दिल्ली-एनसीआर की तर्ज पर विकसित किया जाएगा पटना, एजेंसी चयन के लिए 17 को खुलेगी निविदा

पटना महानगर क्षेत्र प्राधिकार की ओर से इसके लिए एजेंसियों को आमंत्रित किया गया है। इसी माह 27 अक्टूबर को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्री-बिड मीटिंग होगी। 17 नवंबर को निविदा खुलेगी जिसके बाद एजेंसी के चयन का अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

Akshay PandeyFri, 15 Oct 2021 08:13 PM (IST)
दिल्ली-एनसीआर की तरह बिहार की राजधानी पटना को विकसित किया जाएगा। सांकेतिक तस्वीर।

राज्य ब्यूरो, पटना : पटना महानगर क्षेत्र के करीब 1167 वर्ग किमी क्षेत्र के सर्वे और प्लानिंग के लिए एजेंसी की खोज शुरू हो गई है। सबकुछ ठीक रहा तो अगले माह नवंबर तक एजेंसी का चयन कर लिया जाएगा। पटना महानगर क्षेत्र प्राधिकार की ओर से इसके लिए एजेंसियों को आमंत्रित किया गया है। इसी माह 27 अक्टूबर को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्री-बिड मीटिंग होगी। 17 नवंबर को निविदा खुलेगी जिसके बाद एजेंसी के चयन का अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इसके पूर्व भी एजेंसी के चयन के लिए निविदा आमंत्रित की गई थी मगर उसे कतिपय कारणों से रद कर दिया गया। उम्मीद है कि नई एजेंसी दिसबंर से अपना काम शुरू कर देगी। 
 
पटना पर कम होगा आबादी का दबाव

पटना महानगर क्षेत्र को दिल्ली-एनसीआर की तर्ज पर विकसित किया जाना है। जिस तरह दिल्ली के आसपास के इलाकों को विकसित कर राजधानी पर आबादी का दबाव कम किया गया है, वैसा ही पटना में करने की योजना है। अभी पटना के आसपास विकास तो हो रहा मगर वह सुनियोजित ढंग से नहीं हो पा रहा। एजेंसी का काम यही होगा। सर्वे के दौरान महानगर क्षेत्र की भूमि के इस्तेमाल, रोजगार, बाजार, व्यवसाय, परिवहन आदि को लेकर जगह चिह्नित की जाएगी। पटना शहर पर आबादी का दबाव कम करने के लिए मास्टरप्लान-2031 में पांच सेटेलाइट टाउन बनाने की भी योजना है। बिहटा, नौबतपुर, पुनपुन, फतुहा और खुसरूपुर में इसके निर्माण का प्रस्ताव है। 

 
पांच ग्रुप में बांटकर बनेगी योजना

पटना महानगर क्षेत्र के अंतर्गत बिहटा से दनियावां तक 1167 किमी का इलाका आएगा। इसमें पटना नगर निगम, दानापुर नगर परिषद, फुलवारीशरीफ नगर परिषद, खगौल नगर परिषद ,मनेर नगर पंचायत और फतुहा नगर पंचायत शामिल हैं। इसे पांच ग्रुप में बांटा गया है, जिसमें 14 जोन हैं। प्रारंभिक योजना के अनुसार, कुल क्षेत्र का 60 फीसद इलाका आवासीय होगा। इसके अलावा 6.6 फीसद क्षेत्र व्यावसायिक एवं 9.2 फीसद क्षेत्र उत्पादन के मकसद से इस्तेमाल किया जाएगा। करीब 13.8 फीसद इलाके में सड़क और परिवहन सुविधाएं होंगी। 

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