बिहार के सिर्फ सात जिलों में हर घर पहुंचा नल का जल, मंत्री की ओर से कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी बेअसर

बिहार में नल-जल योजना का बुरा हाल। प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

हर घर नल का जल योजना को लागू करने के मामले में कड़ी कार्रवाई की धमकी बेअसर साबित हो रही है। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण और पंचायती राज विभाग के हिस्से की योजना का हाल यह है कि सिर्फ सात प्रमंडलों में सौ प्रतिशत लक्ष्य हासिल हो पाया है।

Shubh Narayan PathakFri, 16 Apr 2021 08:46 AM (IST)

पटना, राज्य ब्यूरो। हर घर नल का जल योजना को लागू करने के मामले में कड़ी कार्रवाई की धमकी बेअसर साबित हो रही है। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण और पंचायती राज विभाग के हिस्से की योजना का हाल यह है कि सिर्फ सात प्रमंडलों में सौ प्रतिशत लक्ष्य हासिल हो पाया है। पीएचइडी के कुल 42 प्रमंडल हैं। बाकी 37 प्रमंडलों में कुछ ऐसे भी हैं, जिनकी उपलब्धि 22 प्रतिशत से भी कम है। जमुई प्रमंडल की उपलब्धि सिर्फ 21. 82 प्रतिशत है। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग नल जल योजना की उपलब्धियों का समेकित (पंचायती राज विभाग सहित) ब्यौरा जारी करता है।

कई बार कार्रवाई की चेतावनी दे चुके हैं मंत्री

कोरोना की आपदा को इस योजना को लागू करने वाली एजेंसियों और विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों ने अवसर में बदल दिया है। तभी तो जिस योजना को मार्च 2020 में पूरी होनी थी, आज तक अधूरी है। विभागीय मंत्री रामप्रीत पासवान कई बार कड़ी कार्रवाई की धमकी दे चुके हैं। मुखिया और पंचायत स्तर के दूसरे प्रतिनिधियों को धमकी दी जा रही है कि योजना नहीं पूरी हुई तो चुनाव लड़ने से रोक दिए जाएंगे। पर, जमीन पर इनका कोई असर नहीं हो रहा है।

सिर्फ इनकी उपलब्धि सौ प्रतिशत

लोक स्वास्थ्य विभाग के प्रमंडलों की संख्या 42 है। इनमें से सिर्फ सात प्रमंडलों की उपलब्धि सौ प्रतिशत है। ये प्रमंडल हैं:-अरवल, मोतिहारी, ढाका, गोपालगंज, हिलसा, शिवहर और पश्चिम चंपारण। अररिया भी लक्ष्य हासिल करने की ओर अग्रसर है। उस प्रमंडल में 99. 98 प्रतिशत काम हो गया है। जमुई, कटिहार और किशनगंज की उपलब्धि 50 प्रतिशत से कम है।

इनकी हालत कुछ बेहतर

बांका, भोजपुर, बक्सर, गया, मोतिहारी, जहानाबाद, मधुबनी, मधेपुरा, मुजफ्फरपुर, पटना पूर्वी एवं पश्चिमी और वैशाली प्रमंडलों की उपलब्धियां 90 प्रतिशत से अधिक है। अन्य प्रमंडल 50 प्रतिशत से अधिक और 90 प्रतिशत से कम लक्ष्य हासिल कर पाए हैं।

तकनीकी स्वीकृति में भी देरी

दोष सिर्फ निर्माण एजेंसियों का ही नहीं है। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग की रिपोर्ट बता रही है कि 11 हजार दो सौ 34 योजनाएं इसलिए लंबित हैं, क्योंकि इन्हें तकनीकी स्वीकृति नहीं मिल पाई है। बिना तकनीकी स्वीकृति के कोई योजना शुरू नहीं हो सकती है। साढ़े 10 हजार से अधिक योजनाएं तमाम तरह की स्वीकृति और एजेंसियों को काम देने के बावजूद पूरी नहीं हो पाई हैं।

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