैं और हम उनका स्वागत करेंगे। लेकिन, इन सभी कयासों पर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने विराम लगा दिया है।

लोकसभा चुनाव में दिखी एकता, हार के बाद बिखर गया विपक्ष

बता दें कि बिहार में लोकसभा से पहले जिस तरह से विपक्ष ने अपनी चट्टानी एकता को लेकर तमाम दावे किए थे, सारे फेल हो गए और लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद से ही विपक्ष में बिखराव शुरू हो गया। विपक्षी नेताओं ने हार का ठीकरा गठबंधन का नेतृत्व कर रहे तेजस्वी यादव पर फोड़ा।

 

विपक्ष का गठबंधन पांच पार्टियों ने मिलकर बनाया था। जबकि, एनडीए में मात्र तीन पार्टियों का गठजोड़ है। लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद जैसे ही उपचुनाव की घोषणा हुई, वैसे ही सीटों को लेकर महागठबंधन के घटक दलों का कलह उजागर हो गया औऱ सबने अलग रास्ता अपना लिया। वहीं एनडीए में सीटों को लेकर कोई परेशानी नहीं दिखी, बेहतर तालमेल दिखा। 

उपचुनाव में सीटों को लेकर विपक्ष टूटा

लोकसभा उपचुनाव की पांच में से चार सीटों दरौंदा, सिमरी बख्तियारपुर, बेलहर और नाथनगर से राष्ट्रीय जनता दल ने अपने उम्मीदवारों को उतारने की न सिर्फ़ घोषणा की है, बल्कि लड़ने के लिए पार्टी का सिंबल भी दे दिया तो इससे नाराज पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी  ने भी अपनी पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) की ओर से नाथनगर से अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी।

मांझी ने कहा कि राजद ने बिना बात किए चार सीटों पर अपने कैंडिडेट को सिंबल दे दिया। उन्होंने गठबंधन धर्म का पालन नहीं किया। महागठबंधन के बाक़ी सहयोगी दल राजद के फैसले से आश्चर्यचकित हैं।

मांझी के बाद महागठबंधन के एक अन्य घटक दल वीआइपी के  सन ऑफ मल्लाह कहे जाने वाले मुकेश सहनी ने भी सिमरी बख्तियारपुर सीट पर लड़ने की घोषणा कर दी। 

मुकेश ने कहा था, "जिस बुनियाद पर महागठबंधन बना था, उसका पालन होना चाहिए था। हमनें अपने प्रतिनिधित्व के आधार पर एक सीट से लड़ने की बात कही थी, लेकिन आरजेडी ने एकतरफा फैसला कर लिया। उसे सहयोगी दलों को भरोसे में लेना चाहिए था। आरजेडी नेतृत्व की ऐसी तानाशाही कैसे चलेगी?"

उन्होंने आगे कहा, ''उपचुनाव के दौरान बीजेपी, जेडीयू और एलजेपी ने साझा अभियान चलाकर जनता के बीच अच्छी तरह साबित किया कि यह गठबंधन अटूट है।''

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