बेऊर नहीं, तब भी बेउर ही था नाम, 112 साल पुराने राजस्‍व नक्शे को देखेंगे तब दूर होगा कन्‍फ्यूजन

राजस्व व भूमि सुधार विभाग की साइट पर हलका और मौजा में बेउर। पथ निर्माण विभाग के दिशा निर्देशक व स्कूल में एक नाम। केंद्रीय कारा के बोर्ड पर बेऊर नाम होने से हो रही कन्‍फ्यूजन की स्थिति।

Vyas ChandraThu, 23 Sep 2021 07:12 AM (IST)
112 साल पुराने नक्‍शे पर लिखा बेउर। जागरण

जितेंद्र कुमार, पटना।  सौ साल पहले से जिस गांव को बेउर लिखा जाता रहा है, वह अचानक बेऊर हो गया। इसने ऐसा भ्रम पैदा कर दिया कि कहीं बेउर तो कहीं बेऊर लिखा जा रहा है। बेउर में आदर्श केंद्रीय कारा बनने के बाद उसके बोर्ड पर बेऊर लिख दिया गया, जबकि जेल के पुराने बोर्ड पर बेउर था। ऐसा ही थाना के साथ है। बेउर या बेऊर, दैनिक जागरण ने जब इसकी पड़ताल करते हुए साक्ष्य जुटाए तो 112 साल पुराना राजस्व नक्शा मिला, जिस पर गांव का नाम 'बेउर ही लिखा है। बेउर अब नगर निगम का हिस्सा है। बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की वेबसाइट पर भी बेउर दर्ज है, लेकिन गृह विभाग के पत्राचार में बेऊर लिखा जा रहा है। पुराने दस्तावेज के आधार पर ही पथ निर्माण विभाग भी बेउर ही लिखता है। सड़कों पर दिशा निर्देशक बोर्ड पर बेउर अंकित है। थाने की जिप्सी पर बेउर है, पर बोर्ड पर बेऊर। वहीं, स्टेट बैंक और स्थानीय मध्य विद्यालय के बोर्ड पर बेउर है। 
1908-09 के नक्‍शे में गांव का नाम लिखा है बेउर
बंगाल से बिहार के अलग होने से पहले ही 1908-09 में जो राजस्व नक्शा बनाया गया, उसमें थाना नंबर 33, परगना फुलवारी और गांव बेउर लिखा हुआ है। फुलवारी का नाम बाद में फुलवारीशरीफ हो गया। आजादी के बाद 1957-58 में पंचायती राज का गठन किया गया और बेउर को ग्राम पंचायत का दर्जा दिया गया। पंचायत राज कार्यालय के पत्राचार में भी बेउर ही लिखा हुआ है। दानापुर कैंट से पटना सिटी तक अशोक राजपथ ही मुख्य पथ हुआ करता था। 1926 में दानापुर से बाइपास रोड के रूप में बेली रोड (अब जवाहर लाल नेहरू पथ) होते हुए पटना जंक्शन से कंकड़बाग रोड का निर्माण कराया गया। जब शहर की आबादी बढ़ी तो अनीसाबाद से बेउर होते हुए न्यू बाइपास का निर्माण 1970 के आसपास कराया गया, जो बाद में गांधी सेतु से जुड़ा। पथ निर्माण विभाग ने भी न्यू बाइपास पर मार्ग निर्देशिका बोर्ड पर बेउर कारागार ही लिखा है। 
नगर निगम के पत्राचार के पता में भी वही नाम
बेउर ग्राम पंचायत की जमीन पर आदर्श कारा का निर्माण 1996 में किया गया। इससे पहले 1980 के आसपास यहां गंगा कार्य परियोजना के तहत सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जमीन ली गई थी। 2002 में यह पंचायत पटना नगर निगम में शामिल हुआ। नगर निगम के पत्राचार में आज भी बेउर ही लिखा जाता है। गृह विभाग ने थाना का गठन किया, जिसकी गाड़ी और बोर्ड पर भी बेउर लिखा मिला। हालांकि थाना भवन पर जेल की तरह ही बेऊर लिखा है। 

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