पटना हाईकोर्ट फिजिकल सुनवाई के लिए खुलेगा या नहीं? प्रशासन ने जारी किया ये नोटिस

पटना हाईकोर्ट प्रशासन ने नोटिस जारी कर सूचित किया है कि न्यायालय फिजिकल माध्यम से सुनवाई शुरू करने की प्रक्रिया 20 अक्टूबर 2021 को कोरोना की स्थिति का जायजा लेने के बाद करेगा। साथ ही यह भी निर्णय लिया जाएगा कि फिजिकल कोर्ट की कार्यवाही किस हद तक संभव होगी।

Akshay PandeySat, 11 Sep 2021 10:42 PM (IST)
पटना हाईकोर्ट के बाहरी परिसर का दृश्य। जागरण आर्काइव।

राज्य ब्यूरो, पटना : पटना हाईकोर्ट फिजिकल माध्यम से सुनवाई के लिए खुलेगा या नहीं यह फैसला दशहरा की छुट्टियों के बाद लिया जाएगा। पटना हाईकोर्ट प्रशासन ने नोटिस जारी कर सूचित किया है कि न्यायालय फिजिकल माध्यम से सुनवाई शुरू करने की प्रक्रिया 20 अक्टूबर, 2021 को कोरोना की स्थिति का जायजा लेने के बाद करेगा। साथ ही यह भी निर्णय लिया जाएगा कि फिजिकल कोर्ट की कार्यवाही किस हद तक संभव होगी और इसे किस प्रकार चलाया जा सकेगा। 

हाईकोर्ट में मार्च 2020 से मुकदमों की सुनवाई आनलाइन कर रहा है। कई बार बिहार स्टेट बार काउंसिल एवं अधिवक्ता संघों के प्रतिनिधियों ने हाईकोर्ट प्रशासन से फिजिकल कोर्ट शुरू करने का अनुरोध किया है लेकिन इसपर कोई फैसला नहीं लिया गया। चार जनवरी 2021 से पटना हाईकोर्ट को हाइब्रिड रूप से शुरू किया गया था लेकिन मार्च 2021 में करोना के बढ़ते मामलों की वजह से आनलाइन सुनवाई चल रही है। एडवोकेट एसोसिएशन के महासचिव शैलेन्द्र कुमार सिंह ने बिहार में कोरोना मामले कम होने पर हाईकोर्ट में फिजिकल सुनवाई शुरू करने की गुहार मुख्य न्यायाधीश से लगाई थी, लेकिन नोटिस से साफ हो गया कि इस मामले पर 20 अक्टूबर के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। 

पॉलिटेक्निक के छात्रों को प्रोन्नत करने की याचिका निष्पादित


पटना हाई कोर्ट ने पॉलीटेक्निक के छात्रों को प्रोन्नत करने की याचिका को निष्पादित करते हुए सरकार के समक्ष अभ्यावेदन देने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश संजय करोल एवं न्यायाधीश एस कुमार की खंडपीठ ने मनोरंजन कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त आदेश दिया। याचिकाकर्ता ने पॉलिटेक्निक के पहले, तीसरे, चौथे और पांचवे सेमेस्टर के लेटरल एंट्री के छात्रों को यूजीसी द्वारा जुलाई में जारी आदेश के तहत अगले सेमेस्टर में प्रोन्नत करने की गुहार लगाई थी। साथ  ही झारखंड, यूपी, राजस्थान, हरियाणा और बिहार के विश्वविद्यालयों में बगैर किसी परीक्षा के ही रिवाइज्ड एकेडमिक कैलेंडर 2021-22 और एआईसीटीई के अनुसार अगले सेमेस्टर में प्रमोट करने के लिए आदेश देने का भी आग्रह किया था। याचिकाकर्ता को आदेश की तिथि से चार सप्ताह के अंदर संबंधित अधिकारी के समक्ष अभ्यावेदन देना होगा। इसके दो महीने के भीतर विचार करते हुए निष्पादित करने को कहा गया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को जरूरत पडऩे पर मामले को कोर्ट के समक्ष लाने की भी छूट दी है जिस पर प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई होगी। 

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