मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिखाई सख्ती, जानिए क्या कहा

पटना/ नई दिल्ली [जेएनएन]। मुजफ्फरपुर शेल्टर होम यौन उत्पीड़न कांड में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआइ रिपोर्ट देखने के बाद मामले को गंभीर बताते हुए सख्त रुख अख्तियार किया है। कोर्ट ने पुलिस से बिहार की पूर्व मंत्री मंजू वर्मा व उनके पति के घर से भारी मात्र में बरामद गोला बारूद की गंभीरता से जांच करने को कहा है।

इसके अलावा समाज कल्याण विभाग द्वारा कुछ लड़कियों को दूसरे शेल्टर होम में स्थानांतरित करने की भी सीबीआइ से जांच करने को कहा है। मुख्य आरोपित ब्रजेश ठाकुर और उसके एनजीओ के खिलाफ आयकर जांच के आदेश दिए हैं। पूर्व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा को मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामला उजागर होने के बाद पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

जस्टिस मदन बी. लोकुर व जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने गुरुवार को सीबीआइ की ओर से पेश दो स्थिति रिपोर्टो को देखने के बाद ये आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट देखकर लगता है कि जांच सही दिशा में है, लेकिन कुछ पहलुओं पर ध्यान देने की जरूरत है।

कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट से पता चलता है कि चंद्रशेखर वर्मा और उनकी पत्नी मंजू वर्मा के पास भारी मात्रा में गैरकानूनी गोलाबारूद थे। कोर्ट ने बिहार पुलिस से कहा है कि वह इन पहलुओं को गंभीरता से देखे। कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट के मुताबिक जिस शेल्टर होम के बारे में सीबीआइ जांच चल रही है वहां से समाज कल्याण विभाग ने कुछ लड़कियों को 20 मार्च को स्थानांतरित किया था।

हालांकि यह साफ नहीं है कि इन्हें क्यों स्थानांतरित किया गया था जबकि बिहार सरकार को मई में टाटा इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंस की रिपोर्ट के बारे में पता चल गया था। कोर्ट ने कहा कि स्थानांतरण को देखकर लगता है कि बिहार के समाज कल्याण विभाग को शेल्टर होम की अवांछित गतिविधियों के बारे में पता था और इसीलिए लड़कियां स्थानांतरित की गईं।

कोर्ट ने सीबीआइ को आदेश दिया है कि वह समाज कल्याण विभाग के सारे रिकार्ड जब्त करे और जांच करे। कोर्ट ने सीबीआइ से चार सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।

पड़ोसियों ने सुनी थीं चीखें पर भयवश नहीं बताया

कोर्ट ने कहा कि लगता है कि सेवा संकल्प एवं विकास समिति एनजीओ का कर्ताधर्ता ब्रजेश ठाकुर बहुत प्रभावी व्यक्ति है। पड़ोसी उससे डरते हैं इसलिए उसके खिलाफ शिकायत नहीं करते। यह पता चला है कि पड़ोस के लोगों ने शेल्टर होम से लड़कियों के चीखने की आवाजें सुनीं थीं लेकिन बृजेश के डर से उन्होंने यह बात किसी को नहीं बताई। कोर्ट ने सीबीआइ से कहा है कि वह ब्रजेश ठाकुर की पृष्ठभूमि, संपर्क और प्रभाव के पहलू की जांच करे।

जांच में यह भी पता चला है कि ब्रजेश के एनजीओ को दस साल में बिहार सरकार से 4.5 करोड़ रुपये मिले और इस दौरान 35 वाहन खरीदे गए। हालांकि ब्रजेश और एनजीओ की अन्य संपत्तियों के बारे में साफ नहीं है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे में जरूरी हो जाता है कि आयकर विभाग इसकी संपत्ति और आय की जांच करे।

कोर्ट ने कहा कि सीबीआइ की टीम संबधित आयकर आयुक्त से जांच का अनुरोध करेगी। कोर्ट ने निम्हांस को पीड़िताओं से बातचीत और खुलासे में सीबीआइ की मदद अक्टूबर के पहले सप्ताह तक जारी रखने की अनुमति दे दी है। मामले में कोर्ट 25 अक्टूबर को फिर सुनवाई करेगा।

शेल्टर होम मामले में रिपोर्टिग से रोक हटाई, सावधानी बरतने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने मुजफ्फरपुर संरक्षण गृह कांड की मीडिया रिपोर्टिग पर पटना हाई कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक समाप्त कर दी है। अब मीडिया रिपोर्टिग पर रोक नहीं है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया से कहा है कि वह पीड़ितों के हितों को ध्यान में रखते हुए ऐसी घटनाओं की जिम्मेदारी से रिपोर्टिग करे। घटनाओं को सनसनीखेज न बनाया जाए। साथ ही पीड़िता का इंटरव्यू लेने की मनाही के आदेश को ध्यान रखने को कहा है। 

ऐसे मामलों की रिपोर्टिग की गाइडलाइन पर होगा विचार

सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों की रिपोर्टिग के लिए गाइडलाइन तय करने पर विचार का मन बनाते हुए सुनवाई में मदद के लिए प्रेस काउंसिल आफ इंडिया, न्यूज ब्राडकास्ट स्टैंडर्स अथारिटी (एनबीएसए), एडीटर गिल्ड और इंडियन ब्राड कास्टिंग फेडरेशन को नोटिस जारी किया है। कोर्ट चार अक्टूबर को मामले पर फिर सुनवाई करेगा। 

सीबीआइ ने चार को किया गिरफ्तार

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम यौन उत्पीड़न कांड की जांच कर रही सीबीआइ ने मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के तीन स्टाफ के अलावा समाज कल्याण के सहायक निदेशक से पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया। सीबीआइ ने सोनपुर और मुजफ्फरपुर में चार ठिकानों पर छापेमारी की। कई बैंक खाते भी फ्रीज किए जाने की बात सामने आई है।

गिरफ्तार किये गए लोगों में गुड्डू, विजय और संतोष बालिका गृह के संचालक ब्रजेश के स्टाफ हैं जबकि एक समाज कल्याण विभाग के सहायक निदेशक रोजी रानी है।

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