एनडीए की प्रवेश परीक्षा में धांधली, एसआइटी का गठन

पटना । संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा रविवार को देशभर में आयोजित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) की प्रवेश परीक्षा में बड़े पैमाने में धांधली उजागर हुई है। रक्षा मंत्रालय से जुड़ा मामला होने के कारण आयोग के अधिकारी भी सकते में आ गए हैं। आयोग की पहल पर पटना क्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षक (आइजी) नैय्यर हसनैन खान ने 12 सदस्यीय विशेष अनुसंधान इकाई (एसआइटी) गठित कर दी है। इसमें दो एसपी, तीन डीएसपी, चार इंस्पेक्टर और तीन सब-इंस्पेक्टर शामिल हैं। सेंट्रल रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक राजेश कुमार को कांड की प्रगति की समीक्षा करने का आदेश दिया गया है।

दूसरी पाली में पकड़ा गया था सौरव :

रविवार को राजधानी के एएन कॉलेज में दो पालियों में एनडीए की प्रवेश परीक्षा हो रही थी। दूसरी पाली में परीक्षा समाप्त होने से डेढ़ घंटे पहले परीक्षक की नजर नालंदा जिला निवासी अभ्यर्थी सौरव आनंद पर पड़ी। उसके पास मोबाइल मिला। उससे वह देखकर प्रश्नों के उत्तर लिख रहा था। परीक्षक ने तत्काल उसे हिरासत में लेकर एसके पुरी थाना पुलिस को सौंप दिया। पुलिस ने जब उसका मोबाइल खंगाला तो उसमें एक नंबर मिला, जिससे वाट्सएप के जरिए उसे प्रश्नों के जवाब मिल रहे थे। छानबीन में पता चला कि उस नंबर का इस्तेमाल दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) से किया जा रहा था। सिम कार्ड भी जेएनयू के एक छात्र के नाम से रजिस्टर्ड मिला।

डीएसपी को बनाया गया कांड का आइओ :

थाना पुलिस ने परीक्षा के दौरान नकल करने का साधारण मामला समझकर आइपीसी, एक्जामिनेशन एक्ट और आइटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कर सौरव को जेल भेज दिया। लेकिन, जब यूपीएससी ने पटना पुलिस को इस परीक्षा की संवेदनशीलता बताई, तब एसआइटी का गठन हुआ। पहले इस कांड का अनुसंधानकर्ता दारोगा अनुप्रिया को बनाया गया था। अब इसके आइओ सचिवालय डीएसपी राजेश प्रभाकर होंगे। सौरव को रिमांड पर लेने के लिए एसके पुरी थाने की पुलिस बुधवार को कोर्ट में अर्जी देगी।

: किसकी मदद से अंदर गया मोबाइल :

एनडीए की परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों को पेन/पेंसिल के अलावा किसी वस्तु को लेकर केंद्र के अंदर प्रवेश करने की इजाजत नहीं होती। कदाचारमुक्त परीक्षा कराने के लिए मजिस्ट्रेट, पुलिस पदाधिकारी, केंद्राधीक्षक से लेकर परीक्षक तक को यूपीएससी की गाइडलाइन मुहैया कराई जाती है। केंद्र पर किसी तरह के मोबाइल का इस्तेमाल नहीं हो सके, इसके लिए जैमर भी लगाया गया था। ऐसे में एसआइटी इस बिंदु पर भी छानबीन कर रही है कि किसकी मदद से सौरव एंड्रॉयड मोबाइल लेकर सुरक्षा घेरा पार कर गया।

----------

: चार अन्य नंबरों पर भी भेजे गए प्रश्न :

सौरव के मोबाइल को तकनीकी जांच के लिए एफएसएल भेजा जाएगा। फिलहाल पता चला है कि उसने चार अन्य नंबरों पर भी प्रश्नपत्र वाट्सएप किए थे। हालांकि उन नंबरों से उत्तर नहीं भेजे गए थे। सौरव ने जवाब भेजने वाले जेएनयू के छात्र को दोनों पाली के प्रश्नपत्र भेजे थे। पहली पाली के प्रश्नपत्र और उत्तर को उसने डिलीट कर दिया था। एसआइटी पता लगा रही है कि चारों नंबर किसके हैं और उन्हें भी प्रश्नपत्र क्यों भेजे गए? इसका जवाब सौरव को रिमांड पर लेने के बाद मिल सकता है।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.