बिहार के हर प्रखंड में अनाज रखने के लिए बनेंगे साइलो, बक्‍सर और कैमूर से हो रही है शुरुआत

बिहार के किसान भाइयों के लिए यह अच्छी खबर है। बिहार में प्रतिवर्ष हजारों टन अनाज की बर्बादी को रोकने के लिए आपकी सरकार कनाडा की साइलो तकनीक के आधार पर स्टील के नए भंडार गृह बनाने जा रही है।

Shubh Narayan PathakTue, 19 Oct 2021 08:24 AM (IST)
अनाज भंडारण के लिए बनाए जाएंगे साइलो। प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

पटना, दीनानाथ साहनी। बिहार के किसान भाइयों के लिए यह अच्छी खबर है। बिहार में प्रतिवर्ष हजारों टन अनाज की बर्बादी को रोकने के लिए आपकी सरकार कनाडा की साइलो तकनीक के आधार पर स्टील के नए भंडार गृह बनाने जा रही है। स्टील से बने साइलो (गोदाम या भंडार कक्ष) में रखा खाद्यान लंबे समय तक सुरक्षित रहेगा। राज्य सरकार की पहल रंग लाई तो प्रत्येक प्रखंड मुख्यालय में पांच हजार मीट्रिक टन क्षमता के साइलो अगले तीन वर्षों में तैयार हो जाएंगे। बहरहाल, चालू वित्तीय वर्ष में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआइ) द्वारा बक्सर और कैमूर जिले में साइलो का निर्माण कराया जाएगा। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव विनय कुमार ने कहा कि प्रदेश के सभी प्रखंड मुख्यालय में पांच-पांच हजार मीट्रिक टन क्षमता का साइलो बनाने का प्रस्ताव है। फिलहाल केंद्र सरकार ने बक्सर और कैमूर में साइलो गोदाम बनाने की सहमति दी है जिसे भारतीय खाद्य निगम बनाएगा। साइलो पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से बनाया जाएगा।

बक्सर और कैमूर में 37,500 मीट्रिक टन क्षमता का साइलो जल्द 

केंद्र सरकार ने बक्सर जिले के इटाढ़ी (बैरी) और कैमूर जिले के मोहनिया (सोंधियारा) में साइलो बनाने की मंजूरी दी है। दोनों जगहों पर साइलो 11 एकड़ में बनेगा, जिसकी लागत 33 करोड़ रुपये अनुमानित है। इनकी भंडारण क्षमता 37,500 मीट्रिक टन होगी।

राज्‍य खाद्य निगम के पास 20.75 लाख मीट्रिक टन क्षमता

राज्य खाद्य निगम के पास 20.75 लाख मीट्रिक टन खाद्यान भंडारण की क्षमता है। धान और गेहूं की अधिक खरीद होने पर निजी गोदामों को किराये पर लेकर भंडारण की व्यवस्था करनी पड़ती है। भंडारण की क्षमता कम होने के कारण बफर स्टाक बढ़ाने में भी समस्याएं आती हैं। साइलो के बन जाने के बाद खाद्यान भंडारण का संकट खत्म होने की उम्मीद है।

क्या है साइलो, यहां जानिए

यह खाद्यान या सामग्री के भंडारण (स्टोरेज) के लिए स्टील का ढांचा होता है। निर्माण में केवल स्टील का उपयोग किया जाता है। खासियत यह है कि मौसम के अनुसार इसका तापमान स्वत: नियंत्रित रहता है। इसमें बिना बोरी के लंबे समय तक अनाज संग्रहित किया जा सकता है। इसमें न तो नमी होती है और न ही अनाज में कीड़े आदि लगते हैं। खाद्यान को खराब होने से बचाने के लिए प्रयोग की जाने वाली औषधियां भंडारण गृहों को खोले बिना स्वचालित तकनीक से मिलाई जाती हैं।

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